जावरा में रियासतकालीन दशहरा परंपरा जीवंत, विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने दी विजयादशमी की शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
जावरा (रतलाम), 20 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश के जावरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने विजयादशमी के अवसर पर जावरा के दशहरा मैदान में आयोजित सार्वजनिक दशहरा उत्सव में भाग लिया और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पर्व को अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक बताया। यह आयोजन रियासत काल से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जो आज भी उसी भाव और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
विधायक का संदेश — अहंकार और अनाचार का अंत
विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने इस अवसर पर कहा, 'विजयादशमी हमें प्रेरणा देता है। जब अहंकार बढ़ जाता है तो अनाचार बढ़ता है। उस अहंकार रूपी अनाचार का समापन करने वाला पर्व विजयादशमी हमें प्रति वर्ष निरंतर प्रेरणा देता है।' उन्होंने आगे कहा कि प्रभु श्रीराम को आराध्य मानकर एकत्रित होकर विश्व में शांति, सद्भाव और मर्यादा की कामना की जाती है, तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के संस्कार बनाए रखने का संकल्प लिया जाता है। उन्होंने समस्त नगरवासियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं और मंगलकामनाएं दीं।
रियासतकालीन परंपरा का निर्वहन
जावरा में यह सार्वजनिक दशहरा उत्सव रियासत काल से आयोजित होता आ रहा है। समय के साथ जनसंख्या बढ़ने और अधिक लोगों के आने के कारण इसे दशहरा मैदान में स्थानांतरित किया गया, जहाँ आज भी उसी परंपरा का निर्वहन किया जाता है। आयोजन में रामायण की परंपरा के अनुरूप श्रीराम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का मंचन किया जाता है। गौरतलब है कि यह नगर का सबसे बड़ा सार्वजनिक आयोजन माना जाता है, जिसमें नगरवासियों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित सम्मिलित होते हैं।
समाज की एकता और सांस्कृतिक समर्पण
उत्सव समिति के एक पदाधिकारी ने कहा, 'मैं अपनी और दशहरा उत्सव समिति की ओर से सभी नगरवासियों को बुराइयों पर अच्छाई की विजय के इस पर्व, अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व विजयादशमी और नवरात्रि की अनेक-अनेक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं देता हूँ।' उन्होंने प्रभु श्रीराम से नगर, प्रदेश और देश की प्रगति तथा समाज में व्याप्त बुराइयों के नाश की प्रार्थना की। डॉ. पांडे ने इस बात पर भी बल दिया कि इस आयोजन में अलग-अलग समाजों और पूरे नगर का सहयोग रहता है, जो सामाजिक एकता का प्रतीक है।
आम जनता पर असर
इस उत्सव में परिवार सहित बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी इसे महज एक धार्मिक आयोजन से ऊपर उठाकर सामाजिक एकजुटता का मंच बनाती है। जावरा की यह परंपरा इस बात की गवाह है कि कैसे सदियों पुरानी रियासतकालीन सांस्कृतिक विरासत आज भी आधुनिक समाज में जीवंत है। विधायक ने उम्मीद जताई कि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती रहेगी।