24 मई को दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम, देशभर की जनजातियाँ दिखाएंगी अपनी विरासत
सारांश
मुख्य बातें
जनजाति सुरक्षा मंच और जनजाति जागृति समिति के संयुक्त तत्वाधान में जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन 24 मई 2025 को नई दिल्ली में किया जाएगा, जिसमें देशभर के विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोग स्वयं के खर्चे पर भाग लेने पहुँचेंगे। यह आयोजन जनजातीय संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने के व्यापक जागरूकता अभियान का हिस्सा है।
समागम का उद्देश्य और स्वरूप
आयोजन समिति के प्रतिनिधि नरेंद्र भाटिया ने बताया कि इस समागम में किसी भी संगठन की ओर से कोई आर्थिक सहयोग नहीं लिया जा रहा — सभी प्रतिभागी अपने खर्चे पर आ रहे हैं। कार्यक्रम में एक शोभायात्रा का भी आयोजन होगा, जिसमें विभिन्न जनजातियों की वेशभूषा, लोक नृत्य, गीत और पूजा-पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। दिल्ली में निवासरत जनजातीय समुदाय के लोग भी इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
युवा पीढ़ी और सांस्कृतिक जागरूकता
भाटिया ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य वर्तमान पीढ़ी को उनकी संस्कृति, सभ्यता, लोक नृत्य-गीत और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है। उनके अनुसार, युवा पीढ़ी जब अपने इतिहास और समृद्ध विरासत से परिचित होगी, तो दूरस्थ क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर अंकुश लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा, 'छोटे-छोटे प्रलोभन में न आएं और पलायन से बचे रहें' — यही संकल्प लेकर लोग अपने घर लौटेंगे।
विविधता में एकता का प्रत्यक्ष अनुभव
भाटिया ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि कुछ ऐसे जनजातीय समुदाय के लोग भी इस समागम में आ रहे हैं, जिन्होंने आज तक ट्रेन की यात्रा नहीं की है। नई दिल्ली — विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की राजधानी — पहुँचकर वे अपनी दुनिया और शहरी जीवन के बीच के अंतर को महसूस करेंगे। यह अनुभव उन्हें विविधता में एकता की जीवंत झलक देगा। गौरतलब है कि हर जनजाति की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान होती है, और यह मंच उन्हें एक-दूसरे को जानने-समझने का अवसर देगा।
著名 हस्तियों की भागीदारी
समागम में जनजातीय समुदाय के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में पुरस्कृत हस्तियाँ, चिंतक और विचारक भाग लेंगे। भाटिया ने विश्वास जताया कि उनके उद्बोधन से प्रतिभागी एक नई दिशा और संकल्प लेकर अपने क्षेत्रों में लौटेंगे। यह आयोजन जनजातीय समाज को नई दशा और दिशा देने का प्रयास है।
आगे की राह
आयोजकों का मानना है कि जब लोग इस कार्यक्रम से लाभान्वित होकर अपने क्षेत्रों में वापस जाएंगे, तो वे अपनी विरासत, परंपरा और संस्कृति को संजोने का संकल्प साथ ले जाएंगे। यह समागम एक ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब जनजातीय समुदायों में शहरीकरण और पलायन की चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।