गोडावण संरक्षण में बड़ी छलांग: जैसलमेर प्रजनन केंद्रों में संख्या पहुँची 94, दो चूजे कृत्रिम गर्भाधान से
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के जैसलमेर स्थित कैप्टिव ब्रीडिंग केंद्रों में गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) की कुल संख्या 94 तक पहुँच गई है। तीन नए चूजों के जन्म से यह उपलब्धि हासिल हुई है, जिनमें से दो कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) के ज़रिये प्राप्त अंडों से निकले हैं। 17 जून 2026 को सामने आई यह जानकारी वर्ष 2018 से चल रहे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम की अब तक की सबसे उत्साहजनक उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
डेजर्ट नेशनल पार्क के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि तीन नए चूजों में से एक जंगली क्षेत्र से सुरक्षित रूप से एकत्र किए गए अंडे से जन्मा है, जबकि शेष दो कृत्रिम गर्भाधान से प्राप्त अंडों की उपज हैं। वन विभाग के अनुसार, प्रजनन मौसम अभी जारी है और आने वाले हफ्तों में संख्या में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
यह संरक्षण कार्यक्रम जैसलमेर जिले के दो केंद्रों — सुदासरी (साम के निकट) और रामदेवरा — में संचालित है। दोनों केंद्रों पर विशेषज्ञ 24 घंटे पक्षियों की निगरानी करते हैं, अंडों को कृत्रिम रूप से सेते हैं और वैज्ञानिक तकनीकों से चूजों का पालन-पोषण करते हैं।
कृत्रिम गर्भाधान और आनुवंशिक विविधता
अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग जंगली प्रजनन जोड़ों से अंडे एकत्र कर आनुवंशिक विविधता बढ़ाई जा रही है, जिससे भावी पीढ़ियों में स्वास्थ्य और अनुकूलन क्षमता बेहतर होगी। डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने कहा, 'इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे जेनेटिक विविधता बढ़ती है और एक स्वस्थ एवं मज़बूत आबादी तैयार करने में मदद मिलती है।'
यह तरीका जंगली वातावरण में अंडों को शिकारियों और अन्य खतरों से भी बचाता है — जो इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए एक बड़ी चुनौती रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए इसे दुनिया की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में से एक को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया। गौरतलब है कि गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी है और इसकी जंगली आबादी अनुमानतः 150 से भी कम रह गई है।
बुनियादी ढाँचे में निवेश
प्रजाति की सुरक्षा को और मज़बूत करने के लिए रामदेवरा के निकट ₹6.25 करोड़ की लागत से 64 मीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आवास क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर करना और पक्षियों को सड़क व बिजली लाइनों जैसे खतरों से बचाना है।
आगे की राह
वन अधिकारियों का कहना है कि यह लगातार बढ़ोतरी वैज्ञानिक संरक्षण उपायों की सफलता को दर्शाती है। यह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर गोडावण जैसी बड़ी पक्षी प्रजातियों पर जलवायु परिवर्तन और आवास नुकसान का गहरा दबाव है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार पक्षियों को भविष्य में जंगल में पुनः स्थापित करने की योजना इस कार्यक्रम का दीर्घकालिक लक्ष्य है।