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कानपुर में 'हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026': 26 नवंबर से, 400+ संस्थाएँ होंगी शामिल

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कानपुर में 'हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026': 26 नवंबर से, 400+ संस्थाएँ होंगी शामिल

सारांश

कानपुर में 26 से 30 नवंबर को 'हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026' का आयोजन होगा। बृजेंद्र स्वरूप पार्क में होने वाले इस पाँच दिवसीय मेले में 400 से अधिक सेवा संस्थाएँ, प्रमुख संत और RSS के शीर्ष पदाधिकारी शामिल होंगे, साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की भी संभावना है।

मुख्य बातें

कानपुर के बृजेंद्र स्वरूप पार्क में 26 से 30 नवंबर 2026 तक 'हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026' का आयोजन।
मेले में 400 से अधिक सेवा संस्थाओं की प्रदर्शनी होगी; शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और महिला सशक्तीकरण क्षेत्र की संस्थाएँ शामिल।
RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले , स्वामी अवधेशानंद गिरि जी सहित प्रमुख संत और गणमान्य व्यक्तित्व होंगे उपस्थित।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेले में शामिल होने की संभावना।
31 अक्टूबर को एक लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ सामूहिक वंदे मातरम् गायन सहित पूर्व-जागरूकता अभियान प्रस्तावित।

कानपुर के बृजेंद्र स्वरूप पार्क में 26 से 30 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाला 'हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026' भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और समाज सेवा को एकसाथ एक मंच पर प्रस्तुत करेगा। पाँच दिवसीय इस आयोजन में 400 से अधिक सेवा संस्थाओं की प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण होगी। आयोजकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी इस मेले में शामिल होने की संभावना है।

आयोजन का उद्देश्य और विषय-वस्तु

मेले का मूल लक्ष्य भारतीय संस्कृति, सेवा-भाव और राष्ट्रचेतना को समाज के व्यापक वर्ग — विशेषकर युवाओं — तक पहुँचाना है। आयोजकों ने छह प्रमुख थीम निर्धारित की हैं: संस्कृति (भारतीय परंपराओं का परिचय), सेवा (समाज सेवा की भारतीय परंपरा को जन-जन तक पहुँचाना), संस्कार (युवा पीढ़ी में चरित्र और मूल्य आधारित जीवन का संदेश), नारी सम्मान (मातृशक्ति और कन्या सम्मान को सामाजिक अभियान बनाना), युवा जागरण (विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ना), और राष्ट्रभाव (वंदे मातरम् के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जागृत करना)।

गौरतलब है कि यह आयोजन केवल धार्मिक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षी सेवा, महिला सशक्तीकरण और जनकल्याण के क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं को भी इस साझा मंच पर सहभागी बनाया जा रहा है।

विशिष्ट अतिथि और संत-धर्माचार्यों की सहभागिता

मेले में देश के प्रमुख संतों और सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तित्वों की उपस्थिति प्रस्तावित है। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज और स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज सहित अन्य संत-धर्माचार्य और विभिन्न क्षेत्रों में समाज का नेतृत्व करने वाले गणमान्य लोग शामिल होंगे।

प्रतिदिन के कार्यक्रम और विशेष प्रस्तुतियाँ

मेले के दौरान प्रतिदिन गंगा अवतरण, गंगा आरती, कन्या वंदन, मातृ-पितृ वंदन, आचार्य वंदन और अतिथि वंदन जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वस्तरीय कलाकारों द्वारा प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा।

इसके अतिरिक्त काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम और वृंदावन धाम के विग्रहों के दर्शन, भजन संध्या, 'रानी लक्ष्मीबाई' नाट्य मंचन, परमवीर चक्र विजेताओं का वंदन और भारतीय व्यंजनों का स्वाद भी आगंतुकों के लिए प्रस्तावित है।

मेले से पहले जागरूकता अभियान

आयोजन से पूर्व ही शहर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रतियोगिताएँ, स्वामी विवेकानंद रथयात्रा, शारदीय नवरात्र में पंचमी, षष्ठी और सप्तमी को नारी सम्मान अभियान के तहत कन्या वंदन, और 31 अक्टूबर को एक लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ सामूहिक वंदे मातरम् गायन जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

आयोजकों का कहना है कि इन पूर्व-गतिविधियों का उद्देश्य मेले को महज पाँच दिनों के आयोजन तक सीमित न रखते हुए, विद्यार्थियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को पहले से ही इस अभियान से जोड़ना है। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सेवा के समन्वय का एक वृहद प्रयास साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि RSS और उससे जुड़े सेवा संगठनों द्वारा उत्तर प्रदेश में सामाजिक आधार को व्यापक बनाने की एक सुनियोजित कोशिश है। 400 से अधिक संस्थाओं को एकमंच पर लाना और मुख्यमंत्री की संभावित उपस्थिति इसे राज्य सरकार की अप्रत्यक्ष भागीदारी का संकेत देती है। गौरतलब है कि ऐसे आयोजन विधानसभा चुनाव के पहले भी प्रमुखता से होते रहे हैं — समय और संरचना दोनों इस पर ध्यान आकर्षित करते हैं। मुख्यधारा कवरेज अक्सर इन सांस्कृतिक मेलों की सांगठनिक व्यापकता और उनके दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव को अनदेखा कर देती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026 कब और कहाँ होगा?
यह मेला 26 से 30 नवंबर 2026 तक कानपुर के बृजेंद्र स्वरूप पार्क में आयोजित होगा। यह पाँच दिवसीय कार्यक्रम है जिसमें सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा से जुड़ी गतिविधियाँ शामिल हैं।
मेले में कौन-कौन से प्रमुख व्यक्तित्व शामिल होंगे?
आयोजकों के अनुसार, RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज और स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज सहित प्रमुख संत-धर्माचार्य शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी शामिल होने की संभावना बताई गई है।
इस मेले में कितनी और कौन-सी संस्थाएँ भाग लेंगी?
मेले में 400 से अधिक सेवा संस्थाओं की प्रदर्शनी होगी। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षी सेवा, महिला सशक्तीकरण और जनकल्याण के क्षेत्रों में कार्यरत संगठन शामिल हैं।
मेले की मुख्य थीम क्या है?
मेले की छह प्रमुख थीम हैं — संस्कृति, सेवा, संस्कार, नारी सम्मान, युवा जागरण और राष्ट्रभाव। इन सभी थीम के माध्यम से भारतीय परंपराओं और राष्ट्रचेतना को युवाओं तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
मेले से पहले क्या विशेष कार्यक्रम प्रस्तावित हैं?
31 अक्टूबर को एक लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ सामूहिक वंदे मातरम् गायन, स्वामी विवेकानंद रथयात्रा और शारदीय नवरात्र के दौरान नारी सम्मान अभियान के तहत कन्या वंदन जैसे पूर्व-जागरूकता कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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