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पंजाब सीएमओ भ्रष्टाचार मामला: हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, BJP नेता बिट्टू बोले — 'बेईमान मान'

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पंजाब सीएमओ भ्रष्टाचार मामला: हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, BJP नेता बिट्टू बोले — 'बेईमान मान'

सारांश

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सीएमओ के ओएसडी से जुड़े ED पत्रों की जांच CBI को सौंपी — और BJP ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। रवनीत सिंह बिट्टू का 'बेईमान मान' वाला हमला AAP की 'कट्टर ईमानदारी' की छवि पर सीधा प्रहार है, जो राज्य में अगले राजनीतिक घमासान की पटकथा लिख सकता है।

मुख्य बातें

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सीएमओ के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन से जुड़े ED पत्रों की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया।
BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'बेईमान मान' कहते हुए CMO की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
याचिका में GMADA , GLADA परियोजनाओं, हथियार लाइसेंस, भूमि मामलों और खनन में कथित अवैध भुगतान के आरोप हैं।
अधिवक्ता निखिल सराफ ने 200 से अधिक पन्नों की याचिका दायर की थी; बिट्टू ने उनकी प्रशंसा की।
बिट्टू के अनुसार पंजाब के DGP को जवाब के लिए चार पत्र भेजे गए, पर कोई उत्तर नहीं मिला।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और अन्य पर भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पत्रों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। इस फैसले के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने 5 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा प्रहार किया। बिट्टू ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए।

मामले का मुख्य घटनाक्रम

हाई कोर्ट ने यह आदेश अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा दायर 200 से अधिक पन्नों की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। बिट्टू ने बताया कि याचिका में आरोप लगाया गया था कि कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति व तबादले, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GLADA) की बड़ी विकास परियोजनाओं, हथियारों के लाइसेंस, भूमि मामलों और खनन गतिविधियों के सिलसिले में गैर-कानूनी भुगतान की कथित तौर पर मांग की गई थी।

बिट्टू ने यह भी कहा कि मामले की जानकारी रखने वालों के अनुसार पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को जवाब माँगने के लिए चार पत्र भेजे गए, परंतु कोई उत्तर नहीं मिला। उन्होंने अधिवक्ता सराफ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कथित दबाव और धमकियों के बावजूद यह मामला कोर्ट तक पहुँचाया।

BJP का AAP सरकार पर हमला

बिट्टू ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'ये भगवंत मान नहीं, बल्कि बेईमान मान हैं।' उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पंजाब को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के वादे के साथ सत्ता में आया था, उसे अब अपने ही कार्यालय से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देना होगा। BJP नेता ने 'कट्टर ईमानदारी' के AAP के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि इनकी आज असल परीक्षा हो रही है।

बिट्टू ने चंडीगढ़ में मंत्रियों के आवासों से जुड़े हालिया विवादों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन घटनाओं ने सत्ता के पदों पर बैठे लोगों की विश्वसनीयता पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जवाबदेही पर उठे सवाल

BJP नेता ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के पास अधिकारियों का तबादला करने और प्रशासनिक निर्णय लेने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, किंतु इस अधिकार का उपयोग कथित भ्रष्टाचार या अनुचित प्रभाव के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर CMO पर लगे आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह जनता के भरोसे के साथ गंभीर विश्वासघात होगा।

बिट्टू ने ED के पत्रों पर पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था, जिसका उचित उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने माँग की कि सत्ता के पदों पर बैठे लोगों से जुड़े इन सवालों की निष्पक्ष, विस्तृत और विश्वसनीय जांच होनी चाहिए।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब AAP सरकार पहले से ही कई विवादों से घिरी हुई है। गौरतलब है कि CBI जांच के आदेश से राज्य और केंद्र के बीच संभावित टकराव की आशंका भी बनती है। आलोचकों का कहना है कि पंजाब की जनता को राजनीतिक बयानबाजी और बहानेबाजी से परे पारदर्शी जवाब मिलने चाहिए। CBI जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके दम पर पार्टी ने पंजाब और दिल्ली में सत्ता हासिल की थी। BJP का तत्काल और आक्रामक प्रतिक्रिया देना यह दर्शाता है कि विपक्ष इस मामले को अगले चुनाव तक जिंदा रखने की रणनीति पर है। असली सवाल यह है कि क्या CBI जांच स्वतंत्र और समयबद्ध होगी, या राज्य-केंद्र के बीच राजनीतिक खींचतान में उलझकर रह जाएगी। DGP को चार पत्र भेजने के बाद भी कोई जवाब न मिलना, पारदर्शिता के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश क्यों दिया?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सीएमओ के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और अन्य पर भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े ED के पत्रों की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया। यह आदेश अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा 200 से अधिक पन्नों की याचिका दायर करने के बाद आया, जिसमें CMO के कामकाज पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने AAP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'बेईमान मान' कहते हुए CMO की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि AAP की 'कट्टर ईमानदारी' के दावे खोखले साबित हो रहे हैं और पंजाब की जनता को पारदर्शी जवाब मिलना चाहिए।
राजबीर सिंह घुमन के खिलाफ क्या आरोप हैं?
मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन पर कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति व तबादले, GMADA और GLADA की विकास परियोजनाओं, हथियार लाइसेंस, भूमि मामलों और खनन गतिविधियों के सिलसिले में अवैध भुगतान माँगने के आरोप हैं। ये आरोप ED के पत्रों में उठाए गए हैं, जिनकी जांच अब CBI को सौंपी गई है।
पंजाब के DGP को पत्र भेजने के बाद क्या हुआ?
बिट्टू के अनुसार मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि पंजाब के DGP को जवाब माँगने के लिए चार पत्र भेजे गए, लेकिन किसी का कोई उत्तर नहीं मिला। इसे BJP ने राज्य सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाने के लिए प्रमुख साक्ष्य के रूप में पेश किया।
इस मामले का आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI अब ED पत्रों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करेगी। राज्य सरकार को हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था; अब जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष पंजाब की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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