क्या पुंछ जिले के जलास और सलोत्री के ग्रामीणों में बंकरों की मांग से खुशी की लहर है?

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क्या पुंछ जिले के जलास और सलोत्री के ग्रामीणों में बंकरों की मांग से खुशी की लहर है?

सारांश

पुंछ जिले के जलास और सलोत्री गांवों में बंकरों की मांग के बाद ग्रामीणों में खुशी की नई लहर दौड़ गई है। गृह मंत्रालय द्वारा बंकरों की संख्या की जानकारी मांगे जाने से स्थानीय लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जानिए इस फैसले के पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • बंकरों की आवश्यकता ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • गृह मंत्रालय का निर्णय स्थानीय समुदाय के लिए राहत का एक स्रोत है।
  • जलास और सलोत्री के निवासी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

जम्मू, 22 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के सभी जिला विकास उपायुक्तों से बंकरों की संख्या और उनकी आवश्यकता की जानकारी मांगी है। ग्रामीणों को इन बंकरों की आवश्यकता तब महसूस होती है, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी होती है।

गृह मंत्रालय द्वारा बंकरों की आवश्यकता के संबंध में जानकारी मांगने पर पुंछ जिले के भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव जलास और सलोत्री के निवासियों में ख़ुशी का अनुभव हो रहा है।

इन गांवों के लोग गृह मंत्रालय के इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं और यह भी मांग कर रहे हैं कि जिले में जल्द से जल्द बंकरों का निर्माण कार्य शुरू किया जाए और अधिकतम बंकरों का निर्माण किया जाए।

जलास के निवासी हाजी अली अकबर ने कहा कि यह हमारी बहुत पुरानी मांग थी। हमारा क्षेत्र सीमा के निकट है, जिससे हमें हमेशा खतरा रहता है। यदि हमें बंकर मिलते हैं, तो हम सुरक्षित रहेंगे और कठिन परिस्थितियों में खुद को बचा सकेंगे।

जलास के सतिंदर कुमार शर्मा ने कहा कि गृह मंत्रालय ने जिला प्रशासन से बंकरों की आवश्यकता की जानकारी मांगी है, जिससे हम सभी में ख़ुशी है। अगर पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाया जाता है, तो हम इन बंकरों में सुरक्षित रहेंगे। मैं अपने गांव, पंचायत और सभी लोगों की ओर से गृह मंत्री को धन्यवाद देता हूँ।

गांव जलास के केतन बाली ने कहा कि गृह मंत्रालय ने हमारी वर्षों पुरानी बंकरों की मांग पर ध्यान दिया है और इसके लिए जिला प्रशासन से जानकारी मांगी है। जिला प्रशासन बंकरों से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि जल्द से जल्द बंकरों का निर्माण किया जाए और हमें सौंपा जाए। भारतीय सेना सीमा पर तैनात है, और गोलीबारी के समय हमें अपने घर छोड़कर भागना पड़ता है। यदि बंकर हमारे पास होंगे, तो हमें घर छोड़कर भागने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

Point of View

तो स्थानीय लोग अपने अधिकारों और जरूरतों के प्रति सचेत रहते हैं। गृह मंत्रालय का यह कदम निश्चित रूप से इन्हें सुरक्षा की भावना प्रदान करेगा। यह समय की मांग है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक सुविधाएं दी जाएं।
NationPress
11/02/2026

Frequently Asked Questions

बंकरों का निर्माण कब शुरू होगा?
अभी तक कोई निश्चित तिथि नहीं बताई गई है, लेकिन ग्रामीणों की मांग को ध्यान में रखते हुए जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
क्या बंकर केवल सीमावर्ती गांवों के लिए बनाए जाएंगे?
हां, बंकरों का निर्माण मुख्य रूप से ऐसे गांवों में किया जाएगा, जो सीमा के निकट हैं और जहाँ सुरक्षा की आवश्यकता अधिक है।
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