निकाय चुनाव में हार के बाद विश्वेंद्र सिंह का डोटासरा पर सीधा हमला, राजस्थान कांग्रेस में टूट उजागर
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान कांग्रेस में 30 सितंबर 2026 को शहरी निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अंदरूनी टकराव खुलकर सामने आ गया, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग में संगठन की कार्यशैली और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधा। विश्वेंद्र सिंह का यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और जवाबदेही की माँग को रेखांकित करता है।
सोशल मीडिया पर तीखा आरोप-पत्र
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर 'भरतपुर-डीग कांग्रेस की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?' शीर्षक से एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने भरतपुर और डीग के जिला अध्यक्षों के साथ-साथ डोटासरा को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उनका आरोप है कि दोनों जिला अध्यक्षों ने पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को टिकट दिलवाए। विश्वेंद्र सिंह के अनुसार, इस टिकट वितरण से जनता में नाराज़गी पैदा हुई जो चुनाव परिणामों में साफ दिखी।
डोटासरा पर संरक्षण देने का आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा ने दोनों जिला नेताओं को संरक्षण दिया और निकाय चुनाव में हार के बावजूद उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नतीजे खुद बता रहे हैं कि ज़मीनी नेतृत्व विफल रहा, तो जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हो रही है। डोटासरा की चुनावी हार पर आई प्रतिक्रिया को भी विश्वेंद्र सिंह ने अपर्याप्त बताया।
भरतपुर-डीग की राजनीतिक अहमियत
विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर और डीग क्षेत्र को कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से रणनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय नेतृत्व की कथित लापरवाही के कारण इस क्षेत्र में पार्टी की पकड़ कमज़ोर हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस संगठन को पुनर्गठित करने की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
सुधारात्मक कदमों की माँग
विश्वेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि जब तक विवादित जिला नेता अपने पदों पर बने रहेंगे, तब तक भरतपुर-डीग में संगठन को दोबारा खड़ा करना संभव नहीं होगा। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से निकाय चुनाव के नतीजों को सबक मानकर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की माँग की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान पार्टी के भीतर एक व्यापक असंतोष की अभिव्यक्ति है जो आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक बदलाव की माँग में तब्दील हो सकती है।
राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी का बड़ा संकट
विश्वेंद्र सिंह के इन बयानों ने राजस्थान कांग्रेस में टिकट वितरण, संगठन की जवाबदेही और गुटीय खींचतान के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक मंच पर नेतृत्व को चुनौती दी हो — लेकिन निकाय चुनाव के ठीक बाद इस तरह के खुले हमले पार्टी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया और संभावित संगठनात्मक फेरबदल से तय होगा कि यह विवाद और गहरा होता है या शांत होता है।