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खैबर पख्तूनख्वा में भारी बारिश और आंधी-तूफान का कहर, 7 की मौत और 8 घायल

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खैबर पख्तूनख्वा में भारी बारिश और आंधी-तूफान का कहर, 7 की मौत और 8 घायल

सारांश

खैबर पख्तूनख्वा में 19 जून को आए भीषण तूफान ने 7 लोगों की जान ली और 8 को घायल कर दिया। NDMA की पूर्व चेतावनी के बावजूद पहाड़पुर से ओरकजई तक तबाही हुई — यह पाकिस्तान की आपदा तैयारी और ज़मीनी प्रतिक्रिया के बीच की खाई को एक बार फिर उजागर करता है।

मुख्य बातें

खैबर पख्तूनख्वा में 19 जून को भारी बारिश और आंधी-तूफान से 7 लोगों की मौत और 8 घायल ।
डेरा इस्माइल खान के पहाड़पुर में घरों-दुकानों की छतें और दीवारें गिरीं; 2 युवक और जंदर गाँव की 2 महिलाएँ मृतकों में शामिल।
ओरकजई ट्राइबल जिले के सैम फिरोजखेल में बिजली गिरने से 3 की मौत , 4 घायल ।
बाजौर ट्राइबल जिले की वार मामुंड तहसील में सरकारी स्कूल की दीवार गिरी, बिजली सप्लाई ठप।
NDMA ने पहले ही अलर्ट जारी किया था, फिर भी जमीनी स्तर पर तैयारी और प्रतिक्रिया के बीच की खाई उजागर हुई।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 19 जून को भारी बारिश और आंधी-तूफान ने भीषण तबाही मचाई, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। डेरा इस्माइल खान के पहाड़पुर शहर से लेकर ओरकजई ट्राइबल जिले तक, तूफान ने घरों, दुकानों और बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुकसान पहुँचाया।

मुख्य घटनाक्रम

डेरा इस्माइल खान के पहाड़पुर शहर और आसपास के गाँवों में गुरुवार को तेज़ तूफान और मूसलाधार बारिश के बाद कई घरों और दुकानों की छतें और दीवारें ढह गईं। रिपोर्टों के अनुसार, बचाव दल और स्थानीय लोगों ने मलबे में दबे पीड़ितों को निकालने के लिए राहत अभियान चलाया और घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में पहुँचाया।

मृतकों में पहाड़पुर के दो युवक और जंदर गाँव की दो महिलाएँ शामिल हैं। एक घायल की पहचान अहमद अली के रूप में हुई है, जबकि अन्य घायलों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

इसी दिन ओरकजई ट्राइबल जिले के निचले ओरकजई के सैम फिरोजखेल इलाके में बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। रेस्क्यू 1122 के एक अधिकारी ने इस घटना की पुष्टि की।

बुनियादी ढाँचे को नुकसान

तेज़ हवाओं के कारण इलाके में कई पेड़ उखड़ गए और घरों व कार्यालयों पर लगे सोलर पैनल क्षतिग्रस्त हो गए। एक उपनगरीय इलाके में एक बाउंड्री वॉल गिरने से बाड़े में बँधे कई जानवरों की भी मौत हो गई। आंधी-तूफान के कारण पहाड़पुर और आसपास के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। खतरनाक हालात और बुनियादी ढाँचे को हुए व्यापक नुकसान की वजह से मरम्मत कार्य तत्काल शुरू नहीं हो सका।

बाजौर ट्राइबल जिले की वार मामुंड तहसील में तूफान के कारण एक सरकारी स्कूल की दीवार ढह गई और बिजली सप्लाई बाधित हो गई।

चेतावनी और तैयारी के बीच का अंतर

गौरतलब है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने बारिश और आंधी-तूफान के इस दौर का पहले ही अनुमान लगा लिया था और कई इलाकों को अलर्ट पर रखा था। रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को 12 से 17 अप्रैल के बीच संवेदनशील क्षेत्रों में चिह्नित किया गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब चित्राल, स्वात, लाहौर और रावलपिंडी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को भी कमजोर क्षेत्रों की सूची में रखा गया था। चेतावनियाँ समय पर और जिलेवार जारी की गई थीं, फिर भी जमीनी स्तर पर जो नुकसान हुआ, वह तैयारी और वास्तविक प्रतिक्रिया के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विश्लेषकों के अनुसार, मौसमी तूफानों से निपटने का पाकिस्तान का अनुभव शासन-प्रशासन की एक व्यापक चुनौती को दर्शाता है। एक विश्लेषण रिपोर्ट में कहा गया है: 'मौसम पूर्वानुमान पहले की तुलना में अधिक सटीक हो गए हैं, जोखिमों को अच्छी तरह समझा जा चुका है और संस्थागत ढाँचे भी मौजूद हैं — इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर परिणामों में बहुत अधिक बदलाव देखने को नहीं मिलता।'

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एजेंसियाँ चेतावनी तो जारी करती हैं, लेकिन समय पर और असरदार कार्रवाई नहीं होती — यह एक ऐसा चक्र है जो बिना किसी बड़े बदलाव के बार-बार दोहराया जाता है।

आगे क्या

पाकिस्तान में मानसून-पूर्व मौसम की यह तबाही एक बार फिर देश की आपदा प्रबंधन क्षमताओं पर सवाल खड़े करती है। NDMA की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है, लेकिन बुनियादी ढाँचे की मरम्मत और विद्युत आपूर्ति बहाली में अभी समय लग सकता है। आलोचकों का कहना है कि जब तक चेतावनी प्रणाली को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई से नहीं जोड़ा जाता, तब तक ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इलाके चिह्नित थे और संस्थागत ढाँचा मौजूद था। फिर भी सात लोगों को जान गँवानी पड़ी। यह पाकिस्तान की उस पुरानी समस्या को रेखांकित करता है जिसमें सूचना तंत्र तो मजबूत होता जा रहा है, लेकिन कार्रवाई की क्षमता वहीं ठहरी हुई है। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे तूफानों की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, और अगर चेतावनी को ज़मीनी तैयारी में नहीं बदला गया, तो हर मानसून यही चक्र दोहराएगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खैबर पख्तूनख्वा में 19 जून को आए तूफान में कितने लोगों की मौत हुई?
19 जून को खैबर पख्तूनख्वा में भारी बारिश और आंधी-तूफान से कुल 7 लोगों की मौत हुई और 8 अन्य घायल हो गए। मृतकों में पहाड़पुर के 2 युवक, जंदर गाँव की 2 महिलाएँ और ओरकजई ट्राइबल जिले में बिजली गिरने से मारे गए 3 लोग शामिल हैं।
पाकिस्तान में तूफान से सबसे अधिक प्रभावित इलाके कौन-से रहे?
डेरा इस्माइल खान का पहाड़पुर शहर और आसपास के गाँव, ओरकजई ट्राइबल जिले का सैम फिरोजखेल इलाका और बाजौर ट्राइबल जिले की वार मामुंड तहसील सबसे अधिक प्रभावित रहे। इन इलाकों में घर, दुकानें, स्कूल की दीवारें गिरीं और बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
क्या NDMA ने इस तूफान की पहले से चेतावनी दी थी?
हाँ, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने बारिश और आंधी-तूफान के इस दौर का पहले ही अनुमान लगा लिया था। पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को 12 से 17 अप्रैल के बीच संवेदनशील क्षेत्रों में चिह्नित किया गया था, और जिलेवार अलर्ट भी जारी किए गए थे।
ओरकजई में बिजली गिरने की घटना में क्या हुआ?
ओरकजई ट्राइबल जिले के निचले ओरकजई के सैम फिरोजखेल इलाके में गुरुवार को बिजली गिरने से 3 लोगों की मौत हो गई और 4 अन्य घायल हो गए। रेस्क्यू 1122 के एक अधिकारी ने इस घटना की पुष्टि की।
पाकिस्तान में बार-बार आने वाले तूफानों से निपटने में क्या कमी है?
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली तो बेहतर हुई है, लेकिन चेतावनी को प्रभावी ज़मीनी कार्रवाई में बदलने की क्षमता अभी भी कमज़ोर है। एजेंसियाँ अलर्ट जारी करती हैं, लेकिन समन्वित और समयबद्ध राहत कार्रवाई अक्सर पीछे रह जाती है।
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