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NHRC ने लिया संज्ञान: भगवंत मान की पत्नी पर ₹5 करोड़ लेकर दुष्कर्म केस दबाने के आरोप, पंजाब सरकार को नोटिस

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NHRC ने लिया संज्ञान: भगवंत मान की पत्नी पर ₹5 करोड़ लेकर दुष्कर्म केस दबाने के आरोप, पंजाब सरकार को नोटिस

सारांश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी पर एक दुष्कर्म मामले को ₹5 करोड़ लेकर दबाने के कथित आरोपों का संज्ञान लिया है। पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रणजीत सिंह द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर पंजाब सरकार को दो सप्ताह में जवाब देना होगा।

मुख्य बातें

NHRC ने 22 अगस्त को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी पर ₹5 करोड़ लेकर दुष्कर्म केस दबाने के कथित आरोपों का संज्ञान लिया।
आरोप पंजाब के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रणजीत सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए बताए जाते हैं।
शिकायत 'लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी' ने दायर की; NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया।
पंजाब के मुख्य सचिव और DGP को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के महिला सुरक्षा प्रभाग को भी भेजा गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 22 अगस्त को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी पर लगे उन कथित आरोपों का संज्ञान लिया है, जिनमें एक दुष्कर्म मामले को दबाने के लिए ₹5 करोड़ की मांग की बात कही गई है। ये आरोप पंजाब के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रणजीत सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए बताए जाते हैं।

मामले का मूल घटनाक्रम

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC पीठ ने 'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' की धारा 12 के तहत इस मामले का संज्ञान लिया। शिकायत 'लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी' की ओर से दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि दुष्कर्म के एक मामले में ₹5 करोड़ की माँग की गई, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री की पत्नी की भूमिका बताई गई।

NHRC का नोटिस और निर्देश

आयोग की रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि पंजाब सरकार (चंडीगढ़) के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया जाए। इन अधिकारियों को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जाँच कराने और दो सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को सौंपने के लिए कहा गया है।

NHRC के नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के अंतर्गत आयोग को जाँच के लिए सिविल न्यायालय के समकक्ष अधिकार प्राप्त हैं, जो उसे इस प्रकार के मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाते हैं।

पीड़ित के अधिकारों पर चिंता

शिकायत में रेखांकित किया गया है कि इस तरह का कथित हस्तक्षेप दुष्कर्म पीड़िता के सम्मान, सुरक्षा, निष्पक्ष जाँच और न्याय पाने के अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। शिकायतकर्ता ने माँग की है कि आरोपों की स्वतंत्र जाँच हो, साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और जाँच को कमज़ोर या प्रभावित करने की किसी भी कोशिश की निष्पक्ष पड़ताल की जाए।

आयोग ने अपने नोटिस में दर्ज किया कि 'शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़िता के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं' और यह कि 'रेप पीड़िता के न्याय पाने का अधिकार किसी भी प्रभाव, रुतबे या पद से ऊपर होना चाहिए।'

गृह मंत्रालय को भी भेजा मामला

NHRC ने यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के महिला सुरक्षा प्रभाग को भी प्रेषित कर दिया है। यह कदम इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि आयोग इसे केवल राज्य स्तरीय प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि व्यापक महिला सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में देख रहा है।

आगे क्या होगा

पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और DGP को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। आयोग उस रिपोर्ट के आधार पर अगले कदम तय करेगा। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पहले से विभिन्न प्रशासनिक विवादों से घिरी हुई है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार NHRC के नोटिस का जवाब किस रूप में देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह स्वतंत्र जाँच का आश्वासन देगी या केवल प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। आलोचकों का कहना है कि राज्य-नियंत्रित जाँच तंत्र से निष्पक्षता की उम्मीद रखना स्वयं में एक विरोधाभास है। जब तक कोई स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक निगरानी इस मामले में नहीं आती, तब तक पीड़िता के मानवाधिकारों की रक्षा केवल कागज़ों पर बनी रहेगी।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NHRC ने भगवंत मान की पत्नी के मामले में क्या कार्रवाई की है?
NHRC ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले का संज्ञान लिया है और पंजाब के मुख्य सचिव तथा DGP को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपनी होगी।
भगवंत मान की पत्नी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
कथित तौर पर पंजाब के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रणजीत सिंह ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि एक दुष्कर्म मामले को दबाने के लिए ₹5 करोड़ की माँग की गई, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी की कथित संलिप्तता बताई गई। ये आरोप अभी जाँच के दायरे में हैं।
इस मामले में शिकायत किसने दर्ज कराई?
'लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी' नामक संगठन ने NHRC में यह शिकायत दायर की। शिकायत में पीड़िता के सम्मान, निष्पक्ष जाँच और न्याय पाने के अधिकार की रक्षा की माँग की गई है।
NHRC के नोटिस के बाद पंजाब सरकार को क्या करना होगा?
पंजाब के मुख्य सचिव और DGP को दो सप्ताह के भीतर आरोपों की जाँच कराकर आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट सौंपनी होगी। NHRC उस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।
क्या इस मामले में केंद्र सरकार भी शामिल है?
हाँ, NHRC ने यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के महिला सुरक्षा प्रभाग को भी प्रेषित कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि आयोग इसे व्यापक महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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