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क्या 'दिल्ली शब्दोत्सव-2026' जैसे कार्यक्रम आवश्यक हैं : प्रोफेसर डॉ राजीव नारायण?

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क्या 'दिल्ली शब्दोत्सव-2026' जैसे कार्यक्रम आवश्यक हैं : प्रोफेसर डॉ राजीव नारायण?

सारांश

क्या 'दिल्ली शब्दोत्सव-2026' कार्यक्रम हमारी संस्कृति और विचारों का सही मंच प्रदान करता है? यह कार्यक्रम कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली चर्चा की अनुमति देता है। जानें प्रोफेसर डॉ राजीव नारायण की महत्वपूर्ण बातें।

मुख्य बातें

दिल्ली शब्दोत्सव-2026 सांस्कृतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है।
यह कार्यक्रम सांस्कृतिक आज़ादी की आवश्यकता को उजागर करता है।
प्रोफेसर डॉ राजीव नारायण ने शांति की नई परिभाषा की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में संस्कृति और नाट्य का समावेश है।
यह कार्यक्रम छुपी हुई संस्कृति को प्रकट करने में सहायक है।

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीन दिवसीय ‘दिल्ली शब्दोत्सव-2026’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग और हिंदी अकादमी के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में कई हस्तियों ने पहले दिन शिरकत की और सभी ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।

इस कार्यक्रम में शामिल प्रोफेसर और रक्षा विशेषज्ञ डॉ राजीव नारायण ने इस तरह के कार्यक्रम को सार्थक बताया और कहा कि यह कार्यक्रम हमें इस तरह का मंच प्रदान करता है, जो हमें हर मुद्दे पर खुलकर बोलने की इजाजत देता है।

उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि ‘शब्दोत्सव-2026’ हमारे छुपे हुए ग्रंथ को उजागर करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है। इसमें संस्कृति और नाट्य भी शामिल हैं। अभी हम इस कार्यक्रम में रक्षा की भी बात कर रहे थे। यही भारत है, जिसे हमें समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि हमारे देश को आजादी 1947 में ही हासिल हो चुकी थी। लेकिन, हमें सांस्कृतिक आजादी नहीं मिली थी। हमारी संस्कृति कहीं न कहीं छुप गई थी। लेकिन, हमें इस बात की तारीफ करनी होगी कि इस तरह के कार्यक्रम हमारी छुपी हुई संस्कृति को परिलक्षित करने में काफी सहायक साबित होते हैं।

साथ ही, प्रोफेसर ने शांति की विचारधारा को लेकर भी अपना रूख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि शांति की परिभाषा को हमें समझना होगा। कई बार हमें शांति कमजोर करके रख देती है। कई बार हमें ऐसा भी देखने को मिला है कि लोग हथियारों का निर्माण करने के बाद शांति का पैगाम दुनिया में पहुंचाने की कोशिश करते हैं, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में मैं समझता हूं कि हमें शांति की परिभाषा को नए सिरे से समझने की कोशिश करना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में भी शांति निहित है। हमारे शस्त्रों में भी शांति निहित है। हमारे धर्म और राजा के बीच में किसी भी प्रकार का विरोधाभाष नहीं रहा है। हमारे पास शांति की व्यापक परिभाषा है। हमारे पास परमाणु बम है। लेकिन, हमने कभी-भी इसका इस्तेमाल किसी को डराने या धमकाने के लिए नहीं किया। वहीं, हम एक बात यह भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि अगर कोई हमारे ऊपर प्रहार करेगा, तो हम उसका हर कीमत पर माकूल जवाब देना जानते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमें अपने भीतर की गहराइयों में जाकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझने का भी अवसर प्रदान करता है। ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि हम अपनी संस्कृति की जड़ों को फिर से खोज सकें।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली शब्दोत्सव-2026 का उद्देश्य क्या है?
दिल्ली शब्दोत्सव-2026 का उद्देश्य सांस्कृतिक विमर्श को प्रोत्साहित करना और छुपी हुई संस्कृति को उजागर करना है।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से विषयों पर चर्चा की गई?
कार्यक्रम में संस्कृति, नाट्य, और रक्षा जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
प्रोफेसर डॉ राजीव नारायण की क्या राय है?
प्रोफेसर ने इसे सार्थक बताया और कहा कि यह हमें हर मुद्दे पर खुलकर बोलने की इजाजत देता है।
राष्ट्र प्रेस
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