9 अक्टूबर 2026
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विश्वेंद्र सिंह का राजस्थान कांग्रेस पर हमला: 'चापलूसी मेरे खून में नहीं', कारण बताओ नोटिस के बाद नया विवाद

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विश्वेंद्र सिंह का राजस्थान कांग्रेस पर हमला: 'चापलूसी मेरे खून में नहीं', कारण बताओ नोटिस के बाद नया विवाद

सारांश

राजस्थान कांग्रेस के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कारण बताओ नोटिस की समय सीमा बीतने के बाद भी जवाब देने की जगह सोशल मीडिया पर पार्टी नेतृत्व पर खुलकर हमला बोला। 'चापलूसी मेरे खून में नहीं' — यह बयान राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक दरारों को एक बार फिर उजागर कर गया।

मुख्य बातें

विश्वेंद्र सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट में राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला।
पार्टी की अनुशासनात्मक समिति के कारण बताओ नोटिस का जवाब सात दिनों की समय सीमा के बाद भी नहीं दिया।
सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पहले निशाना बनाने के आरोप में नोटिस मिला था।
उन्होंने पार्टी को 'भगवान भरोसे' छोड़े जाने और आत्मसम्मान वाले नेताओं की 'घुटन' का आरोप लगाया।
युवा कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और महिला सशक्तिकरण के अभाव पर भी चिंता जताई।
आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज़ हो गई हैं।

राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए पार्टी नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया, जिससे राजस्थान कांग्रेस के भीतर गुटीय तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से लिखा कि 'चापलूसी मेरे खून में नहीं है, और न ही मैं कभी इसमें शामिल होऊंगा' — यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पार्टी की अनुशासनात्मक समिति उन्हें पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी कर चुकी है।

नोटिस और विवाद की पृष्ठभूमि

पार्टी की अनुशासनात्मक समिति ने सिंह को सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निशाना बनाते हुए पार्टी की विचारधारा से हटकर बयान दिए थे। समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई आधिकारिक जवाब न मिलने के कारण राजनीतिक गलियारों में आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं।

उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब सिंह ने पार्टी नेतृत्व से सार्वजनिक मतभेद जताया हो। राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है और विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह और गहरी हो गई है।

सिंह के आरोप और मुख्य बिंदु

सिंह ने अपनी पोस्ट में पार्टी की मौजूदा स्थिति पर गहरा अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि छह दशकों तक देश पर शासन करने वाला यह संगठन अब राजस्थान में प्रभावी नेतृत्व के अभाव में जी रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को 'भगवान भरोसे' छोड़ दिया गया है और इसके नेताओं पर अपने ही संगठन को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर आत्मसम्मान वाले लोग घुटन महसूस कर रहे हैं। राज्य नेतृत्व के वरिष्ठ पदाधिकारियों से उन्होंने 'अहंकार और भ्रम से प्रेरित राजनीति' छोड़ने का आग्रह किया, अन्यथा पार्टी की शेष राजनीतिक शक्ति भी खो जाने की चेतावनी दी।

संगठनात्मक कमज़ोरियों पर चिंता

सिंह ने वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यवहार, युवा कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन की कमी और महिला सशक्तिकरण के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण के अभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार ये मुद्दे ऐसे हैं जिन पर कांग्रेस उच्च कमान को तत्काल ध्यान देने की ज़रूरत है।

गौरतलब है कि राजस्थान कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों में संगठनात्मक कमज़ोरी और आपसी विवादों के कारण चुनावी मोर्चे पर कमज़ोर पड़ी है। सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक रूप से मुखर होना इस संकट को और गहरा करता है।

सिंह का अपना पक्ष

अपने व्यक्तिगत विश्वासों और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए सिंह ने कहा कि विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। उन्होंने कहा, 'मैं अपने सिद्धांतों और आदर्शों पर अडिग रहा हूं और मैं हमेशा अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहा हूं और खड़ा रहूंगा।'

उन्होंने स्वयं को एक अनुशासित पार्टी कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन हमेशा से 'एक खुली किताब' रहा है और उनके हृदय तथा घर के द्वार पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए 'चौबीसों घंटे' खुले रहेंगे।

आगे क्या होगा

नोटिस का जवाब न देने और फिर सार्वजनिक रूप से आक्रामक रुख अपनाने के बाद पार्टी के सामने अनुशासनात्मक कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद राजस्थान कांग्रेस के भीतर गहरे गुटीय संघर्ष का संकेत है जो आने वाले संगठनात्मक चुनावों में और उभर सकता है। सिंह के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वेंद्र सिंह को राजस्थान कांग्रेस ने कारण बताओ नोटिस क्यों दिया?
विश्वेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निशाना बनाते हुए पार्टी की विचारधारा से हटकर बयान दिए थे। पार्टी की अनुशासनात्मक समिति ने उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था, लेकिन समय सीमा बीत जाने पर भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया।
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा?
सिंह ने लिखा कि 'चापलूसी मेरे खून में नहीं है और न ही मैं कभी इसमें शामिल होऊंगा।' उन्होंने पार्टी को 'भगवान भरोसे' छोड़े जाने, प्रभावी नेतृत्व के अभाव और आत्मसम्मान वाले लोगों की 'घुटन' का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पदाधिकारियों से 'अहंकार और भ्रम से प्रेरित राजनीति' छोड़ने की अपील की।
राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी कितनी गंभीर है?
राजस्थान कांग्रेस में गुटीय संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है और हाल के विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह और गहरा हुआ है। सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं का बार-बार सार्वजनिक रूप से मुखर होना इस संकट की गहराई को दर्शाता है।
विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
नोटिस का जवाब न देने और फिर सार्वजनिक रूप से नेतृत्व पर हमला करने के बाद पार्टी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है और राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज़ हैं।
विश्वेंद्र सिंह कौन हैं?
विश्वेंद्र सिंह राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हैं। वे विधायक, सांसद और मंत्री रह चुके हैं और राजस्थान की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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