9 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की सीबीआई जांच याचिका से खुद को अलग किया, सीजेआई बनाएंगे नई पीठ

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सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की सीबीआई जांच याचिका से खुद को अलग किया, सीजेआई बनाएंगे नई पीठ

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय में पंजाब सरकार की सीबीआई जांच याचिका पर जस्टिस शील नागू ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब सीजेआई सूर्यकांत नई पीठ बनाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजवीर घुम्मन के परिसरों पर सीबीआई पहले ही छापे मार चुकी है।

मुख्य बातें

जस्टिस शील नागू ने 9 अक्टूबर 2026 को पंजाब सरकार की सीबीआई जांच याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया।
मामला अब सीजेआई सूर्यकांत के समक्ष नई पीठ के गठन के लिए भेजा जाएगा।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर 2026 को सीबीआई जांच का आदेश दिया था और दो महीने में रिपोर्ट माँगी थी।
सीबीआई ने चंडीगढ़ और पंजाब में 8 स्थानों पर तलाशी ली, जिनमें मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय भी शामिल था।
ओएसडी राजवीर घुम्मन और सहयोगी नितिन गोहल व बीर देविंदर पर तबादलों, नियुक्तियों और टेंडरों में कथित हस्तक्षेप के आरोप हैं।
अब तक सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस शील नागू ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को पंजाब सरकार की उस याचिका पर सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया, जिसमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजवीर घुम्मन सहित अन्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्देश दिया गया था। अब यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष नई पीठ के गठन के लिए भेजा जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ को इस याचिका पर सुनवाई करनी थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जस्टिस नागू सुनवाई नहीं कर सकते। तत्पश्चात पीठ ने मामले को सीजेआई के समक्ष नई पीठ के गठन हेतु भेजने के लिए आदेश पर हस्ताक्षर करने की बात कही।

यह घटनाक्रम गुरुवार, 8 अक्टूबर की सुनवाई के ठीक एक दिन बाद सामने आया, जब जस्टिस दत्ता ने बताया था कि मामले की फाइल पीठ के पास देर से पहुँची थी और जस्टिस नागू को दस्तावेजों का अध्ययन करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया था। उस दिन पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने किसी भी कठोर कार्रवाई से संरक्षण देने का अनुरोध किया था, जिस पर पीठ ने कहा था — 'जब हमने फाइल पढ़ी ही नहीं है, तो ऐसा कैसे कर सकते हैं?'

हाईकोर्ट का आदेश और सीबीआई की कार्रवाई

पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के 5 अक्टूबर 2026 के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को लिखे गए तीन पत्रों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामला दर्ज कर दो महीने के भीतर जांच की स्थिति पर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही पंजाब सरकार और पुलिस को केंद्रीय जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। एजेंसी ने मंगलवार को चंडीगढ़ और पंजाब में आठ स्थानों पर तलाशी ली, जिनमें चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय और संगरूर तथा मोहाली में राजवीर घुम्मन से जुड़े परिसर शामिल थे। इसके पश्चात बुधवार को घुम्मन और उनके सहयोगियों को पूछताछ के लिए सीबीआई के चंडीगढ़ कार्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया गया।

आरोप और पृष्ठभूमि

ईडी ने आरोप लगाया था कि राजवीर घुम्मन, उनके सहयोगी नितिन गोहल और बीर देविंदर प्रशासनिक तबादलों, नियुक्तियों और सरकारी टेंडरों में कथित तौर पर अनुचित हस्तक्षेप कर रहे थे। ईडी ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी, परंतु पंजाब पुलिस ने ईडी के पत्रों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

इसके बाद अधिवक्ता निखिल सराफ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की, जिसमें स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग की गई। याचिका में कहा गया था कि ईडी के पत्रों में पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के विरुद्ध गंभीर आरोप हैं, इसलिए पंजाब पुलिस और पंजाब सतर्कता विभाग के प्रभाव से मुक्त निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

आम जनता और राजनीतिक असर

यह मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा है जब आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब सरकार पहले से कई विवादों में घिरी हुई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी पर इस प्रकार के आरोप और सीबीआई जांच का आदेश, राज्य सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील मसला बन गया है। सर्वोच्च न्यायालय में याचिका और हाईकोर्ट के निर्देशों को लेकर यह पहला बड़ा न्यायिक परीक्षण है।

क्या होगा आगे

अब सीजेआई सूर्यकांत नई पीठ का गठन करेंगे, जो पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगी। तब तक सीबीआई की जांच जारी रहने की संभावना है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने अभी तक कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। नई पीठ के गठन और अगली सुनवाई की तारीख के ऐलान के बाद इस मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इसका समय और संदर्भ महत्वपूर्ण है — सीबीआई पहले ही छापे मार चुकी है और समन जारी हो चुके हैं। पंजाब सरकार अंतरिम संरक्षण माँग रही थी, लेकिन पीठ ने फाइल न पढ़ने का हवाला देकर राहत देने से इनकार कर दिया, जो न्यायिक सतर्कता का संकेत है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे जुड़े अधिकारी पर ईडी के गंभीर आरोपों के बावजूद पंजाब पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की — यह प्रश्न नई पीठ के समक्ष भी केंद्रीय रहेगा। अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि सीजेआई किस गति से नई पीठ बनाते हैं और वह पीठ अंतरिम राहत पर क्या रुख अपनाती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की याचिका से खुद को क्यों अलग किया?
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस मामले में जस्टिस नागू सुनवाई नहीं कर सकते, जिसके बाद जस्टिस नागू ने स्वयं को अलग कर लिया। इसके सटीक कारण का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया, जो न्यायिक परंपरा के अनुरूप है।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश क्यों दिया था?
उच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर 2026 को आदेश दिया कि ईडी के पत्रों में उठाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों — जिनमें प्रशासनिक तबादलों, नियुक्तियों और सरकारी टेंडरों में कथित हस्तक्षेप शामिल है — की जांच सीबीआई करे। पंजाब पुलिस द्वारा ईडी के पत्रों के बावजूद प्राथमिकी दर्ज न किए जाने के बाद अधिवक्ता निखिल सराफ की जनहित याचिका पर यह आदेश आया।
राजवीर घुम्मन पर क्या आरोप हैं?
ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजवीर घुम्मन और उनके सहयोगी नितिन गोहल तथा बीर देविंदर कथित तौर पर प्रशासनिक तबादलों, नियुक्तियों और सरकारी टेंडरों में अनुचित हस्तक्षेप कर रहे थे। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चंडीगढ़ और पंजाब में 8 स्थानों पर तलाशी भी ली है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
मामला अब सीजेआई सूर्यकांत के समक्ष भेजा जाएगा, जो नई पीठ का गठन करेंगे। नई पीठ पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगी और तय करेगी कि क्या सीबीआई जांच पर अंतरिम रोक लगाई जाए। तब तक सीबीआई की जांच जारी रहने की संभावना है।
सीबीआई ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय और संगरूर व मोहाली में राजवीर घुम्मन से जुड़े परिसरों सहित 8 स्थानों पर तलाशी ली। इसके बाद घुम्मन और उनके सहयोगियों को पूछताछ के लिए सीबीआई के चंडीगढ़ कार्यालय में पेश होने के लिए समन भेजे गए।
राष्ट्र प्रेस
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