14 सितंबर 2026
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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण: भूपेंद्र यादव ने कच्छ के नलिया में सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया

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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण: भूपेंद्र यादव ने कच्छ के नलिया में सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया

सारांश

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कच्छ के नलिया में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया। 11 वर्ग किमी घास-भूमि पुनर्स्थापन, 30 किमी बाड़ और अंडा-प्रतिस्थापन से जन्मे चूजे ने तीन माह की अहम अवधि पार की — गुजरात में दुर्लभ पक्षी संरक्षण की बड़ी उपलब्धि।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 14 सितंबर 2026 को कच्छ के नलिया में GIB आवास क्षेत्र का दौरा कर संरक्षण कार्यों की समीक्षा की।
GIB सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया गया और 33 नए गश्ती व बचाव वाहन वन सुरक्षा के लिए रवाना किए गए।
आक्रामक पौधे प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा से प्रभावित 11 वर्ग किमी घास के मैदान का पुनर्स्थापन हुआ; 15 वर्ग किमी क्षेत्र में 30 किमी लंबी शिकारी-रोधी बाड़ लगाई गई।
संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में अंडा-प्रतिस्थापन से जन्मे GIB चूजे ने जंगल में तीन महीने की महत्वपूर्ण अवधि सफलतापूर्वक पूरी की।
सयारा वन कवच परियोजना का उद्घाटन हुआ और दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के साथ वृक्षारोपण के लिए MOU पर हस्ताक्षर हुए।
जत सुमरा और दरबार समुदाय के साथ 'खातला सभा' में GIB संरक्षण में सामुदायिक सहयोग का आह्वान किया गया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 14 सितंबर 2026 को गुजरात के कच्छ जिले के नलिया स्थित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) आवास क्षेत्र का दौरा किया और गुजरात वन विभाग तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा संचालित संरक्षण एवं आवास प्रबंधन कार्यों की व्यापक समीक्षा की। इस दौरे के दौरान उन्होंने एक सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया और 33 नए गश्ती व बचाव वाहन भी रवाना किए।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री भूपेंद्र यादव ने नलिया में स्थानीय जत सुमरा और दरबार समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ 'खातला सभा' में संवाद किया और पक्षी संरक्षण प्रयासों में उनके सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने सामाजिक मंच एक्स पर भी इस दौरे की जानकारी साझा की।

यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण में समुदाय-आधारित भागीदारी को प्राथमिकता दे रहा है। उनके अनुसार, कच्छ के स्थानीय पशुपालक और कृषक समुदाय GIB संरक्षण की सफलता में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

ज़मीनी स्तर पर संरक्षण कार्य

अधिकारियों ने मंत्री को क्षेत्र में हुई प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी। इनमें आक्रामक पौधे प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा से प्रभावित लगभग 11 वर्ग किलोमीटर घास के मैदान का पुनर्स्थापन शामिल है। इसके अलावा 15 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 30 किलोमीटर लंबी शिकारी-रोधी बाड़ लगाई गई है।

संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के अंतर्गत एक उल्लेखनीय पहल भी सामने आई — जंगली मादा GIB के निषेचित न होने वाले अंडों की जगह संरक्षण केंद्र में विकसित स्वस्थ अंडे रखे गए। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रयास से जन्मा चूजा जंगल में शुरुआती तीन महीने की महत्वपूर्ण अवधि सफलतापूर्वक पार कर चुका है, जो गुजरात में इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

गश्ती वाहन और वन सुरक्षा

मंत्री ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए 33 नए गश्ती और बचाव वाहनों को रवाना किया। ये वाहन कच्छ वन परिक्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में वन सुरक्षा, वन्यजीव निगरानी, क्षेत्रीय गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया कार्यों में इस्तेमाल होंगे।

सयारा वन कवच और वृक्षारोपण परियोजना

दौरे के दूसरे चरण में भूपेंद्र यादव ने सयारा स्थित हरियालु ग्राम वृक्षारोपण परियोजना का भ्रमण किया। यहाँ उन्हें सयारा वन कवच पहल और उससे जुड़े मधुमक्खी पालन केंद्र की जानकारी दी गई। मंत्री ने स्वयं एक पौधा भी लगाया और सयारा वन कवच परियोजना का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर वृक्षारोपण गतिविधियों के लिए दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) का आदान-प्रदान भी हुआ, जिसके यादव साक्षी बने। यह MOU वन संरक्षण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक उदाहरण है।

आगे की राह

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड विश्व के सर्वाधिक संकटग्रस्त पक्षियों में से एक है और भारत में इसकी संख्या अत्यंत सीमित है। यह दौरा ऐसे समय में आया है जब वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक हस्तक्षेप को समन्वित करने की माँग लगातार बढ़ रही है। नलिया में हुई प्रगति — विशेषकर चूजे का तीन महीने की अवधि पार करना — भविष्य के संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नज़रअंदाज़ करती है कि GIB की आबादी पर सबसे बड़ा खतरा अभी भी बिजली की हवाई लाइनें और निवास स्थान का क्षरण है — जिनका समाधान इस दौरे में नहीं दिखा। समुदाय-भागीदारी का आह्वान सराहनीय है, पर जब तक ऊर्जा और वन नीतियों के बीच टकराव का ठोस समाधान नहीं होता, संरक्षण की यह तस्वीर अधूरी रहेगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) क्या है और यह क्यों संकटग्रस्त है?
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत का एक अत्यंत दुर्लभ और विशालकाय पक्षी है, जिसे IUCN ने 'क्रिटिकली एन्डेंजर्ड' श्रेणी में रखा है। निवास स्थान के क्षरण, शिकार और बिजली की हवाई लाइनों से टकराव के कारण इसकी संख्या भारत में बेहद सीमित रह गई है।
कच्छ के नलिया में GIB सॉफ्ट रिलीज सेंटर का क्या उद्देश्य है?
यह केंद्र GIB के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम का हिस्सा है, जहाँ जंगली मादाओं के निषेचित न होने वाले अंडों की जगह स्वस्थ अंडे रखकर चूजों को पाला जाता है और फिर उन्हें धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाता है। इस केंद्र का उद्घाटन 14 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया।
नलिया में GIB संरक्षण के तहत अब तक क्या प्रमुख कार्य हुए हैं?
आक्रामक पौधे प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा से प्रभावित 11 वर्ग किमी घास-भूमि का पुनर्स्थापन, 30 किमी लंबी शिकारी-रोधी बाड़ से 15 वर्ग किमी क्षेत्र की सुरक्षा और अंडा-प्रतिस्थापन से जन्मे चूजे द्वारा तीन माह की अहम अवधि सफलतापूर्वक पूरी करना प्रमुख उपलब्धियाँ हैं।
'खातला सभा' क्या है और इसमें स्थानीय समुदाय की क्या भूमिका है?
'खातला सभा' कच्छ क्षेत्र की एक पारंपरिक सामुदायिक बैठक है। मंत्री भूपेंद्र यादव ने जत सुमरा और दरबार समुदाय के प्रतिनिधियों से इस सभा में संवाद कर GIB संरक्षण में उनके सहयोग की अपील की, क्योंकि स्थानीय पशुपालक और कृषक इस दुर्लभ पक्षी के आवास क्षेत्र के रखवाले माने जाते हैं।
सयारा वन कवच परियोजना और दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के साथ MOU का क्या महत्व है?
सयारा वन कवच परियोजना कच्छ में वृक्षारोपण और वन संवर्धन की पहल है, जिसमें मधुमक्खी पालन केंद्र भी शामिल है। दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के साथ MOU वन संरक्षण में सार्वजनिक संस्थाओं की साझेदारी का उदाहरण है और इसका उद्घाटन 14 सितंबर 2026 को मंत्री यादव ने किया।
राष्ट्र प्रेस
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