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क्या भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच का विरोध करना सही है?

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क्या भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच का विरोध करना सही है?

सारांश

जमीयत हिमायतुल इस्लाम के कारी अबरार जमाल ने भारत-पाकिस्तान के एशिया कप मैच का विरोध करते हुए पाकिस्तानी आतंकवाद की याद दिलाई। इस विवादास्पद विषय पर उनकी बातें विचारणीय हैं। जानिए उन्होंने क्या कहा और इस पर समाज में क्या प्रतिक्रिया हो सकती है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान का दोहरा चरित्र भारतीय सेना की कार्रवाई समाजवादी पार्टी की राजनीति मस्जिद का राजनीतिक इस्तेमाल जमाल का स्पष्ट विरोध

सहारनपुर, 28 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी अबरार जमाल ने भारत-पाकिस्‍तान के बीच होने वाले एशिया कप मैच का विरोध किया है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि पाकिस्‍तान का दोहरा चरित्र रहा है। उस देश पर किसी भी सूरत में विश्‍वास नहीं किया जा सकता है। मैं भारत-पाकिस्‍तान के बीच होने वाले एशिया कप मैच का पुरजोर विरोध करता हूं। पाकिस्‍तान ने पहलगाम में आतंकियों को भेजकर भारतीयों की हत्या की। इस घटना के बाद यह मैच बिल्‍कुल भी उचित नहीं है। भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान पर कार्रवाई करते हुए उसे घुटनों के बल गिराया है। इससे बड़ा मैच क्‍या हो सकता है।

कांग्रेस के जबरन धर्मांतरण के आरोप में जेल में बंद शब्बीर अहमद के बचाव पर जमाल ने कहा कि कांग्रेस ने अजमल कसाब जैसे लोगों को जेल के अंदर खाना खिलाया। लेकिन, देश की महान शख्सियत एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर कांग्रेसी एक पोस्‍ट तक नहीं करते और कसाब की विचारधारा के साथ कसीदे पढ़ते हैं। कलाम की विचारधारा से कांग्रेसियों को नफरत है। यह कांग्रेस की पुरानी मानसिकता है। कांग्रेस की हमेशा से ही सोच जिन्ना वाली रही है।

उन्होंने समाजवादी पार्टी पर कहा कि सपा हमेशा से ही मुसलमानों को सीढ़ी बनाकर मंजिल पर पहुंची है। इसके बदले में मुसलमानों को सिर्फ इफ्तार पार्टी मिली है। जहां तक मस्जिद का सवाल है, रामपुर के सांसद नदवी साहब की न तो पर्सनल बैठक है, न ही समाजवादी पार्टी का दफ्तर है। ये सरासर गलत है। मस्जिद का इस तरह से गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। सपा को माफी मांगनी चाहिए और नदवी को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। नदवी जैसी मानसिकता रखने वाले लोग देश में समाजवादी पार्टी को प्रमोट कर मुसलमानों के साथ तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। अगर मस्जिद में जाना डिंपल यादव को जरूरी था तो पर्दे के साथ मस्जिद के अंदर जाना चाहिए था। मस्जिद नमाज पढ़ने की जगह है, वहां पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें हमेशा देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। कारी अबरार जमाल का यह विरोध एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसमें पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ भारत की संकल्पबद्धता और सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता को समझना आवश्यक है। हमें इस विषय पर तटस्थता से विचार करना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत-पाकिस्तान का मैच खेलना चाहिए?
इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोण हैं। कुछ लोग इसे खेल की भावना से जोड़ते हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखते हैं।
कारी अबरार जमाल ने क्यों विरोध किया?
उन्होंने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और आतंकवाद के प्रति उसके रवैये के कारण विरोध किया।
राष्ट्र प्रेस
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