21 अगस्त 2026
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जंतर-मंतर प्रदर्शन: साहिल लोचब की एफआईआर में दावा — शरीर में 200+ छर्रे, दाहिनी आंख की रोशनी गई

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जंतर-मंतर प्रदर्शन: साहिल लोचब की एफआईआर में दावा — शरीर में 200+ छर्रे, दाहिनी आंख की रोशनी गई

सारांश

शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल एक छात्र की आंख गई, शरीर में 200 से अधिक धातु छर्रे — और एफआईआर दर्ज हुई तब, जब विपक्ष के नेता ने आठ घंटे धरना दिया। साहिल लोचब का मामला छात्र आंदोलन और राज्य बल-प्रयोग के बीच की उस बारीक रेखा को उजागर करता है जिस पर अभी जांच होनी बाकी है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 21 अगस्त को छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
एफआईआर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब आठ घंटे धरने के बाद दर्ज हुई।
साहिल का दावा है कि 20 जुलाई के छात्र मार्च में उन पर पैलेट दागे गए, जिससे दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई।
एम्स के सीटी स्कैन में शरीर में 200 से अधिक धातु छर्रे पाए गए; दृष्टि लौटने की संभावना 1% से भी कम बताई गई।
दो छर्रे आंख के अंदर जीवनभर रहेंगे; कुछ आंख की नस के पास होने से निकाले नहीं जा सकते।
साहिल ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने, फोरेंसिक जांच और इलाज-मुआवजे की मांग की है।

दिल्ली पुलिस ने 21 अगस्त को जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में घायल हुए साहिल लोचब की शिकायत पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। यह कार्रवाई लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठने के बाद हुई। एफआईआर दर्ज होने पर साहिल ने राहुल गांधी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले एक महीने से उनकी टीम लगातार संपर्क में थी और राहुल गांधी स्वयं उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे।

एफआईआर में क्या कहा साहिल ने

शिकायत के अनुसार, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले जा रहे छात्र मार्च के दौरान साहिल पर कथित तौर पर धातु के पैलेट दागे गए। उनका आरोप है कि इससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई और शरीर के कई हिस्सों में छर्रे घुस गए। 20 वर्षीय साहिल दिल्ली के नजफगढ़ स्थित अग्रवाल कॉलोनी के निवासी हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के छात्र हैं।

शिकायत में साहिल ने यह भी उल्लेख किया है कि उनके पिता दिव्यांग हैं और वह परिवार के सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ।

घटनाक्रम: 20 जुलाई की उस शाम

एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई को छात्र परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा 2025 और नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। संसद की ओर मार्च के दौरान साहिल पालिका, कनॉट प्लेस क्षेत्र तक पहुंच गए थे और उनके हाथ में तिरंगा झंडा था।

शिकायत के अनुसार, लाठीचार्ज और आंसू गैस के बीच साहिल का चेहरा दूसरी दिशा में था, तभी उन्हें दाहिनी छाती, बाजू और आंख पर तेज धमाके जैसा महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पीछे मुड़ने पर उन्होंने नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति को बड़ी बंदूक के साथ देखा, जिसने उन पर धातु के पैलेट चलाए। साहिल के अनुसार, उन पर पांच से छह बार पैलेट दागे गए, जिसके बाद आंख, चेहरा, हाथ और छाती से खून बहने लगा और दाहिनी आंख से दिखाई देना बंद हो गया।

चिकित्सा स्थिति और अस्पताल में इलाज

घायल होने के बाद साहिल को पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां पहली एमएलसी बनाई गई। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल और फिर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रेफर किया गया। 21 जुलाई की रात उन्हें एम्स आरपीसी आई सेंटर भेजा गया और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया।

22 जुलाई की रात आंख का पहला ऑपरेशन हुआ। 25 जुलाई को दोबारा जांच में दाहिनी आंख में कोई दृष्टि नहीं पाई गई। 1 अगस्त को दूसरी सर्जरी की गई, लेकिन आंख की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शिकायत में दावा किया गया है कि डॉक्टरों ने एमएलसी में स्पष्ट लिखा है कि चोट पैलेट से लगी है और दृष्टि लौटने की संभावना एक प्रतिशत से भी कम है।

एम्स में हुए सीटी स्कैन में साहिल के शरीर में 200 से अधिक धातु के छर्रे पाए गए — आंख, गर्दन, छाती में दिल के पास, जबड़े और बाजू सहित कई हिस्सों में। शिकायत के अनुसार, कुछ छर्रे आंख की नस के पास हैं जिन्हें निकाला नहीं जा सकता और दो छर्रे जीवनभर आंख के अंदर रहेंगे।

साहिल का दर्द: नौकरी, पढ़ाई और परिवार

साहिल ने शिकायत में कहा है कि वह एक छात्र के तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बदले उन्हें अपनी आंख गंवानी पड़ी। उन्होंने यह भी लिखा कि जिस दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे, अब वह नौकरी भी नहीं मिल सकेगी और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है। आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि परिवार के लिए लंबा इलाज कराना मुश्किल है।

साहिल की मांगें और आगे की जांच

शिकायत में साहिल ने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, पटेल चौक, राजीव चौक, मेट्रो स्टेशन, ट्रैफिक पुलिस और ड्रोन के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए जाएं। साथ ही ऑपरेशन के दौरान शरीर से निकाले गए धातु के छर्रों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए और लेडी हार्डिंग अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, एम्स आरपीसी आई सेंटर तथा एम्स ट्रॉमा सेंटर से एमएलसी और इलाज के सभी रिकॉर्ड मंगाए जाएं। उन्होंने इलाज और मुआवजे पर विचार करने की भी मांग की है।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है। एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है — आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छात्र आंदोलन के दौरान ऐसे आरोप गंभीर जवाबदेही की मांग करते हैं। एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है, अंत नहीं — असली परीक्षा यह है कि सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रहे, फोरेंसिक जांच निष्पक्ष हो और दोषी — चाहे जो भी हो — की पहचान हो। विपक्ष के आठ घंटे के धरने के बाद दर्ज हुई एफआईआर यह भी बताती है कि संस्थागत दबाव के बिना न्याय की राह कितनी कठिन हो सकती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल लोचब कौन हैं और उनके साथ क्या हुआ?
साहिल लोचब दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के 20 वर्षीय छात्र हैं, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले जा रहे छात्र मार्च में शामिल थे। उनकी एफआईआर के अनुसार, इस दौरान उन पर धातु के पैलेट दागे गए, जिससे दाहिनी आंख की रोशनी चली गई और शरीर में 200 से अधिक छर्रे घुस गए।
एफआईआर दर्ज होने में इतनी देरी क्यों हुई?
घटना 20 जुलाई को हुई थी, लेकिन एफआईआर 21 अगस्त को दर्ज हुई — करीब एक महीने बाद। यह कार्रवाई नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर आठ घंटे के धरने के बाद हुई, जो दर्शाता है कि राजनीतिक दबाव के बिना शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही थी।
साहिल की चिकित्सा स्थिति कितनी गंभीर है?
एम्स के सीटी स्कैन में शरीर में 200 से अधिक धातु छर्रे पाए गए हैं। डॉक्टरों ने एमएलसी में लिखा है कि दाहिनी आंख की दृष्टि लौटने की संभावना 1% से भी कम है। दो सर्जरी हो चुकी हैं, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ और दो छर्रे जीवनभर आंख के अंदर रहेंगे।
साहिल ने दिल्ली पुलिस से क्या मांगें की हैं?
साहिल ने मांग की है कि 20 जुलाई की घटना के सीसीटीवी फुटेज — जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, राजीव चौक, ड्रोन फुटेज सहित — सुरक्षित किए जाएं। इसके अलावा ऑपरेशन में निकाले गए छर्रों की फोरेंसिक जांच, सभी अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज व मुआवजे पर विचार करने की मांग की गई है।
20 जुलाई का छात्र प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
यह प्रदर्शन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा 2025 और नीट पेपर लीक के विरोध में था। छात्र जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे थे, जिसके दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
राष्ट्र प्रेस
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