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क्या केरल की सीपीआई-एम विधायक कनाथिल जमीला का 59 वर्ष की आयु में निधन हो गया?

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क्या केरल की सीपीआई-एम विधायक कनाथिल जमीला का 59 वर्ष की आयु में निधन हो गया?

सारांश

केरल की माकपा विधायक कनाथिल जमीला का निधन उनके समर्पण और नेतृत्व की कहानी को रेखांकित करता है। उन्होंने महिला आंदोलन को सशक्त बनाया और स्थानीय स्वशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

मुख्य बातें

महिला आंदोलन को सशक्त बनाने में जमीला का योगदान महत्वपूर्ण था।
स्थानीय स्वशासन के लिए उनका संघर्ष प्रेरणादायक था।
जमीला का राजनीतिक सफर एक गृहिणी से विधायक बनने तक का था।
उनका निधन समाज के लिए एक बड़ी क्षति है।
जमीला ने विकेंद्रीकरण के मुद्दे पर महत्वपूर्ण कार्य किए।

कोझिकोड, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। माकपा की प्रमुख नेता और कोयिलैंडी की वर्तमान विधायक कनाथिल जमीला का शनिवार को कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए जमीला को एक उत्साही और हंसमुख नेता बताया, जिन्होंने राज्य के महिला आंदोलन को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जमीला की आयु 59 वर्ष थी और वे कैंसर के उपचार से गुजर रही थीं। मुख्यमंत्री विजयन ने एक्स पर लिखा कि कोयिलैंडी से निर्वाचित प्रतिनिधि कॉमरेड कनाथिल जमीला का निधन अत्यंत दुखद है। एक उत्साही और हंसमुख जननेता के रूप में, उन्होंने एक मजबूत महिला आंदोलन के निर्माण की हमारी पार्टी की गौरवशाली विरासत को मूर्त रूप दिया। विभिन्न स्थानीय निकायों में उनके समर्पित हस्तक्षेप ने विकेंद्रीकृत शासन के हमारे मॉडल को समृद्ध किया। उनका निधन हमारी पार्टी, महिला आंदोलन और समग्र समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। मैं उनके परिवार, मित्रों और साथियों के साथ इस दुःख की घड़ी में शामिल हूं।

अपनी बीमारी के बावजूद जमीला लोगों के साथ घनिष्ठता से जुड़ी रहीं, और जब भी उनका स्वास्थ्य ठीक होता, वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेतीं।

2021 के चुनावों में केरल विधानसभा में प्रवेश करने वाली जमीला ने एक गृहिणी से केरल की सबसे सम्मानित जमीनी नेताओं में से एक बनने तक का एक उत्कृष्ट परिवर्तन प्रस्तुत किया।

कुट्टियाडी के ग्रामीण क्षेत्र में जन्मी, वे अपनी शादी के बाद थलक्कुलाथुर चली गईं।

राजनीति में उनका प्रवेश 1995 में अप्रत्याशित रूप से हुआ, जब उन्होंने थलक्कुलाथुर ग्राम पंचायत में चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। उसी वर्ष वे पंचायत अध्यक्ष बनीं, जिससे उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई।

उनका राजनीतिक विकास केरल के ऐतिहासिक जन योजना आंदोलन से गहराई से जुड़ा था, जिसने शासन का विकेंद्रीकरण किया और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाया। इस आंदोलन ने न केवल महिलाओं को स्थानीय विकास की योजना और क्रियान्वयन में शामिल किया, बल्कि सशक्त महिला नेताओं को विकसित करने में भी मदद की।

जमीला एक ऐसी शख्सियत के रूप में उभरीं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर जुड़ाव और सहभागी योजना के माध्यम से नेतृत्व का प्रदर्शन किया। सामुदायिक विकास में सक्रिय रूप से शामिल होकर, वे इस बात का प्रतीक बन गईं कि कैसे स्थानीय स्वशासन आम लोगों को प्रभावी जनप्रतिनिधियों में बदल सकता है।

पंचायत अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक-स्तरीय नेतृत्व और अंततः राज्य विधानसभा तक का उनका सफर केरल में विकेंद्रीकृत लोकतंत्र और महिलाओं की भागीदारी की शक्ति को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समस्त समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने महिलाओं के लिए आवाज उठाई और विकेंद्रीकरण के मुद्दे पर महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनाथिल जमीला का राजनीतिक करियर कब शुरू हुआ?
उनका राजनीतिक करियर 1995 में शुरू हुआ जब उन्होंने थलक्कुलाथुर ग्राम पंचायत में चुनाव लड़ा।
जमीला ने कौन से आंदोलन में योगदान दिया?
जमीला ने केरल के ऐतिहासिक जन योजना आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जमीला का स्वास्थ्य किस बीमारी से प्रभावित था?
जमीला कैंसर का इलाज करा रही थीं।
उन्होंने कब विधानसभा में प्रवेश किया?
उन्होंने 2021 के चुनावों में विधानसभा में प्रवेश किया।
उन्हें किस क्षेत्र से चुना गया था?
उन्हें कोयिलैंडी क्षेत्र से चुना गया था।
राष्ट्र प्रेस
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