72वें राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद कार्तिक आर्यन लालबागचा राजा के दरबार पहुंचे, बप्पा को अर्पित किया अवॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता कार्तिक आर्यन ने 72वाँ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने के बाद 23 सितंबर 2026 को मुंबई के सुप्रसिद्ध लालबागचा राजा गणपति मंदिर में दर्शन किए और अपना सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार बप्पा के चरणों में समर्पित किया। भारी सुरक्षा के बीच पारंपरिक श्रद्धाभाव से की गई इस पूजा-अर्चना के बाद कार्तिक ने मीडिया से कहा कि यह पल उनके और उनके परिवार के लिए जीवन का सबसे खास क्षण है।
मंदिर में क्या हुआ
कार्तिक आर्यन ने लालबागचा राजा के दरबार में विधि-विधान से पूजा-अर्चना सम्पन्न की। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार को बप्पा के चरणों में रखा और उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं और मीडिया ने अभिनेता का उत्साह के साथ स्वागत किया।
कार्तिक आर्यन ने क्या कहा
दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में अभिनेता ने कहा, 'इस समय मेरे घर में खुशी का माहौल बना हुआ है। पुरस्कार से सम्मानित होने के तुरंत बाद बप्पा के दर्शन करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है, मैं तो बस यही कहना चाहूंगा कि मैं और मेरा परिवार इस समय बहुत खुश हैं। गणपति बप्पा मोरया।' उनके इस भावुक संदेश ने मौजूद सभी लोगों को छू लिया।
किस फिल्म के लिए मिला सम्मान
कार्तिक आर्यन को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'चंदू चैंपियन' फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया है। यह पुरस्कार उन्होंने प्रख्यात मलयालम अभिनेता ममूटी (फिल्म 'ब्रह्मयुगम') के साथ साझा किया है। गुजरात के केवडिया (एकता नगर) में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।
किरदार और तैयारी
फिल्म 'चंदू चैंपियन' में कार्तिक ने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया है। इस भूमिका के लिए उन्होंने करीब 14 महीने तक कड़ी ट्रेनिंग की और अपना वजन लगभग 15 किलोग्राम तक घटाया। फिल्म की कहानी एक व्यक्ति के संघर्ष, हार न मानने के जज्बे और इतिहास रचने की प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाती है।
आगे का सफर
यह पुरस्कार कार्तिक आर्यन के करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो उन्हें बॉलीवुड के उस चुनिंदा वर्ग में शामिल करता है जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अभिनय का सर्वोच्च सम्मान हासिल किया है। बप्पा को पुरस्कार समर्पित कर उन्होंने यह संदेश दिया कि सफलता में आस्था और परिवार का हाथ सबसे बड़ा होता है।