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गिर में ६० साल बाद लौटा इंडियन ग्रे हॉर्नबिल, घोंसले बना रहे और प्रजनन भी कर रहे हैं

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गिर में ६० साल बाद लौटा इंडियन ग्रे हॉर्नबिल, घोंसले बना रहे और प्रजनन भी कर रहे हैं

सारांश

छह दशक की चुप्पी के बाद गिर के जंगल में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल की आवाज़ फिर गूंज रही है। 2021 से शुरू हुए री-इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट के तहत 40 पक्षी छोड़े गए, जो अब घोंसले बना रहे हैं और प्रजनन कर रहे हैं — अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध ने इस सफलता को वैज्ञानिक मान्यता दी है।

मुख्य बातें

गिर जंगल में 1950-60 के दशक में विलुप्त हुए इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को 2021 में अरावली से लाकर पुनः बसाया गया।
दो चरणों में कुल 40 पक्षी छोड़े गए — 2021-22 में 28 और 2023 में 12 ।
11 नर पक्षियों में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए; विचरण क्षेत्र 61 वर्ग किमी से घटकर 5.7 वर्ग किमी हुआ।
पहले वर्ष में एक जोड़े ने और दूसरे वर्ष में तीन जोड़ों ने सफलतापूर्वक घोंसले बनाए और प्रजनन किया।
अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल 'बर्ड्स' में इस परियोजना पर शोध पत्र प्रकाशित हुआ।
ये पक्षी बीज-प्रसार के ज़रिए गिर के पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक पुनर्जीवन में सहायक हैं।

गुजरात के गिर जंगल में लगभग छह दशक पहले विलुप्त हो चुके इंडियन ग्रे हॉर्नबिल (भारतीय धूसर धनेश) की चहचहाहट एक बार फिर गूंज रही है। गुजरात वन विभाग के 'इंडियन ग्रे हॉर्नबिल री-इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट' को ऐतिहासिक सफलता मिली है — 2021 में अरावली के जंगलों से लाकर गिर में छोड़े गए ये पक्षी अब न केवल यहाँ स्थायी रूप से बस गए हैं, बल्कि घोंसले भी बना रहे हैं और प्रजनन भी कर रहे हैं।

परियोजना की पृष्ठभूमि और लक्ष्य

1950 और 1960 के दशक में गिर के जंगलों से गायब हो चुके इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को वापस लाने की पहल 2021 में शुरू हुई। गुजरात के अरावली के जंगलों से इन पक्षियों को लाकर गिर में छोड़ा गया। जूनागढ़ वन सर्कल के वन संरक्षक और इस अध्ययन के सह-लेखक मोहन राम के अनुसार, परियोजना के तहत दो चरणों में कुल 40 इंडियन ग्रे हॉर्नबिल गिर के जंगलों में छोड़े गए — 2021 और 2022 में 28 पक्षी, और 2023 में 12 और पक्षी

छोड़े गए पक्षियों में से 11 नर पक्षियों में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए, जिससे वैज्ञानिक कई वर्षों तक उनकी गतिविधियों, रहने की जगहों और प्रजनन व्यवहार पर नज़र रख सके।

सैटेलाइट ट्रैकिंग से मिले अहम संकेत

सैटेलाइट ट्रैकिंग के आँकड़ों के अनुसार, नए छोड़े गए पक्षियों ने शुरुआत में अनजान माहौल में व्यापक भ्रमण किया। पहले कुछ महीनों में उनका औसत विचरण क्षेत्र 61 वर्ग किलोमीटर था, जो परिचित होने के बाद घटकर मात्र 5.7 वर्ग किलोमीटर रह गया।

इसी प्रकार, शुरुआती खोजबीन के दौरान उनकी औसत दैनिक उड़ान का दायरा 4.3 किलोमीटर था, जो स्थायी होने के बाद घटकर 1.4 किलोमीटर रह गया। यह आँकड़ा गिर के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ इन पक्षियों के सफल अनुकूलन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

प्रजनन की सफलता और पारिस्थितिक महत्व

गुजरात वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने बताया कि इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को गिर में छोड़ने के बाद पहले ही वर्ष में एक जोड़े ने सफलतापूर्वक प्रजनन किया, जबकि दूसरे वर्ष में तीन और प्रजनन करने वाले जोड़ों ने घोंसले बनाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ये पक्षी वृक्षों के बीजों को लंबी दूरी तक फैलाने में माहिर होते हैं, जो पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। फलदार पेड़ों के बीजों को दूर-दूर तक पहुँचाकर ये पक्षी जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जीवन में सहायक सिद्ध होते हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. जयपाल सिंह के अनुसार, 1965 में गिर वन्यजीव अभयारण्य और 1975 में गिर राष्ट्रीय उद्यान घोषित होने के बाद प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में हुए सुधारों ने इस प्रजाति को वापस लाने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाईं।

अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र में मान्यता

गौरतलब है कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल 'बर्ड्स' में 'रीइंट्रोडक्शन ऑफ इंडियन ग्रे हॉर्नबिल्स इन गिर, इंडिया: इनसाइट्स इन टू रेंजिंग, हैबिटेट यूज, नेस्टिंग एंड बिहेवियरल पैटर्न' शीर्षक से एक शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। इसमें गुजरात वन विभाग और संबद्ध संस्थाओं के प्रयासों का पहली बार व्यापक वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत किया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में वन विभाग वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण आयाम गढ़ रहा है। उन्होंने इंडियन ग्रे हॉर्नबिल के री-इंट्रोडक्शन की सफलता को एक ऐतिहासिक घटना बताया।

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि गुजरात का वन्यजीव संरक्षण मॉडल दुनिया को प्राकृतिक विरासत को बचाने का रास्ता दिखाता है। यह परियोजना उन प्रजातियों के पुनर्वास के लिए एक मानक बन सकती है जो मानवीय हस्तक्षेप के चलते अपने मूल आवास खो चुकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

40 पक्षियों की एक छोटी आबादी को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ मानना अभी जल्दबाज़ी होगी — आनुवंशिक विविधता और शिकारियों से सुरक्षा जैसे सवाल अभी खुले हैं। अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र परियोजना को वैश्विक विश्वसनीयता देता है, लेकिन असली कसौटी अगले दशक में इस आबादी की स्वतंत्र वृद्धि होगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडियन ग्रे हॉर्नबिल री-इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट क्या है?
यह गुजरात वन विभाग की परियोजना है जिसके तहत 1950-60 के दशक में गिर जंगल से विलुप्त हो चुके इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को अरावली के जंगलों से लाकर 2021 में गिर में पुनः बसाया गया। परियोजना के तहत अब तक 40 पक्षी छोड़े जा चुके हैं और वे सफलतापूर्वक प्रजनन कर रहे हैं।
गिर में कितने इंडियन ग्रे हॉर्नबिल छोड़े गए और कब?
दो चरणों में कुल 40 पक्षी छोड़े गए — 2021 और 2022 में 28 पक्षी, और 2023 में 12 और पक्षी। इनमें से 11 नर पक्षियों में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए।
इंडियन ग्रे हॉर्नबिल पारिस्थितिकी के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
ये पक्षी फलदार पेड़ों के बीजों को लंबी दूरी तक फैलाने में माहिर होते हैं, जिससे जंगलों का प्राकृतिक पुनर्जीवन होता है। इनका बीज-प्रसार व्यवहार गिर के पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्या इस परियोजना को वैज्ञानिक मान्यता मिली है?
हाँ, अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल 'बर्ड्स' में इस परियोजना पर एक विस्तृत शोध पत्र प्रकाशित हुआ है, जिसमें पक्षियों के विचरण, आवास उपयोग, घोंसला निर्माण और व्यवहार का पहली बार व्यापक वैज्ञानिक आकलन किया गया है।
सैटेलाइट ट्रैकिंग से पक्षियों के अनुकूलन के बारे में क्या पता चला?
ट्रैकिंग आँकड़ों के अनुसार, छोड़े जाने के बाद पक्षियों का विचरण क्षेत्र 61 वर्ग किलोमीटर से घटकर 5.7 वर्ग किलोमीटर रह गया और दैनिक उड़ान का दायरा 4.3 किलोमीटर से 1.4 किलोमीटर हो गया, जो गिर के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ उनके सफल अनुकूलन को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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