जंतर-मंतर प्रदर्शन: साहिल लोचब की एफआईआर में दावा — शरीर में 200+ छर्रे, दाहिनी आंख की रोशनी गई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 21 अगस्त को जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में घायल हुए साहिल लोचब की शिकायत पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। यह कार्रवाई लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठने के बाद हुई। एफआईआर दर्ज होने पर साहिल ने राहुल गांधी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले एक महीने से उनकी टीम लगातार संपर्क में थी और राहुल गांधी स्वयं उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे।
एफआईआर में क्या कहा साहिल ने
शिकायत के अनुसार, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले जा रहे छात्र मार्च के दौरान साहिल पर कथित तौर पर धातु के पैलेट दागे गए। उनका आरोप है कि इससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई और शरीर के कई हिस्सों में छर्रे घुस गए। 20 वर्षीय साहिल दिल्ली के नजफगढ़ स्थित अग्रवाल कॉलोनी के निवासी हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के छात्र हैं।
शिकायत में साहिल ने यह भी उल्लेख किया है कि उनके पिता दिव्यांग हैं और वह परिवार के सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ।
घटनाक्रम: 20 जुलाई की उस शाम
एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई को छात्र परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा 2025 और नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। संसद की ओर मार्च के दौरान साहिल पालिका, कनॉट प्लेस क्षेत्र तक पहुंच गए थे और उनके हाथ में तिरंगा झंडा था।
शिकायत के अनुसार, लाठीचार्ज और आंसू गैस के बीच साहिल का चेहरा दूसरी दिशा में था, तभी उन्हें दाहिनी छाती, बाजू और आंख पर तेज धमाके जैसा महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पीछे मुड़ने पर उन्होंने नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति को बड़ी बंदूक के साथ देखा, जिसने उन पर धातु के पैलेट चलाए। साहिल के अनुसार, उन पर पांच से छह बार पैलेट दागे गए, जिसके बाद आंख, चेहरा, हाथ और छाती से खून बहने लगा और दाहिनी आंख से दिखाई देना बंद हो गया।
चिकित्सा स्थिति और अस्पताल में इलाज
घायल होने के बाद साहिल को पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां पहली एमएलसी बनाई गई। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल और फिर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रेफर किया गया। 21 जुलाई की रात उन्हें एम्स आरपीसी आई सेंटर भेजा गया और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया।
22 जुलाई की रात आंख का पहला ऑपरेशन हुआ। 25 जुलाई को दोबारा जांच में दाहिनी आंख में कोई दृष्टि नहीं पाई गई। 1 अगस्त को दूसरी सर्जरी की गई, लेकिन आंख की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शिकायत में दावा किया गया है कि डॉक्टरों ने एमएलसी में स्पष्ट लिखा है कि चोट पैलेट से लगी है और दृष्टि लौटने की संभावना एक प्रतिशत से भी कम है।
एम्स में हुए सीटी स्कैन में साहिल के शरीर में 200 से अधिक धातु के छर्रे पाए गए — आंख, गर्दन, छाती में दिल के पास, जबड़े और बाजू सहित कई हिस्सों में। शिकायत के अनुसार, कुछ छर्रे आंख की नस के पास हैं जिन्हें निकाला नहीं जा सकता और दो छर्रे जीवनभर आंख के अंदर रहेंगे।
साहिल का दर्द: नौकरी, पढ़ाई और परिवार
साहिल ने शिकायत में कहा है कि वह एक छात्र के तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बदले उन्हें अपनी आंख गंवानी पड़ी। उन्होंने यह भी लिखा कि जिस दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे, अब वह नौकरी भी नहीं मिल सकेगी और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है। आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि परिवार के लिए लंबा इलाज कराना मुश्किल है।
साहिल की मांगें और आगे की जांच
शिकायत में साहिल ने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, पटेल चौक, राजीव चौक, मेट्रो स्टेशन, ट्रैफिक पुलिस और ड्रोन के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए जाएं। साथ ही ऑपरेशन के दौरान शरीर से निकाले गए धातु के छर्रों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए और लेडी हार्डिंग अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, एम्स आरपीसी आई सेंटर तथा एम्स ट्रॉमा सेंटर से एमएलसी और इलाज के सभी रिकॉर्ड मंगाए जाएं। उन्होंने इलाज और मुआवजे पर विचार करने की भी मांग की है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है। एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है — आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।