भगवंत मान के OSD पर भ्रष्टाचार जांच CBI को, हाईकोर्ट आदेश पर विपक्ष ने कसा तंज
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत कार्यालय से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने CBI को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर हमला बोला।
मामले की पृष्ठभूमि
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े OSD राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप लगाए थे तथा उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। पंजाब पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर वकील निखिल सराफ ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जांच CBI को सौंपी।
बाजवा का स्वागत, घुम्मन पर कार्रवाई की माँग
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैं हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं और उम्मीद करता हूं कि CBI निष्पक्ष और तय समय-सीमा के भीतर जांच करेगी। पंजाब के सरकारी खजाने को लूटने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों।'
मजीठिया का तीखा हमला
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि हाईकोर्ट ने भगवंत मान की तथाकथित ईमानदारी की कलई खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ED की ओर से बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद पंजाब सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते हाईकोर्ट को यह कदम उठाना पड़ा।
मजीठिया ने अपनी पोस्ट में राजबीर घुम्मन, नितिन गुहाल और जतिन गुहाल का नाम लेते हुए कहा कि इन सभी का पर्दाफाश होना तय है। उन्होंने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के मामले में टोपी सिन्हा पर कोर्ट को गुमराह करने का भी आरोप लगाया और कहा कि अदालत ने इस पर कड़ी फटकार लगाई। मजीठिया ने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया तक का 'पूरा हिसाब' होगा।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI को दो महीने की समय-सीमा में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह मामला पंजाब की राजनीति में नई उथल-पुथल पैदा कर सकता है, क्योंकि AAP सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर विपक्ष के निशाने पर है। गौरतलब है कि पंजाब पुलिस की निष्क्रियता को लेकर यह पहली बार नहीं है जब न्यायालय ने संज्ञान लिया है — आलोचकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति सत्ता पक्ष के करीबियों को बचाने की कोशिश का संकेत देती है।