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क्या झारखंड विधानसभा में सूर्या हांसदा मुठभेड़ और संविधान संशोधन को लेकर पक्ष-विपक्ष में हंगामा हुआ?

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क्या झारखंड विधानसभा में सूर्या हांसदा मुठभेड़ और संविधान संशोधन को लेकर पक्ष-विपक्ष में हंगामा हुआ?

सारांश

झारखंड विधानसभा में सूर्या हांसदा मुठभेड़ के चलते पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा हुआ, जो राज्य की राजनीतिक स्थिति को उजागर करता है। क्या यह मामला सच में दबाया जा रहा है? जानिए इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

सूर्या हांसदा की मुठभेड़ ने झारखंड की राजनीति में हलचल पैदा की।
विधानसभा में हंगामे ने लोकतंत्र के मूल्यों को चुनौती दी।
सरकार की सीबीआई जांच की मांग ने राजनीतिक तनाव को बढ़ाया।
विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर चर्चा की आवश्यकता।

रांची, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। गोड्डा में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता सूर्या हांसदा के मुठभेड़ की घटना तथा संविधान के १३०वें प्रस्तावित संशोधन पर सोमवार को झारखंड विधानसभा में तीव्र हंगामा देखने को मिला।

सदन की कार्यवाही के प्रारंभ होते ही पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी मांगों के साथ वेल में पहुँचकर हंगामा करने लगे। स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने दोनों पक्षों से संयम और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन सदस्यों पर इसका कोई प्रभाव नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल चलने दिया जाए, लेकिन हंगामे के बीच उनकी आवाज दब गई। अंततः उन्होंने सदन की कार्यवाही अपराह्न १२:३० बजे तक के लिए स्थगित कर दी। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने कार्यवाही प्रारंभ होने से पहले सूर्या हांसदा मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सदन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पार्टी के सभी विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए। बाहर धरने पर बैठे भाजपा के विधायकों ने कानून-व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि गोड्डा में चार बार चुनाव लड़ चुके सूर्या हांसदा को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मार डाला। सरकार इस मामले को दबाने में लगी है। पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए। सत्ता पक्ष झामुमो, कांग्रेस और राजद के विधायकों ने भी सदन के बाहर १३०वें संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

उन्होंने एक स्वर में 'तानाशाही बंद करो' और 'वोट चोरी करना बंद करो' के नारे लगाए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सूर्या हांसदा एनकाउंटर की जांच की मांग और रांची के नगड़ी में रिम्स-टू के लिए किसानों की जमीन जबरन छीनने का आरोप लगाते हुए वेल में घुस आए। विपक्ष के सदस्यों ने मांगों से जुड़े पोस्टर लहराए और उन्हें फाड़कर वेल में फेंक दिया। हंगामे के बीच स्पीकर ने सभा की कार्यवाही १२:३० बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे राजनीतिक धरनाएँ और हंगामे नागरिकों के अधिकारों और सरकार की जिम्मेदारियों के बीच की खाई को उजागर करते हैं। यह केवल एक मुठभेड़ का मामला नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के मूल्यों और संविधान की रक्षा का भी प्रश्न है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्या हांसदा कौन थे?
सूर्या हांसदा एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने गोड्डा में चार बार चुनाव लड़ा था।
इस मुठभेड़ में सरकार की क्या भूमिका है?
सरकार पर आरोप है कि उन्होंने इस मामले को दबाने की कोशिश की है और सीबीआई जांच की मांग की जा रही है।
झारखंड विधानसभा में क्या हुआ?
विधानसभा में सूर्या हांसदा मुठभेड़ और संविधान के 130वें संशोधन पर पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा हुआ।
भाजपा ने क्या मांग की?
भाजपा ने सूर्या हांसदा मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग की है।
विपक्ष की मुख्य मांग क्या थी?
विपक्ष ने सूर्या हांसदा एनकाउंटर की जांच और किसानों की जमीन जबरन छीनने का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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