3 सितंबर 2026
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अकाली दल ने पंजाब CMO भ्रष्टाचार की CBI जांच की मांग की, CM भगवंत मान का इस्तीफा भी माँगा

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अकाली दल ने पंजाब CMO भ्रष्टाचार की CBI जांच की मांग की, CM भगवंत मान का इस्तीफा भी माँगा

सारांश

शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय को एक भ्रष्टाचार के अड्डे में बदल दिया गया है — जहाँ दुष्कर्म के मामले ₹5 करोड़ में 'निपटाए' गए। ईडी का हलफनामा, ऑडियो-सीसीटीवी साक्ष्य और 5 सितंबर को प्रस्तावित घेराव — यह लड़ाई अब सड़क पर आ चुकी है।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल ने 3 सितंबर 2026 को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मिलकर पंजाब CMO भ्रष्टाचार की CBI जांच की माँग की।
आरोप है कि CM भगवंत मान के OSD राजबीर घुमन और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर मान ने दुष्कर्म के दो मामले 'निपटाने' के लिए ₹5 करोड़ रिश्वत ली।
अमृतसर और मोहाली के दोनों मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल हुई; आरोपी केस दर्ज होने के दो महीने में रिहा।
ईडी ने 1 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर CMO में तबादले-पोस्टिंग, टेंडर और लाइसेंस के लिए 'बाज़ार' चलने का आरोप लगाया।
हरसिमरत कौर बादल और स्त्री अकाली दल 5 सितंबर को CM आवास का घेराव करेंगी; इसके बाद सभी विधानसभा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन।

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 3 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुमन और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर मान के विरुद्ध कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध सीबीआई जांच की माँग की। पार्टी का आरोप है कि इन दोनों ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को एक संगठित भ्रष्टाचार रैकेट के केंद्र में बदल दिया है।

मुख्य आरोप और साक्ष्य

शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया को बताया कि कथित तौर पर दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों — अमृतसर और मोहाली — में आरोपियों को 'क्लीन चिट' दिलाने के लिए ₹5 करोड़ की रिश्वत ली गई। उनका दावा है कि पाँच पीड़ित महिलाएँ न्याय के लिए मुख्यमंत्री से मिली थीं, इसके बावजूद मामले दबाए गए। बादल के अनुसार, ऑडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज समेत सभी साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

शिअद ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की गई और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने के दो महीने के भीतर ही आरोपी बिना किसी सजा के रिहा हो गए।

ईडी के हलफनामे का हवाला

प्रतिनिधिमंडल — जिसमें महेशिंदर सिंह ग्रेवाल, बिक्रम सिंह मजीठिया, डॉ. दलजीत सिंह चीमा और सिकंदर सिंह मलूका शामिल थे — ने राज्यपाल को 1 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल उस हलफनामे से भी अवगत कराया, जिसमें कथित तौर पर बताया गया था कि अधिकारियों के तबादले-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, हथियारों के लाइसेंस और जमीन की मंजूरी के लिए सीएमओ को एक 'बाज़ार' में बदल दिया गया था।

शिअद के अनुसार, ईडी के औपचारिक रेफरेंस के बावजूद डीजीपी ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया, जबकि राज्य के वित्त मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस दस्तावेज़ को विपक्ष का 'हथियार' बताकर खारिज कर दिया।

सरकार पर सीधा निशाना

बादल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के करीबी लोगों ने गैंगस्टरों और अपराधियों के लिए एक 'सिंगल-विंडो सर्विस' चला रखी है, जिसमें भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) से लेकर तबादले-पोस्टिंग तक हर काम पैसे लेकर किया जाता है। शिअद ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का तत्काल इस्तीफा और ओएसडी राजबीर घुमन तथा गुरप्रीत कौर मान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।

आगे क्या होगा

बादल ने घोषणा की कि बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल और स्त्री अकाली दल 5 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी, इसके बाद सभी विधानसभा क्षेत्रों में क्रमबद्ध विरोध प्रदर्शन किए जाएँगे। उन्होंने पंजाबियों और मीडिया से पीड़ितों के साथ खड़े होने की अपील करते हुए कहा, 'जब तक न्याय नहीं मिल जाता, हम इस भ्रष्ट सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।' यह मामला आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बनने की दिशा में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे शिकायतकर्ता कोई भी हो। पंजाब में सत्ता के इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार के आरोपों का यह पैटर्न नया नहीं है, लेकिन न्यायिक निगरानी में जांच की माँग को नज़रअंदाज़ करना अब और मुश्किल होगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाली दल ने पंजाब CMO पर क्या आरोप लगाए हैं?
शिअद का आरोप है कि CM भगवंत मान के OSD राजबीर घुमन और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर मान ने दुष्कर्म के दो मामलों को 'निपटाने' के लिए ₹5 करोड़ की रिश्वत ली। पार्टी का कहना है कि अमृतसर और मोहाली के इन मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर आरोपियों को बचाया गया।
ईडी का हलफनामा इस मामले में क्यों अहम है?
प्रवर्तन निदेशालय ने 1 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर बताया कि पंजाब CMO में तबादले-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, हथियारों के लाइसेंस और जमीन की मंजूरी के लिए एक 'बाज़ार' चलाया जा रहा था। यह दस्तावेज़ शिअद के राजनीतिक आरोपों को एक स्वतंत्र जाँच एजेंसी की कार्यवाही से जोड़ता है।
शिअद ने राज्यपाल से क्या माँगें रखी हैं?
शिअद ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध CBI जांच, CM भगवंत मान का तत्काल इस्तीफा, और OSD राजबीर घुमन तथा गुरप्रीत कौर मान के विरुद्ध FIR दर्ज करना।
5 सितंबर के विरोध प्रदर्शन में क्या होगा?
सांसद हरसिमरत कौर बादल और स्त्री अकाली दल 5 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी। इसके बाद शिअद ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में क्रमबद्ध विरोध प्रदर्शनों की घोषणा की है।
पंजाब सरकार ने इन आरोपों पर क्या रुख अपनाया है?
रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के वित्त मंत्री ने ईडी के रेफरेंस दस्तावेज़ को सार्वजनिक रूप से विपक्ष द्वारा 'हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया दस्तावेज़' बताकर खारिज कर दिया। डीजीपी ने भी ईडी के औपचारिक रेफरेंस के बावजूद FIR दर्ज करने से इनकार किया, जो विपक्ष के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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