क्या कर्नाटक को तरक्की के लिए जाति भेदभाव को छोड़ना होगा? : कुमारस्वामी

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क्या कर्नाटक को तरक्की के लिए जाति भेदभाव को छोड़ना होगा? : कुमारस्वामी

सारांश

कर्नाटका की राजनीति में जाति भेदभाव का मुद्दा गरमा गया है। एचडी कुमारस्वामी ने एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्या यह समय है कि कर्नाटक एक नई दिशा में बढ़े?

Key Takeaways

  • जाति भेदभाव को छोड़कर एकता की आवश्यकता है।
  • किसानों के कल्याण के लिए सहयोग जरूरी है।
  • देवेगौड़ा का कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान।

हासन, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को हासन में आयोजित जेडी (एस) की रजत जयंती जनसभा में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से जाति से ऊपर उठकर कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार को चुनौती देने के लिए एकजुट होने की अपील की।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की तरक्की के लिए एकता आवश्यक है।

कुमारस्वामी ने किसानों से जातिगत भेदभाव को भुलाकर कर्नाटक के विकास के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा की किसानों के कल्याण के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का उल्लेख किया और सिंचाई मंत्री के रूप में उनके 2 वर्ष और मुख्यमंत्री के रूप में 2.5 वर्ष के कार्यकाल का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि देवेगौड़ा ने 25,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण माफ किए, जिससे जिला सहकारी बैंक संचालन में सक्षम रह सके। उन्होंने विपक्ष को किसानों के लिए अपने योगदान को साबित करने की चुनौती दी और कहा कि उन्होंने उस समय प्रधानमंत्री से अतिरिक्त धनराशि नहीं मांगी थी।

कुमारस्वामी ने कर्नाटक के लोगों, विशेषकर हासन जिले के लोगों से मौजूदा स्थिति पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भाजपा-जेडी (एस) गठबंधन प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके काम का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राज्य सरकार भ्रष्ट है, किसानों की उपेक्षा करती है, और किसानों की चिंताओं को दूर करने के बजाय राजनीतिक सत्ता संघर्ष में व्यस्त है।

कुमारस्वामी ने कहा कि सरकारी भ्रष्टाचार से निपटने के प्रयास उनके गृह जिले से शुरू होने चाहिए। उन्होंने रजत जयंती को विपक्ष का सामना करने और कर्नाटक के भविष्य की दिशा में काम करने का आरंभिक बिंदु बताया।

उन्होंने 2028 में मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए जनता के समर्थन को स्वीकार किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि उनकी प्राथमिकता राज्य को सही दिशा में ले जाना है। उन्होंने बताया कि वे पहले ही दो बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।

कुमारस्वामी ने कहा कि कर्नाटक के पास पर्याप्त संसाधन और धन उपलब्ध है। फिर भी यहां विकास के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखते। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जेडी (एस) के चंदे पर सवाल उठाने की आलोचना की और लोकसभा चुनावों में मिली हार को स्वीकार किया। उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि देवेगौड़ा की 1989 की हार राजनीतिक प्रतिशोध के कारण हुई थी, जो कावेरी नदी के किनारे बसे लोगों के लिए एक बड़ा नुकसान था।

कुमारस्वामी ने कर्नाटक में सिंचाई और किसानों के कल्याण के प्रति देवेगौड़ा के आजीवन समर्पण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देवेगौड़ा, जो वर्तमान में अपने अंतिम राज्यसभा सत्र में हैं, ने कावेरी जल वितरण में कर्नाटक को हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए समय मांगा है।

उन्होंने राज्य सरकार पर लगभग 2,800 किसानों की आत्महत्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया, "अहिंदा परिवार किसान हैं। मैं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से सवाल करना चाहता हूं, जो किसानों के साथ विश्वासघात करते हुए अहिंदा राजनीति का पालन करने का दावा करते हैं। मक्का और दालें उगाने वाले किसान सड़कों पर आ गए हैं। सरकारी खरीद से दलालों को फायदा हो रहा है। यह दलालों की सरकार है।"

उन्होंने अपने नेतृत्व के लिए जनसमर्थन का उल्लेख किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि देवेगौड़ा ने पिछले छह दशकों में केवल दो बार पदभार संभालने के बावजूद, उत्तरी और दक्षिणी कर्नाटक दोनों में सिंचाई परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण धनराशि हासिल की।

उन्होंने उत्तरी कर्नाटक के किसानों से अपील करते हुए कहा कि कृष्णा नदी के जल में राज्य का हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए 1994 में देवेगौड़ा का मुख्यमंत्री कार्यकाल महत्वपूर्ण था।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बछावत आयोग द्वारा निर्धारित वर्ष 2000 तक आवंटित जल का उपयोग न करने से किसानों पर गंभीर प्रभाव पड़ता।

Point of View

NationPress
10/02/2026

Frequently Asked Questions

कुमारस्वामी ने किस विषय पर जोर दिया?
कुमारस्वामी ने जाति भेदभाव को छोड़कर एकता पर जोर दिया।
देवेगौड़ा का किसानों के प्रति क्या योगदान रहा है?
देवेगौड़ा ने 25,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण माफ किए।
कुमारस्वामी ने मौजूदा सरकार पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने मौजूदा सरकार को भ्रष्ट और किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
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