विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस नोटिस पर पलटवार: 'आप कार्रवाई के लिए स्वतंत्र, मैं अपने राजनीतिक भविष्य के लिए'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के बीच टकराव तेज़ हो गया है। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत पार्टी के अन्य नेताओं के विरुद्ध बयानबाज़ी को लेकर विश्वेंद्र सिंह को शुक्रवार शाम नोटिस जारी किया और सात दिन में जवाब माँगा। इस पर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है और वह खुद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
नोटिस में क्या हैं आरोप
कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना द्वारा जारी नोटिस में विश्वेंद्र सिंह पर आठ आरोप लगाए गए हैं। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और दो जिलाध्यक्षों के विरुद्ध सार्वजनिक बयान देना, हाल के शहरी निकाय चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका न निभाना और संगठनात्मक गतिविधियों के प्रति उदासीनता प्रमुख आरोप हैं।
यह नोटिस भरतपुर और डीग जिला कांग्रेस अध्यक्षों की शिकायतों के आधार पर जारी किया गया है। गौरतलब है कि इन दोनों जिलों में विश्वेंद्र सिंह का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है।
विश्वेंद्र सिंह की तीखी प्रतिक्रिया
सिंह ने नोटिस मिलते ही उसे सोशल मीडिया पर साझा कर अनुशासन समिति अध्यक्ष उदयलाल आंजना को सार्वजनिक जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'राजस्थान कांग्रेस कमेटी का हाल... आदरणीय आंजना जी, पहले मैं आपके नोटिस का जवाब दूं या मेरे बारे में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा जी ने जो बयान दिया है, उस पर अपनी प्रतिक्रिया दूं?'
सिंह ने आगे कहा, 'डोटासरा मुझे बड़े भाई के रूप में देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ आपका व्यवहार सामने है। मेरे कार्यकर्ता और मैं असमंजस की स्थिति में हैं। आप अपनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं और मैं अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हूँ।' उन्होंने यह भी कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें किसी की सलाह की ज़रूरत नहीं है।
कांग्रेस छोड़ने के संकेत
इस विवाद से पहले भी शुक्रवार को सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए कांग्रेस से अलग होने के स्पष्ट संकेत दिए थे। उन्होंने लिखा था कि उनका सार्वजनिक जीवन खुली किताब है और उस पर कोई दाग नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैंने कभी अपने सम्मान पर दाग नहीं लगने दिया और न कभी लगने दूँगा। ऐसी स्थिति में घुट-घुटकर मरने से आत्मसम्मान की मौत मरना बेहतर है।'
सिंह ने एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस छोड़ने की बात भी कही। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार शुक्रवार दोपहर तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि पार्टी को उनका कोई औपचारिक इस्तीफा मिला है या नहीं।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्त्व
विश्वेंद्र सिंह राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भरतपुर क्षेत्र के प्रभावशाली चेहरे रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राजस्थान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) विपक्ष में है और पार्टी अपनी आंतरिक एकजुटता को पुनर्स्थापित करने में जुटी है।
सिंह ने कहा कि उनके पूर्वजों ने कभी सम्मान के मामले में समझौता नहीं किया और वह उन्हीं के रास्ते पर चलते हुए विदाई लेना बेहतर समझते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अब डोटासरा की नीतियों और कार्यप्रणाली के साथ नहीं चल सकते।
आगे क्या होगा
अनुशासन समिति ने सात दिन के भीतर जवाब माँगा है, और अब यह देखना होगा कि सिंह औपचारिक जवाब देते हैं या पार्टी छोड़ने के अपने संकेत को अंजाम देते हैं। राजस्थान कांग्रेस में यह नया घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।