कृषि मेले में भाग लेने से किसान पुत्र को रोका: जीतू पटवारी का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- कृषि मेले का आयोजन किसानों के लिए नई तकनीकें साझा करने के लिए किया गया है।
- जीतू पटवारी का आरोप है कि उन्हें प्रशासन द्वारा रोका गया।
- किसान समस्याओं का समाधान सरकार की जिम्मेदारी है।
- किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है।
- किसानों की आवाज़ को दबाना उचित नहीं है।
भोपाल, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक कृषि मेला आयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने यह आरोप लगाया है कि वे स्वयं किसान पुत्र हैं और मेले में भाग लेने के इच्छुक थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया।
जीतू पटवारी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे हाल ही में विदिशा गए थे, जहाँ उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। किसानों ने बताया कि गेहूं की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी समय पर नहीं हुई, जिसके कारण लगभग 20 लाख क्विंटल गेहूं को 2000 रुपये से कम कीमत पर बेचना पड़ा। वर्तमान में मंडियों में गेहूं 2200–2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है, जिससे हर किसान को लगभग 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विदिशा में उन्होंने रायसेन के कृषि मेले में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की थी। यह मेला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आयोजित हो रहा है, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित कई मंत्री और अधिकारी भाग ले रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के मुद्दों को लेकर सजग है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी समस्याओं पर ध्यान दे।
उन्होंने कहा, "जब देश और प्रदेश के किसानों के लिए इतना बड़ा कृषि मेला आयोजित हो रहा है, तो यह स्वाभाविक है कि वहां नई तकनीक और आधुनिक खेती की जानकारी मिले। मैं स्वयं किसान हूं और मेरी भी इच्छा है कि मैं मेले में जाकर इन नई तकनीकों को देखूं और किसानों के बीच उसका प्रचार-प्रसार करूं।"
उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर मेले में शामिल होने की अनुमति मांगी थी और यह भी स्पष्ट किया था कि वे किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं चाहते। इसके बावजूद, उन्हें संकेत दिए जा रहे हैं कि वे मेले में न जाएं। कलेक्टर और अधिकारियों से बात की गई, लेकिन आज एडीजी स्तर के अधिकारी ने फोन कर कहा कि सरकार चाहती है कि मैं वहाँ न जाऊं। आखिर मुझसे डर किस बात का है?
उन्होंने कहा कि वे अकेले मेले में जाना चाहते हैं और किसी भी प्रकार की भीड़ या अव्यवस्था पैदा नहीं करेंगे। इसके बावजूद, रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने मुझे सर्किट हाउस आने को कहा है और कहा कि परिस्थितियों के अनुसार सूचित करेंगे, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट समय नहीं दिया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि विपक्ष का काम केवल आलोचना नहीं, बल्कि सकारात्मक सुझाव देना और नवाचार को बढ़ावा देना भी है। हम कृषि मेले में जाकर आधुनिक तकनीकों को समझना चाहते हैं, ताकि किसानों की आय बढ़े और उत्पादन में वृद्धि हो। प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है, लेकिन एक किसान के बेटे को ही कृषि मेले में जाने से रोका जा रहा है। यह सरकार की मंशा और नीतियों पर बड़ा सवाल है।