22 अगस्त 2026
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राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग: पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर 'बिना अनुमति' धरने का मामला

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राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग: पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर 'बिना अनुमति' धरने का मामला

सारांश

वकील संकेत गुप्ता ने राहुल गांधी के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर 'बिना अनुमति' धरने को लेकर एफआईआर की माँग की। उसी शाम पुलिस ने पैलेट-गन पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया — राजनीतिक विरोध और कानूनी सीमाओं की टकराहट का ताज़ा मामला।

मुख्य बातें

वकील संकेत गुप्ता ने 21 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कर राहुल गांधी व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर की माँग की।
आरोप: पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के डीसीपी कार्यालय के बाहर बिना अनुमति धरना।
शिकायत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189 के तहत दर्ज कराई गई।
राहुल गांधी का धरना उस छात्र की शिकायत पर एफआईआर न दर्ज करने के कथित विरोध में था, जिसे जंतर-मंतर पर पैलेट-गन से चोटें आई थीं।
उसी शाम दिल्ली पुलिस ने पैलेट-गन पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

नई दिल्ली में 21 अगस्त 2026 को वकील संकेत गुप्ता ने दिल्ली पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189 के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की गई। आरोप है कि इन लोगों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन स्थित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) के कार्यालय के बाहर बिना किसी पूर्व अनुमति के धरना दिया।

धरने की पृष्ठभूमि

कांग्रेस नेता राहुल गांधी उस छात्र की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से पुलिस के कथित इनकार के विरोध में यह धरना दे रहे थे। कांग्रेस का दावा है कि उक्त छात्र को पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारों की माँग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट-गन से चोटें आई थीं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र आंदोलनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।

शिकायतकर्ता वकील का पक्ष

वकील संकेत गुप्ता ने बताया, 'आज मैं अपनी एक पुरानी शिकायत के सिलसिले में दिल्ली पुलिस के नई दिल्ली जिला कार्यालय गया था। मुझे वहाँ कुछ जरूरी काम था, लेकिन मैं उसे पूरा नहीं कर सका। मेरे क्लाइंट भी मेरे साथ थे, लेकिन वे भी पुलिस अधिकारी से नहीं मिल सके। वजह यह थी कि वहाँ धरना-प्रदर्शन चल रहा था, राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता काफी शोर-शराबा कर रहे थे, और पूरा माहौल बहुत अशांत हो गया था।'

उन्होंने आगे कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन करना है, तो उसे धरना-प्रदर्शन कानून के नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। गुप्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय भी कहता है कि विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है, लेकिन नियमों और कानूनों का पालन करना होगा। कोई भी अपने आंदोलन से पुलिस स्टेशन के आने-जाने का रास्ता नहीं रोक सकता। राहुल गांधी ने गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जुटाई थी।'

कानूनी आधार और माँग

गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली का यह इलाका संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहाँ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत पाँच से अधिक लोगों का जमावड़ा प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि डीसीपी कार्यालय का प्रवेश द्वार अवरुद्ध करना, जहाँ कोई आपातकालीन शिकायत आ सकती है, पूर्णतः अनुचित है। उन्होंने सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग दोहराई।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

गौरतलब है कि उसी शाम दिल्ली पुलिस ने कथित रूप से पैलेट-गन से घायल हुए व्यक्ति की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इस कदम को कांग्रेस के धरने का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है, हालाँकि पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।

आगे क्या

संकेत गुप्ता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है। यह मामला राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की सीमाओं और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर एक व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस बड़े राजनीतिक संघर्ष का प्रतिबिंब है जिसमें विपक्ष सड़क पर उतरकर दबाव बनाता है और सत्ता पक्ष कानूनी रास्ते से पलटवार करता है। उल्लेखनीय यह है कि जिस एफआईआर के लिए राहुल गांधी का धरना था, वह उसी शाम दर्ज हो गई — जो दर्शाता है कि राजनीतिक दबाव कभी-कभी काम करता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या विपक्ष का हर विरोध प्रदर्शन कानूनी पचड़े में उलझाया जाएगा, जो लोकतांत्रिक असहमति की गुंजाइश को सीमित कर सकता है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की माँग क्यों की गई?
वकील संकेत गुप्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 21 अगस्त 2026 को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के डीसीपी कार्यालय के बाहर बिना अनुमति धरना दिया, जिससे पुलिस कार्यालय का प्रवेश मार्ग अवरुद्ध हो गया। इसे सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन बताते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 189 के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की गई।
राहुल गांधी ने यह धरना क्यों दिया था?
कांग्रेस के अनुसार, जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारों की माँग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में एक छात्र को कथित तौर पर पैलेट-गन से चोटें आई थीं। राहुल गांधी उस छात्र की शिकायत पर एफआईआर दर्ज न करने के पुलिस के कथित इनकार के विरोध में धरने पर बैठे थे।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
धरने वाले दिन की शाम को दिल्ली पुलिस ने पैलेट-गन से कथित रूप से घायल हुए व्यक्ति की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। संकेत गुप्ता की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई अभी प्रतीक्षित है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 189 क्या कहती है?
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189 गैरकानूनी जमावड़े और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने से संबंधित है। शिकायतकर्ता वकील का कहना है कि नई दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्र में पाँच से अधिक लोगों का बिना अनुमति जमावड़ा इस धारा के तहत दंडनीय है।
क्या इस तरह के विरोध प्रदर्शन पर सर्वोच्च न्यायालय का कोई निर्देश है?
शिकायतकर्ता वकील संकेत गुप्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला दिया, जिसके अनुसार विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन उसे कानून और नियमों के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। कोई भी व्यक्ति अपने प्रदर्शन से पुलिस स्टेशन जैसे आवश्यक सार्वजनिक संस्थानों का रास्ता नहीं रोक सकता।
राष्ट्र प्रेस
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