काले हिरण की वापसी: छत्तीसगढ़ के मैदानों में लौटी जैव विविधता, PM मोदी ने 'मन की बात' में सराहा संरक्षण मॉडल

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काले हिरण की वापसी: छत्तीसगढ़ के मैदानों में लौटी जैव विविधता, PM मोदी ने 'मन की बात' में सराहा संरक्षण मॉडल

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ के बरनावापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों की सफल वापसी का जिक्र किया। 2017 में स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी यह प्रजाति अब फिर मैदानों में दौड़ रही है। 'हाथी मित्र दल' जैसे सामुदायिक प्रयासों की भी पीएम ने प्रशंसा की।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल को 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ में काले हिरण की वापसी की जानकारी दी।
  • 2017 में स्थानीय स्तर पर विलुप्त घोषित काले हिरण अब बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में फिर से विचरण कर रहे हैं।
  • नई दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर और बिलासपुर के कानन पेंदारी चिड़ियाघर से हिरणों को स्थानांतरित कर पाँच वर्षीय पुनरुद्धार कार्यक्रम चलाया गया।
  • गुजरात में राजस्थान के अंडों से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजों का सफल प्रजनन हुआ।
  • 'हाथी मित्र दल' ने ड्रोन और व्हाट्सएप अलर्ट से मानव-हाथी संघर्ष में उल्लेखनीय कमी लाई है।
  • छत्तीसगढ़ का सामुदायिक संरक्षण मॉडल अब देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ में काले हिरण (Blackbuck) की ऐतिहासिक वापसी का उल्लेख किया और कहा कि मध्य भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में यह एक बड़ी उपलब्धि है। 2017 में स्थानीय स्तर पर विलुप्त घोषित हो चुके ये सुंदर मृग आज एक बार फिर राज्य के खुले मैदानों में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।

पाँच वर्षों की मेहनत — बरनावापारा मॉडल की सफलता

बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में संचालित पाँच वर्षीय पुनरुद्धार कार्यक्रम इस सफलता की नींव बना। छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग ने एक सुनियोजित रणनीतिक पुनर्प्रवेश योजना तैयार की, जिसके तहत नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान और बिलासपुर के कानन पेंदारी चिड़ियाघर से काले हिरणों को स्थानांतरित किया गया।

यह कोई साधारण प्रयास नहीं था। वन अधिकारियों ने हिरणों के लिए अनुकूल आवास तैयार किए, शिकार विरोधी गश्त तेज की और स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया। आज इस परियोजना को देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ एक सफल रोल मॉडल के रूप में देख रहे हैं।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए भी जगी नई उम्मीद

पीएम मोदी ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) — जो विश्व की सबसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में से एक है — के संरक्षण पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उन्नत प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से इस प्रजाति के भविष्य को लेकर नई संभावनाएं उभरी हैं।

हाल की उपलब्धियों में गुजरात में एक अंतरराज्यीय पहल के तहत चूजों का सफल प्रजनन शामिल है। इस कार्यक्रम में राजस्थान से अंडे लाकर गुजरात में स्थानीय आबादी को पुनर्जीवित करने की कोशिश की गई — और यह प्रयोग सफल रहा।

हाथी मित्र दल — मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का नया अध्याय

पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने वाले सामुदायिक-संचालित मॉडल की भी सराहना की। स्थानीय ग्रामीणों ने 'हाथी मित्र दल' नामक स्वयंसेवी टीमें गठित की हैं, जो हाथियों की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखती हैं।

ये दल ड्रोन तकनीक और व्हाट्सएप अलर्ट के माध्यम से अपने गाँवों को समय पर चेतावनी देते हैं। इससे न केवल फसलों की सुरक्षा हो रही है, बल्कि मानव जीवन भी बचाया जा रहा है। यह मॉडल साबित करता है कि जब समुदाय और प्रशासन मिलकर काम करें, तो संघर्ष को सहयोग में बदला जा सकता है।

संरक्षण और विकास का संतुलन — भारत के लिए बड़ा सबक

छत्तीसगढ़ का यह अनुभव एक व्यापक संदेश देता है। स्थानीय नागरिकों को पर्यावरण के प्राथमिक संरक्षक के रूप में शामिल करने की यह रणनीति न केवल जैव विविधता को बचाती है, बल्कि विकासात्मक जरूरतों और प्रकृति संरक्षण के बीच एक टिकाऊ संतुलन भी स्थापित करती है।

गौरतलब है कि भारत में Project Tiger और Project Elephant जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ-साथ राज्य स्तरीय सामुदायिक प्रयास वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बरनावापारा और हाथी मित्र दल जैसे मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए।

आने वाले वर्षों में यदि इस तरह के सामुदायिक संरक्षण मॉडलों को केंद्र सरकार की नीतिगत ढाँचे में और मजबूती से शामिल किया जाए, तो भारत वैश्विक जैव विविधता संरक्षण में एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

Point of View

चिड़ियाघर नेटवर्क और स्थानीय समाज एकजुट हों, तो विलुप्ति की कगार से प्रजातियाँ वापस लाई जा सकती हैं। हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि देश के उन हजारों गाँवों में जहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष में हर साल दर्जनों जानें जाती हैं, क्या 'हाथी मित्र दल' जैसे मॉडल को पर्याप्त संसाधन और संस्थागत समर्थन मिल पाएगा? असली परीक्षा नीति की घोषणा में नहीं, उसके जमीनी क्रियान्वयन में है।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

छत्तीसगढ़ में काले हिरण कब और कैसे वापस लाए गए?
2017 में स्थानीय स्तर पर विलुप्त घोषित होने के बाद छत्तीसगढ़ वन विभाग ने बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में पाँच वर्षीय पुनरुद्धार कार्यक्रम शुरू किया। नई दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर और बिलासपुर के कानन पेंदारी चिड़ियाघर से काले हिरणों को यहाँ स्थानांतरित किया गया।
पीएम मोदी ने 'मन की बात' में काले हिरण का जिक्र क्यों किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ के सफल वन्यजीव संरक्षण मॉडल को देशभर के सामने उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इसे मध्य भारत में जैव विविधता पुनरुद्धार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
हाथी मित्र दल क्या है और यह कैसे काम करता है?
हाथी मित्र दल स्थानीय ग्रामीणों की एक स्वयंसेवी टीम है जो हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखती है। ये दल ड्रोन और व्हाट्सएप अलर्ट के जरिए गाँवों को समय पर चेतावनी देते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आई है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में क्या प्रगति हुई है?
गुजरात में एक अंतरराज्यीय पहल के तहत राजस्थान से अंडे लाकर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजों का सफल प्रजनन किया गया है। यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य कहाँ स्थित है?
बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है और यह काले हिरण पुनरुद्धार कार्यक्रम का केंद्र रहा है। यह अभ्यारण्य अब देश में सामुदायिक वन्यजीव संरक्षण के एक सफल मॉडल के रूप में पहचाना जाता है।
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