31 जुलाई 2026
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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण: तीन नए चूजों के जन्म से कुल संख्या 94 पहुँची, चौथे वर्ष में 26 चूजे

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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण: तीन नए चूजों के जन्म से कुल संख्या 94 पहुँची, चौथे वर्ष में 26 चूजे

सारांश

विलुप्ति के कगार पर खड़े ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए अच्छी खबर — तीन नए चूजों के जन्म से संरक्षण केंद्र की कुल संख्या 94 पहुँची। चौथे वर्ष में 26 चूजे, कृत्रिम गर्भाधान और 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' तकनीक से राजस्थान में जंगली जन्म भी सफल।

मुख्य बातें

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण केंद्र में तीन नए चूजों के जन्म से कुल संख्या 94 हो गई है।
परियोजना के चौथे वर्ष में अब तक 26 चूजे जन्म ले चुके हैं — 18 कृत्रिम गर्भाधान, 4 प्राकृतिक प्रजनन और 4 जंगली अंडों से।
नए तीन चूजों में एक जंगली अंडे से और दो कैद में दिए अंडों से पैदा हुए।
राजस्थान में 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' तकनीक से जंगल में भी तीन चूजों का सफल जन्म हुआ।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान वन विभाग को बधाई दी; इस सीजन में और चूजों के जन्म की उम्मीद।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम को 14 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली, जब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने पुष्टि की कि पिछले कुछ दिनों में तीन नए चूजों का जन्म हुआ है। इन जन्मों के साथ राजस्थान स्थित संरक्षण केंद्र में जीआईबी की कुल संख्या बढ़कर 94 हो गई है, जो विलुप्ति के कगार पर खड़े इस दुर्लभ पक्षी के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।

नए चूजों का विवरण

मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी में बताया कि तीन नवजात चूजों में से एक जंगली क्षेत्र से एकत्र किए गए अंडे से निकला है, जबकि शेष दो चूजे कैद में दिए गए अंडों से पैदा हुए हैं। इन नए जन्मों के साथ परियोजना के चौथे वर्ष में अब तक जन्मे चूजों की कुल संख्या 26 हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस सीजन में अभी और चूजों के जन्म की संभावना बनी हुई है।

प्रजनन के तरीके और तकनीक

इस वर्ष जन्मे 26 चूजों में से 18 कृत्रिम गर्भाधान, 4 प्राकृतिक प्रजनन और 4 जंगली क्षेत्रों से एकत्र किए गए अंडों के माध्यम से पैदा हुए हैं। यह विविध प्रजनन दृष्टिकोण आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

यह ऐसे समय में आया है जब जीआईबी की जंगली आबादी को बिजली की तारों और शिकारियों से गंभीर खतरा बना हुआ है। जंगली क्षेत्रों से अंडे एकत्र करने के बदले राजस्थान में विशेष 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' तकनीक के ज़रिए जंगल में भी तीन चूजों का सफल जन्म कराया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पक्षियों की आनुवंशिक विविधता को बढ़ाना और शिकारियों से होने वाले खतरे को कम करना है।

परियोजना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इसी वर्ष मार्च 2026 में राजस्थान स्थित संरक्षण प्रजनन केंद्र में दो नए चूजों के जन्म के साथ परियोजना ने अपने चौथे वर्ष में प्रवेश किया था — जिनमें एक चूजा प्राकृतिक प्रजनन और दूसरा कृत्रिम गर्भाधान के ज़रिए पैदा हुआ था। यह परियोजना भारत सरकार और राजस्थान वन विभाग के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए राजस्थान वन विभाग के अधिकारियों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम प्रजनन तकनीकों और 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' के संयोजन से जंगली आबादी की पुनर्स्थापना की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, इस सीजन में अभी और चूजों के जन्म की उम्मीद है, जिससे संरक्षण केंद्र की कुल संख्या और बढ़ सकती है। जंगली आबादी की बहाली के लिए कैद में पले चूजों को भविष्य में नियंत्रित परिस्थितियों में प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना पर काम जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह संदर्भ में देखनी होगी — जीआईबी की अनुमानित जंगली आबादी अभी भी 150 से कम है, और कैद में पले पक्षियों को सफलतापूर्वक जंगल में पुनर्स्थापित करना अभी बाकी है। 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' तकनीक की सफलता एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बिजली की तारों और आवास नुकसान जैसे मूल खतरों पर नीतिगत कार्रवाई के बिना प्रजनन केंद्र की उपलब्धियाँ अधूरी रहेंगी। असली परीक्षा यह होगी कि कितने कैद में पले चूजे जंगल में जीवित रह पाते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम क्या है?
यह भारत सरकार और राजस्थान वन विभाग का संयुक्त कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य विलुप्ति के कगार पर खड़े जीआईबी पक्षी की आबादी को कृत्रिम गर्भाधान, प्राकृतिक प्रजनन और जंगली अंडों के संग्रह के ज़रिए बढ़ाना है। अब तक केंद्र में कुल 94 पक्षी हो गए हैं।
ताज़ा तीन चूजे कैसे पैदा हुए?
तीन नए चूजों में से एक जंगली क्षेत्र से एकत्र किए गए अंडे से निकला है, जबकि दो चूजे कैद में दिए गए अंडों से पैदा हुए हैं। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने साझा की।
'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' तकनीक क्या है?
यह एक विशेष संरक्षण तकनीक है जिसके तहत जंगली क्षेत्रों से अंडे एकत्र करने के बदले राजस्थान में जंगल में ही चूजों का सफल जन्म कराया जाता है। इसका उद्देश्य पक्षियों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाना और शिकारियों से होने वाले खतरे को कम करना है।
इस वर्ष कुल कितने चूजे जन्मे और किस तरीके से?
परियोजना के चौथे वर्ष में अब तक 26 चूजे जन्मे हैं — 18 कृत्रिम गर्भाधान, 4 प्राकृतिक प्रजनन और 4 जंगली क्षेत्रों से एकत्र अंडों के माध्यम से। अधिकारियों के अनुसार इस सीजन में और जन्म अपेक्षित हैं।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण की ज़रूरत क्यों है?
जीआईबी भारत का एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी है, जिसकी जंगली आबादी अत्यंत कम हो गई है। बिजली की तारों से टकराव, आवास का नुकसान और शिकार इसके प्रमुख खतरे हैं। संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम इसकी आबादी बहाल करने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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