गुमला बाल संप्रेषण गृह से तीन नाबालिग फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गुमला जिले में स्थित सिलम बाल संप्रेषण गृह (रिमांड होम) से शुक्रवार, 15 मई को तीन नाबालिग किशोर ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गए। फरार हुए किशोरों में से दो लोहरदगा जिले के निवासी हैं, जबकि तीसरा गुमला के घाघरा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। इस घटना ने एक बार फिर इस संस्था की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, फरार हुए तीन किशोरों में से दो दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के मामलों में निरुद्ध थे, जबकि एक चोरी के मामले में हिरासत में था। घटना की सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सह बाल संप्रेषण गृह के इंचार्ज अमर कुमार ने तत्काल स्थानीय पुलिस को सतर्क किया।
सुरक्षा में चूक और प्रशासनिक हड़कंप
अमर कुमार ने बताया कि जिस तरह से किशोरों ने ऊंची दीवार फांदी, उससे उन्हें चोटें लगने की पूरी आशंका है। इस घटना के बाद गुमला और आसपास के सभी थानों को अलर्ट पर रखा गया है और संदिग्ध ठिकानों पर सघन छापेमारी जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार नाबालिगों के परिजनों से भी संपर्क साधा जा रहा है।
बार-बार की घटनाएं, बार-बार के वादे
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस बाल संप्रेषण गृह से नाबालिग फरार हुए हों। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनके बाद जांच समितियां गठित हुईं और सुरक्षा को पुख्ता करने के आश्वासन दिए गए। बावजूद इसके, 15 मई की यह घटना स्पष्ट करती है कि जमीनी स्तर पर हालात में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। यह ऐसे समय में आया है जब बाल न्याय संस्थाओं में सुधार की मांग पहले से ही उठ रही है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार किशोरों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। साथ ही, सुरक्षा में हुई इस चूक की आंतरिक जांच के आदेश भी दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रिमांड होम से भागने वाले किशोर कई बार दोबारा अपराध की ओर प्रवृत्त हो सकते हैं, जिससे यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न भी बन जाता है।