क्या डीएमके सांसद कनिमोझी ने अनुराग ठाकुर पर तंज कसा?

सारांश
Key Takeaways
- विज्ञान को मिथकों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- शिक्षा में तर्क और वैज्ञानिक सोच महत्वपूर्ण है।
- सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है।
- राजनीतिक बयानों का छात्रों पर असर पड़ सकता है।
- संस्कृति और विज्ञान के बीच टकराव हो रहा है।
नई दिल्ली, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। डीएमके सांसद एमके कनिमोझी ने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के हाल के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें उन्होंने स्कूली बच्चों से पूछा था कि चंद्रमा पर सबसे पहले कदम किसने रखा था और फिर उत्तर दिया कि वह भगवान हनुमान थे।
कनिमोझी ने इस पर अपनी गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "एक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा स्कूली बच्चों से यह पूछना कि चांद पर सबसे पहले किसने कदम रखा था और यह कहना कि वह नील आर्मस्ट्रांग नहीं, बल्कि हनुमान थे, अत्यंत चिंताजनक है।"
उन्होंने अपने 'एक्स' पोस्ट में आगे लिखा, "विज्ञान कोई मिथक नहीं है। कक्षाओं में युवाओं को गुमराह करना ज्ञान, तर्क और हमारे संविधान में निहित वैज्ञानिक सोच का अपमान है।"
कनिमोझी ने अपने 'एक्स' पोस्ट में कहा, "भारत का भविष्य जिज्ञासा को पोषित करने में है, न कि तथ्यों को मिथकों से गुलाम करने में।"
कनिमोझी के इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। कई लोग उनके समर्थन में हैं और उनका कहना है कि शिक्षा को तर्क और वैज्ञानिक सोच पर आधारित रहना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसे संस्कृति बनाम विज्ञान के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
ज्ञात हो कि भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश में एक कार्यक्रम में छात्रों से कहा था कि भगवान हनुमान को अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है, और उन्होंने छात्रों से भारत की परंपराओं से जुड़ने के लिए पाठ्यपुस्तकों के बाहर देखने का आग्रह किया था।
अनुराग ठाकुर ने शनिवार को अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर लिखा था, "पवनसुत हनुमान जी पहले अंतरिक्ष यात्री।"