साहिल पैलेट गन मामला: दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ FIR शुरू की, राहुल गांधी 5 घंटे से संसद मार्ग थाने में
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 21 अगस्त को नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में करीब 5 घंटे से डटे रहे, जब तक कि दिल्ली पुलिस ने साहिल लोचव के पैलेट गन चोट मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी शुरू नहीं कर दी। यह मामला कथित तौर पर जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस में हुए आंदोलन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ा है।
मामले का घटनाक्रम
आरोप है कि 20 जुलाई को कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिसमें साहिल लोचव घायल हो गए। राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे लगे हैं और उनकी आँख में तीन छर्रे हैं। उन्होंने कहा कि एम्स की रिपोर्ट में भी शरीर में बड़ी संख्या में छर्रे होने का उल्लेख है।
राहुल गांधी ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह पहले एक अन्य पुलिस स्टेशन गए थे, जहाँ से उन्हें संसद मार्ग थाने में जाने को कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत पर कार्रवाई करने की जगह पीड़ित पक्ष को लगातार एक थाने से दूसरे थाने भेजा जा रहा है।
पुलिस का रुख
दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि प्राप्त शिकायत की जाँच की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप इस मामले में नया केस दर्ज किया जा सकता है या नहीं। बाद में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखनी शुरू कर दी। पुलिस स्टेशन के बाहर कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
कांग्रेस की माँग और पार्टी का रुख
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि साहिल के वकील की माँग है कि मामले में विशेष एफआईआर दर्ज की जाए — यह कोई सामान्य एफआईआर नहीं, बल्कि पुलिस की कथित गैरकानूनी कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी विशेष एफआईआर है।
रमेश ने कहा कि बातचीत जारी है और संभव है कि गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और गृह मंत्री से भी संपर्क किया गया होगा, लेकिन कांग्रेस को अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। राहुल गांधी का रुख स्पष्ट था — जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, वे थाने से नहीं जाएंगे।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि पैलेट गन का इस्तेमाल आम तौर पर भीड़ नियंत्रण के लिए किया जाता है, लेकिन इसके घातक दुष्प्रभावों को लेकर मानवाधिकार संगठन पहले भी सवाल उठा चुके हैं।
आगे क्या होगा
एफआईआर दर्ज होने के बाद जाँच की दिशा और अभियुक्तों की पहचान अगला अहम कदम होगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के संदर्भ में यह मामला न्यायिक निगरानी में भी आ सकता है। साहिल लोचव के परिवार और उनके वकील आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं।