झारखंड में कानून-व्यवस्था चरमराई, जमशेदपुर बैंक लूट पर BJP प्रवक्ता तुहिन सिन्हा का सोरेन सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 25 सितंबर 2026 को जमशेदपुर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार पर कानून-व्यवस्था, खनन नीति और विकास के मोर्चे पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रशासन की अनदेखी के चलते आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। जमशेदपुर में हुई दिनदहाड़े बैंक लूट की घटना को आधार बनाते हुए सिन्हा ने कहा कि यह स्थिति उन्हें 1995 से 2000 के बीच के अविभाजित बिहार-झारखंड के अपराध-ग्रस्त दौर की याद दिला रही है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
सिन्हा ने कहा कि पंजाब, झारखंड और अन्य विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार का ध्यान प्रशासन के बजाय राजनीतिक मुद्दों पर अधिक केंद्रित है, जिसके कारण प्रदेश में आए दिन आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। जमशेदपुर में हुई बैंक लूट की घटना को उन्होंने सरकार की विफलता का प्रमाण बताया।
दीनदयाल उपाध्याय जयंती और अंत्योदय का संदर्भ
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सिन्हा ने 'अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' के विचारों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि अंत्योदय का सार समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने डिजिटल तकनीक और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से इसी दिशा में कार्य किया है।
DBT और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दावे
सिन्हा ने दावा किया कि डीबीटी के ज़रिये बड़ी मात्रा में सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँच रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस पुराने बयान का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि सरकारी खर्च के एक रुपये में से मात्र 15 पैसे ही गरीबों तक पहुँचते थे। सिन्हा का दावा है कि डिजिटल व्यवस्था ने इस स्थिति को बदल दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले एक दशक में बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।
राजस्व बनाम पूंजीगत व्यय पर चेतावनी
सिन्हा ने आगाह किया कि यदि राज्य सरकारें राजस्व व्यय बढ़ाती रहें और पूंजीगत व्यय व इंफ्रास्ट्रक्चर पर पर्याप्त ध्यान न दें, तो विकास में असंतुलन पैदा हो सकता है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी झारखंड के बजटीय प्राथमिकताओं की आलोचना के संदर्भ में आई।
SIR और चुनाव प्रक्रिया पर रुख
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों को सिन्हा ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करना संवैधानिक दायित्व है। सिन्हा के अनुसार, कांग्रेस इस मुद्दे पर अनावश्यक संशय फैला रही है, जबकि वर्तमान चुनाव प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी हो चुकी है और दोबारा मतदान की घटनाओं में कमी आई है। झारखंड में BJP और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज़ होने के संकेत दे रहा है।