केरल विधानसभा चुनाव में 79.63 प्रतिशत मतदान: मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- 79.63 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया।
- महिलाओं का मतदान प्रतिशत 81.19 प्रतिशत रहा।
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पारदर्शिता पर जोर दिया।
- सर्विस वोटों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद।
- तिरुवनंतपुरम में अधिकारियों की भागीदारी सबसे अधिक रही।
तिरुवनंतपुरम, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल में 9 अप्रैल को आयोजित विधानसभा चुनाव में 79.63 प्रतिशत मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, और मतदान का स्तर 80 प्रतिशत के निकट पहुंच गया। यह आंकड़ा सोमवार को घोषित किया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू खेलकार ने आंकड़ों की घोषणा करते हुए बताया कि यह अनुमान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और पोस्टल बैलेट के माध्यम से प्राप्त वोटों को मिलाकर तैयार किया गया है।
9 अप्रैल को मतदान के दौरान जो प्रारंभिक आंकड़ा बताया गया था, वह 78.27 प्रतिशत था। ये आंकड़े पीठासीन अधिकारियों द्वारा संकलित डेटा पर आधारित हैं। जब लगभग 53 हजार सर्विस वोट पूरी तरह से जोड़े जाएंगे, तो अंतिम मतदान प्रतिशत में हल्की बढ़ोतरी की संभावना है।
सर्विस मतदाता अपने मूल स्थान पर अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं, भले ही वे अपनी नौकरी के कारण अलग स्थान पर रह रहे हों। खेलकार ने यह स्पष्ट किया कि डेटा जारी करने में कोई देरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि आंकड़ों की सटीकता और सत्यापन में केवल तीन दिन लगे।
इस चुनाव में महिला मतदाता सबसे ज्यादा सक्रिय रहीं, जिनका मतदान प्रतिशत 81.19 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 75.19 प्रतिशत था। ट्रांसजेंडर श्रेणी में मतदान 56.04 प्रतिशत रहा।
जरूरी सेवाओं में लगे कर्मचारियों के बीच मतदान का प्रतिशत 94.24 प्रतिशत रहा, जबकि चुनाव ड्यूटी पर तैनात 96.37 प्रतिशत लोगों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया।
चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए पिछले आंकड़ों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात लगभग 1,45,000 अधिकारियों में से 1,35,068 अधिकारियों ने वोट डाला, जबकि लगभग 9,932 अधिकारियों के वोटों का हिसाब अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाया है।
जिला-वार आंकड़े बताते हैं कि तिरुवनंतपुरम में अधिकारियों की भागीदारी सबसे ज्यादा (15,007) रही, जबकि वायनाड में यह सबसे कम (3,298) रही। ये आंकड़े 31 मार्च से 8 अप्रैल के बीच की अवधि से संबंधित हैं।
वोटिंग डेटा जारी करने में कथित देरी को लेकर विपक्ष के नेता वीडी सतीशन की आलोचना का जवाब देते हुए खेलकार ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी थी। उन्होंने बताया कि पोस्टल बैलेट राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जमा किए गए थे और बूथ-स्तर के आंकड़े सभी दलों के लिए उपलब्ध थे, जिससे किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की गुंजाइश नहीं थी।