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केके: जिनकी आवाज़ में बसता था हर दिल का अफ़साना, प्यार पाने के लिए की थी सेल्समैन की नौकरी

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केके: जिनकी आवाज़ में बसता था हर दिल का अफ़साना, प्यार पाने के लिए की थी सेल्समैन की नौकरी

सारांश

बिना गॉडफादर के मुंबई फतह करने वाले केके ने पहले प्यार पाने के लिए सेल्समैन की नौकरी की, फिर 'तड़प तड़प' से करोड़ों दिल जीते। नौ भाषाओं में गाने वाला यह फ़नकार 53 की उम्र में मंच पर ही हमेशा के लिए खामोश हो गया — पर उसकी आवाज़ आज भी गूंजती है।

मुख्य बातें

केके (कृष्ण कुमार कुन्नथ) का जन्म 23 अगस्त 1968 को नई दिल्ली में हुआ; परिवार मलयाली मूल का था।
स्नातक के बाद छह से आठ महीने सेल्समैन की नौकरी की — वजह थी प्यार और लड़की के परिवार को रोज़गार दिखाना।
बॉलीवुड में पहला ब्रेक 'माचिस' (1996) से मिला; बड़ी पहचान 'हम दिल दे चुके सनम' (1999) के 'तड़प तड़प' से।
हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती — नौ भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए।
31 मई 2022 को कोलकाता में लाइव कॉन्सर्ट के दौरान हार्टअटैक से निधन; आयु 53 वर्ष ।

दिवंगत गायक केके — पूरा नाम कृष्ण कुमार कुन्नथ — की आवाज़ कॉलेज के गलियारों से लेकर पहली मोहब्बत के एहसास तक, हर जगह गूंजती थी। 23 अगस्त 1968 को नई दिल्ली में जन्मे केके का परिवार मलयाली मूल का था, और उनकी आवाज़ ने आगे चलकर पूरे भारत के संगीत-प्रेमियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। 31 मई 2022 को महज़ 53 वर्ष की आयु में उनके जाने के बाद भी, उनके गाने आज भी उतनी ही शिद्दत से सुने जाते हैं।

शुरुआती जीवन और संगीत की नींव

केके ने सेंट मैरी स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और किरोड़ीमल कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। बताया जाता है कि उन्होंने महज़ दो वर्ष की आयु से ही गाना शुरू कर दिया था और कॉलेज के रॉक बैंड का हिस्सा भी रहे। किशोर कुमार की गायकी और आरडी बर्मन का संगीत उन पर गहरा प्रभाव डालता था।

करियर की पहली चमक उन्हें तब मिली जब गायक-संगीतकार लेस्ली लुईस ने उन्हें यूटीवी के लिए एक मिनट का जिंगल गाने का अवसर दिया। इसके बाद केके ने जिंगल्स की दुनिया में खुद को स्थापित किया और हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री का दरवाज़ा खटखटाने से पहले अनेक विज्ञापन जिंगल्स रिकॉर्ड किए।

प्यार के लिए बनी सेल्समैन की नौकरी

स्नातक के बाद के उनके जीवन का एक दिलचस्प किस्सा बताया जाता है। ग्रेजुएशन पूरी होने के बाद केके ने छह से आठ महीने तक सेल्समैन की नौकरी की। यह नौकरी उन्होंने इसलिए की क्योंकि वे एक लड़की से प्यार करते थे और उसके परिवार को यह दिखाना था कि वे कमाते हैं। हालाँकि, कुछ महीनों बाद ही केके को एहसास हो गया कि सेल्समैन बने रहना उनकी नियति नहीं है — उनकी मंज़िल संगीत में थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और बिना किसी गॉडफादर के, अपने दम पर संगीतकारों के दरवाज़े खटखटाने शुरू किए।

बॉलीवुड में पहचान और मील के पत्थर

केके को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका संगीतकार विशाल भारद्वाज ने दिया, जब उन्होंने गुलज़ार निर्देशित फ़िल्म 'माचिस' (1996) के लिए उनसे 'छोड़ आए हम' गवाया। लेकिन असली पहचान संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'हम दिल दे चुके सनम' (1999) के गाने 'तड़प तड़प' से मिली, जो श्रोताओं के दिल की गहराइयों तक उतर गया।

1999 में जब भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के लिए रवाना हो रही थी, तब केके ने टीम के लिए 'जोश ऑफ इंडिया' गाया, जिसने खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों में जोश भर दिया।

आवाज़ की अनोखी कशिश

केके के गानों की सबसे बड़ी खासियत उनका ताज़ापन और जोश था। जहाँ बॉलीवुड में एक के बाद एक रोमांटिक गाने आ रहे थे, वहीं केके के शुरुआती हिट गाने दोस्ती, जीवन के उतार-चढ़ाव और पुरानी यादों के खट्टे-मीठे एहसासों को बयाँ करते थे। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती — कुल नौ भाषाओं की फ़िल्मों में अपनी आवाज़ दी।

अंतिम विदाई और अमर विरासत

केके कोलकाता में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर ही बेहोश हो गए और 31 मई 2022 को हार्टअटैक के कारण उनका निधन हो गया। वे उन हज़ारों प्रशंसकों के सामने आखिरी सांस ले रहे थे जो उनकी आवाज़ के दीवाने थे। 53 वर्ष की अल्पायु में दुनिया छोड़ जाने वाले केके आज भी अपनी आवाज़ के ज़रिए लाखों दिलों में ज़िंदा हैं — क्योंकि सच्चा कलाकार कभी नहीं मरता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस संघर्ष का प्रतीक है जो हर उस कलाकार ने झेला जो बिना किसी पहुँच के इंडस्ट्री में घुसने की कोशिश करता है। दुखद यह है कि जिस मंच ने उन्हें पहचान दी, उसी मंच पर उनकी साँसें थमीं — यह त्रासदी कलाकारों की शारीरिक और मानसिक सेहत को लेकर इंडस्ट्री की उदासीनता पर भी सवाल उठाती है। केके के जाने के बाद उनकी आवाज़ की जो माँग बढ़ी, वह साबित करती है कि असली कद मृत्यु के बाद ही पूरी तरह समझ में आता है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केके गायक कौन थे और उनका पूरा नाम क्या था?
केके का पूरा नाम कृष्ण कुमार कुन्नथ था। वे 23 अगस्त 1968 को नई दिल्ली में जन्मे एक मलयाली परिवार के गायक थे, जिन्होंने हिंदी समेत नौ भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए और 'तड़प तड़प', 'छोड़ आए हम' जैसे अमर गानों से करोड़ों दिल जीते।
केके ने सेल्समैन की नौकरी क्यों की थी?
बताया जाता है कि ग्रेजुएशन के बाद केके ने छह से आठ महीने सेल्समैन के तौर पर काम किया क्योंकि वे एक लड़की से प्यार करते थे और उसके परिवार को यह दिखाना था कि वे नौकरी करते हैं। कुछ महीनों बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली मंज़िल संगीत है, और उन्होंने मुंबई का रुख किया।
केके को बॉलीवुड में पहली बड़ी पहचान कब और किस गाने से मिली?
केके को बॉलीवुड में पहला मौका 1996 की फ़िल्म 'माचिस' के गाने 'छोड़ आए हम' से मिला, जो विशाल भारद्वाज ने उन्हें दिलाया था। हालाँकि असली बड़ी पहचान 1999 में संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'हम दिल दे चुके सनम' के गाने 'तड़प तड़प' से मिली।
केके का निधन कब और कैसे हुआ?
केके का निधन 31 मई 2022 को कोलकाता में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान हार्टअटैक के कारण हुआ। वे मंच पर प्रदर्शन कर रहे थे जब तबीयत बिगड़ी; उस समय उनकी आयु 53 वर्ष थी।
केके ने कितनी भाषाओं में गाने गाए?
केके ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती — कुल नौ भारतीय भाषाओं में फ़िल्मी गाने रिकॉर्ड किए। यही बहुभाषी पहुँच उन्हें पूरे भारत का गायक बनाती थी।
राष्ट्र प्रेस
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