16 जुलाई 2026
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कश्मीर में 35-36°C तक पहुँचेगा पारा, 19 जुलाई से जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश का अलर्ट

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कश्मीर में 35-36°C तक पहुँचेगा पारा, 19 जुलाई से जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश का अलर्ट

सारांश

कश्मीर घाटी में अगले दो दिन तपिश और उमस का दौर रहेगा, पारा 35-36°C तक जाएगा। फिर 19 जुलाई से पलटवार — भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की चेतावनी के साथ मानसून दस्तक देगा। किसानों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह।

मुख्य बातें

16-18 जुलाई को कश्मीर घाटी में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने का अनुमान।
19 जुलाई से जम्मू-कश्मीर में व्यापक बारिश का दौर शुरू होगा; 20-23 जुलाई को अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश।
20-22 जुलाई को चेनाब घाटी , पीर पंजाल रेंज और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ व भूस्खलन की चेतावनी।
किसानों को 20-23 जुलाई के दौरान खेती के काम रोकने की सलाह।
यात्रियों, पर्यटकों और ट्रेकर्स को मौसम के अनुसार यात्रा योजना बनाने का निर्देश।

जम्मू-कश्मीर के स्थानीय मौसम विभाग ने 16 जुलाई 2026 को जारी अपनी सलाह में बताया कि कश्मीर घाटी में अगले दो दिनों में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है, जिसके बाद 19 जुलाई से पूरे जम्मू-कश्मीर में व्यापक बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। विभाग के अनुसार यह मौसमी बदलाव किसानों, पर्यटकों और यात्रियों के लिए विशेष सतर्कता की माँग करता है।

मुख्य मौसम पूर्वानुमान

मौसम विभाग के डायरेक्टर मुख्तार अहमद ने बताया कि 16 से 18 जुलाई के बीच मौसम आम तौर पर गर्म और उमस भरा रहेगा। इस दौरान कुछ स्थानों पर थोड़े समय के लिए बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

19 जुलाई को मौसम आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें संभव हैं। जम्मू डिवीजन के कुछ इलाकों में तेज़ बारिश के छोटे दौर आ सकते हैं।

20 से 23 जुलाई के बीच मौसम व्यापक रूप से बादलों से घिरा रहेगा और अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। कश्मीर डिवीजन और जम्मू डिवीजन के कुछ जिलों में इस अवधि में भारी बारिश के दौर संभव हैं। 24-25 जुलाई को कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी।

भूस्खलन और बाढ़ का खतरा

मौसम विभाग ने 20 से 22 जुलाई के दौरान चेनाब घाटी, पीर पंजाल रेंज और कश्मीर डिवीजन के पहाड़ी क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों पर अचानक बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी धंसने की चेतावनी जारी की है। कुछ निचले इलाकों में जलभराव और हल्की बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि नदियों, धाराओं और स्थानीय नालों में जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि होने की आशंका है।

किसानों और यात्रियों के लिए सलाह

विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे 20 से 23 जुलाई के दौरान खेती से जुड़े सभी कार्य स्थगित रखें। इसी के साथ यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों, पर्यटकों और ट्रेकर्स को भी सतर्क रहने और अपनी योजनाएँ मौसम के अनुरूप बनाने की सलाह दी गई है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में मानसून की सक्रियता बढ़ रही है। आने वाले दिनों में मौसम विभाग की अद्यतन सलाह पर नज़र रखना ज़रूरी होगा, विशेष रूप से पहाड़ी मार्गों और नदी-तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचे की तैयारी पर सवाल बने रहते हैं। पर्यटन सीज़न के चरम पर यह अलर्ट प्रशासन के लिए भी परीक्षा की घड़ी है — सलाह जारी करना पर्याप्त नहीं, ज़मीनी तैयारी की जवाबदेही भी उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्मीर में अगले दो दिनों में तापमान कितना रहेगा?
मौसम विभाग के अनुसार 16 से 18 जुलाई के बीच कश्मीर घाटी में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। इस दौरान मौसम गर्म और उमस भरा रहेगा।
जम्मू-कश्मीर में बारिश कब से शुरू होगी?
मौसम विभाग के अनुसार 19 जुलाई से जम्मू-कश्मीर में बारिश का दौर शुरू होगा। 20 से 23 जुलाई के बीच अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना है।
भूस्खलन और बाढ़ का खतरा किन इलाकों में है?
20 से 22 जुलाई के दौरान चेनाब घाटी, पीर पंजाल रेंज और कश्मीर डिवीजन के पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी धंसने का खतरा है। निचले इलाकों में जलभराव और हल्की बाढ़ की भी आशंका जताई गई है।
किसानों को मौसम विभाग ने क्या सलाह दी है?
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे 20 से 23 जुलाई के दौरान खेती से जुड़े सभी कार्य स्थगित रखें। भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यह एहतियाती कदम आवश्यक बताया गया है।
पर्यटकों और ट्रेकर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
मौसम विभाग ने यात्रियों, पर्यटकों और ट्रेकर्स को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा योजनाएँ मौसम की स्थिति के अनुसार बनाएँ। विशेष रूप से 19 से 23 जुलाई के बीच पहाड़ी मार्गों और नदी-तटीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की ज़रूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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