खिजाडिया पक्षी अभयारण्य में ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क का 100% प्रजनन सफलता दर, गीर फाउंडेशन के शोध में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
जामनगर स्थित खिजाडिया पक्षी अभयारण्य ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (काली गर्दन वाले सारस) के प्रजनन के लिए देश के सबसे अनुकूल स्थलों में से एक के रूप में उभरा है — यह निष्कर्ष गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (गीर) फाउंडेशन के शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन में सामने आया है। जुलाई 2024 से मार्च 2025 के बीच किए गए इस अध्ययन में अभयारण्य के चारों सक्रिय घोंसलों से 100 प्रतिशत फ्लेजिंग सफलता दर दर्ज की गई — अर्थात एक भी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई और प्रत्येक घोंसले से दो-दो बच्चे सफलतापूर्वक निकले।
शोध का दायरा और पद्धति
यह अध्ययन पीयर-रिव्यूड अंतरराष्ट्रीय पत्रिका जर्नल ऑफ थ्रेटेंड टैक्सा में प्रकाशित हुआ है। गीर फाउंडेशन के वैज्ञानिकों — संदीप मुंजपरा, दिव्यराजसिंह जाडेजा, नीता सोलंकी, अमितकुमार नायक और बीपी पति — ने अभयारण्य के आठ मैनेजमेंट जोन में फैले 48 जियोरेफरेंस्ड सैंपलिंग प्वाइंट का उपयोग करते हुए 320 घंटे से अधिक के क्षेत्र अवलोकन के आंकड़े एकत्र किए। अध्ययन में घोंसले की स्थिति, प्रजनन पारिस्थितिकी, आवास-विशेषताओं और प्रजनन क्षमता का व्यापक मूल्यांकन किया गया।
गीर फाउंडेशन गुजरात वन विभाग के अधीन एक स्वायत्त शोध संस्था है। रामसर साइट के रूप में अधिसूचित खिजाडिया अभयारण्य दशकों से ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के महत्वपूर्ण आवास के रूप में पहचाना जाता रहा है, परंतु इसके प्रजनन व्यवहार पर विस्तृत वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण का अभाव था।
मुख्य निष्कर्ष: घोंसले, व्यवहार और जनसंख्या
अध्ययन के अनुसार, चारों सक्रिय घोंसले बबूल के पेड़ों पर जमीन से 3 से 4.5 मीटर की ऊंचाई पर बनाए गए थे। यह उल्लेखनीय है क्योंकि ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क सामान्यतः बरगद-पीपल जैसे बड़े वृक्षों को प्राथमिकता देता है; शोध से पता चला कि उपयुक्त बड़े वृक्षों की कमी होने पर यह प्रजाति बबूल जैसे अपेक्षाकृत छोटे पेड़ों पर भी सफलतापूर्वक घोंसला बना लेती है।
अध्ययन अवधि के दौरान अभयारण्य में ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क की कुल संख्या 21 से अधिक दर्ज की गई, जिनमें 5 नियमित रूप से दिखाई देने वाले गैर-प्रजनन वयस्क पक्षी भी शामिल थे। चार घोंसलों में कुल आठ बच्चे सफलतापूर्वक पले-बढ़े।
गीर फाउंडेशन के निदेशक बीपी पति (आईएफएस) ने कहा, 'शोधकर्ताओं ने व्यापक क्षेत्र सर्वेक्षण किया। प्रत्येक घोंसले में एक प्रजनन जोड़ी थी और प्रत्येक जोड़ी ने सफलतापूर्वक दो बच्चों का पालन-पोषण किया।'
प्रजनन चक्र और माता-पिता की भूमिका
शोधकर्ताओं ने दर्ज किया कि प्रजनन गतिविधि अगस्त-सितंबर में व्यवहार परिवर्तन के साथ आरंभ होती है, अक्टूबर की शुरुआत में घोंसला निर्माण होता है, अक्टूबर के अंत से नवंबर के प्रारंभ में अंडे फूटते हैं और दिसंबर तक बच्चों का गहन पालन-पोषण जारी रहता है।
गीर फाउंडेशन के वैज्ञानिक डॉ. संदीप मुंजपरा ने बताया, '89 निरीक्षण दौरों में वयस्क स्टॉर्क औसतन 62 मिनट तक घोंसले में उपस्थित रहे। भोजन के लिए की गई 94 प्रतिशत उड़ानों में एक माता-पिता ने घोंसले पर दूसरे का स्थान लिया — यह अत्यंत समन्वित माता-पिता देखभाल का प्रमाण है।' पूरी निगरानी अवधि में घोंसला छोड़ने, शिकारी हमले या बच्चों की मृत्यु की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई।
आवास की विशेषताएं और संरक्षण संकेत
उप निदेशक अमितकुमार नायक ने बताया कि सभी घोंसले 0.3 से 0.7 मीटर गहराई वाले उथले जल क्षेत्रों के निकट थे। इन स्थानों पर खुला पानी, जल सतह के ऊपर की वनस्पति और ऊंचे टीले जैसे भू-भाग मौजूद थे, जो मछली, उभयचर, क्रस्टेशियन और जलीय अकशेरुकी जीवों के रूप में पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराते हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने कहा, 'ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के सफल प्रजनन के लिए केवल पानी पर्याप्त नहीं है — उपयुक्त भोजन क्षेत्र, घोंसला बनाने योग्य पेड़, उथला पानी, वनस्पति और कम मानवीय हस्तक्षेप सभी आवश्यक हैं।' उन्होंने जोड़ा कि इन परिस्थितियों को बनाए रखना खिजाडिया में इस प्रजाति की प्रजनन आबादी की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने गीर फाउंडेशन की शोध टीम को बधाई देते हुए कहा, 'इन निष्कर्षों के आधार पर हम ब्लैक-नेक्ड सारस के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठा सकेंगे।' वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार खिजाडिया सहित राज्य की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
यह शोध न केवल खिजाडिया की पारिस्थितिक महत्ता को वैज्ञानिक आधार देता है, बल्कि भारत के अन्य आर्द्रभूमि क्षेत्रों में ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क संरक्षण के लिए एक व्यावहारिक आवास-प्रबंधन मॉडल भी प्रस्तुत करता है।