2 अक्टूबर 2026
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राजस्थान कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने छोड़ी पार्टी, बोले- 'गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं'

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राजस्थान कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने छोड़ी पार्टी, बोले- 'गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं'

सारांश

राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर को कांग्रेस छोड़ दी — भरतपुर-डीग निकाय चुनाव विवाद के बाद पार्टी की नाराज़गी और संभावित निष्कासन की अटकलों के बीच। उनका यह कदम राजस्थान कांग्रेस के भीतर गहराते असंतोष को उजागर करता है।

मुख्य बातें

राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस से इस्तीफा दिया।
उन्होंने फेसबुक पोस्ट के ज़रिए पार्टी नेतृत्व और 'गलत रीति-नीति' पर नाराज़गी जताई।
भरतपुर-डीग निकाय चुनाव परिणामों के बाद संगठन पर उठाए सवालों से यह विवाद शुरू हुआ था।
कांग्रेस की ओर से उनके खिलाफ रिपोर्ट माँगे जाने और निष्कासन की अटकलों के बीच उन्होंने खुद पार्टी छोड़ी।
भविष्य की राजनीतिक दिशा — नई पार्टी या निर्दलीय — अभी स्पष्ट नहीं है।

राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर 2026 को पार्टी से नाता तोड़ लिया। उन्होंने फेसबुक पर एक भावनात्मक पोस्ट के ज़रिए पार्टी नेतृत्व को अलविदा कहा और मौजूदा कार्यप्रणाली पर तीखी नाराज़गी जताई। भरतपुर से ताल्लुक रखने वाले इस वरिष्ठ नेता का यह कदम राजस्थान कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

विश्वेंद्र सिंह ने क्या कहा

अपनी फेसबुक पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष को सीधे संबोधित करते हुए लिखा, 'अध्यक्ष महोदय, मैंने जीवन में हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही फैसला लिया है। आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं, उससे मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। मेरा भी अंतरमन दुखी और व्यथित है।'

उन्होंने आगे लिखा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर किया, उसी पार्टी ने उनकी निष्ठा और ईमानदारी का यह 'सिला' दिया — यह जानकर वे 'अंदर से बहुत हिल गए' हैं। उन्होंने पार्टी में चापलूसी की परंपरा को अपने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी का कारण बताया।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भरतपुर-डीग में निकाय चुनाव परिणामों के बाद विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस के संगठन और प्रदेश नेतृत्व पर खुलकर सवाल उठाए थे। उस विवाद के बाद प्रदेश कांग्रेस स्तर पर उनके खिलाफ रिपोर्ट माँगे जाने की बात सामने आई थी।

गौरतलब है कि सिंह को पार्टी से निष्कासित किए जाने की अटकलें भी चल रही थीं। इसी दबाव के बीच उन्होंने स्वयं पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी, जिसे राजनीतिक हलकों में 'पहले मैं छोड़ता हूँ' की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सार्वजनिक जीवन और स्वाभिमान का आह्वान

विश्वेंद्र सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनका सार्वजनिक जीवन 'जनता जनार्दन की देन' है और उनका खून का हर कतरा अपने कार्यकर्ताओं, मतदाताओं और क्षेत्रवासियों के लिए बहा है। उन्होंने लिखा, 'दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है।' अपने पुरखों की विरासत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने कभी ऐसी चीज़ों से समझौता नहीं किया और वे भी नहीं करेंगे।

राजस्थान कांग्रेस पर असर

विश्वेंद्र सिंह भरतपुर क्षेत्र में कांग्रेस के प्रभावशाली चेहरों में से एक रहे हैं। उनके जाने से पार्टी को क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक नुकसान हो सकता है। यह राजस्थान कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष की एक और कड़ी है — इससे पहले भी प्रदेश में कई वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व से असहमति जताई है।

आगे क्या होगा

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि विश्वेंद्र सिंह किसी अन्य दल में शामिल होंगे या निर्दलीय रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भरतपुर क्षेत्र में उनकी पकड़ को देखते हुए कई दल उनसे संपर्क कर सकते हैं। राजस्थान कांग्रेस की ओर से इस इस्तीफे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजस्थान कांग्रेस की उस संरचनागत कमज़ोरी का लक्षण है जो 2023 के चुनावी हार के बाद से और गहरी हुई है। पार्टी जब विपक्ष में होती है तब अनुशासन थोपना कठिन हो जाता है — और भरतपुर जैसे क्षेत्रीय गढ़ों में स्थानीय नेता केंद्रीय नेतृत्व की बजाय अपनी ज़मीनी पकड़ को प्राथमिकता देते हैं। उल्लेखनीय यह है कि सिंह ने निष्कासन का इंतज़ार नहीं किया — पहले मैदान छोड़ने की यह रणनीति राजनीतिक पुनर्स्थापन के द्वार खुले रखती है। राजस्थान कांग्रेस के लिए असली सवाल यह है कि क्या नेतृत्व इस असंतोष को संगठनात्मक सुधार से संबोधित करेगा, या यह सिलसिला और नाम जोड़ता रहेगा।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस क्यों छोड़ी?
विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी नेतृत्व की 'गलत रीति-नीति' और 'चापलूसी की परंपरा' से असहमति जताते हुए 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस छोड़ी। भरतपुर-डीग निकाय चुनाव परिणामों के बाद संगठन पर सवाल उठाने के कारण उनके खिलाफ पार्टी स्तर पर रिपोर्ट माँगे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
विश्वेंद्र सिंह कौन हैं?
विश्वेंद्र सिंह राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भरतपुर क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं। वे भरतपुर-डीग इलाके में पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते थे।
विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे की घोषणा कैसे हुई?
उन्होंने फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए कांग्रेस अध्यक्ष को सीधे संबोधित करते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा की। पोस्ट में उन्होंने अपनी निष्ठा, स्वाभिमान और पुरखों की विरासत का हवाला दिया।
इस घटनाक्रम का राजस्थान कांग्रेस पर क्या असर होगा?
भरतपुर क्षेत्र में सिंह की मज़बूत जनाधार वाली उपस्थिति को देखते हुए पार्टी को संगठनात्मक और चुनावी नुकसान हो सकता है। यह राजस्थान कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष की एक और कड़ी है।
विश्वेंद्र सिंह अब किस पार्टी में जाएँगे?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे किसी अन्य दल में शामिल होंगे या निर्दलीय रहेंगे। उनकी भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर अटकलें जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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