केके: जिनकी आवाज़ में बसता था हर दिल का अफ़साना, प्यार पाने के लिए की थी सेल्समैन की नौकरी
सारांश
मुख्य बातें
दिवंगत गायक केके — पूरा नाम कृष्ण कुमार कुन्नथ — की आवाज़ कॉलेज के गलियारों से लेकर पहली मोहब्बत के एहसास तक, हर जगह गूंजती थी। 23 अगस्त 1968 को नई दिल्ली में जन्मे केके का परिवार मलयाली मूल का था, और उनकी आवाज़ ने आगे चलकर पूरे भारत के संगीत-प्रेमियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। 31 मई 2022 को महज़ 53 वर्ष की आयु में उनके जाने के बाद भी, उनके गाने आज भी उतनी ही शिद्दत से सुने जाते हैं।
शुरुआती जीवन और संगीत की नींव
केके ने सेंट मैरी स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और किरोड़ीमल कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। बताया जाता है कि उन्होंने महज़ दो वर्ष की आयु से ही गाना शुरू कर दिया था और कॉलेज के रॉक बैंड का हिस्सा भी रहे। किशोर कुमार की गायकी और आरडी बर्मन का संगीत उन पर गहरा प्रभाव डालता था।
करियर की पहली चमक उन्हें तब मिली जब गायक-संगीतकार लेस्ली लुईस ने उन्हें यूटीवी के लिए एक मिनट का जिंगल गाने का अवसर दिया। इसके बाद केके ने जिंगल्स की दुनिया में खुद को स्थापित किया और हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री का दरवाज़ा खटखटाने से पहले अनेक विज्ञापन जिंगल्स रिकॉर्ड किए।
प्यार के लिए बनी सेल्समैन की नौकरी
स्नातक के बाद के उनके जीवन का एक दिलचस्प किस्सा बताया जाता है। ग्रेजुएशन पूरी होने के बाद केके ने छह से आठ महीने तक सेल्समैन की नौकरी की। यह नौकरी उन्होंने इसलिए की क्योंकि वे एक लड़की से प्यार करते थे और उसके परिवार को यह दिखाना था कि वे कमाते हैं। हालाँकि, कुछ महीनों बाद ही केके को एहसास हो गया कि सेल्समैन बने रहना उनकी नियति नहीं है — उनकी मंज़िल संगीत में थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और बिना किसी गॉडफादर के, अपने दम पर संगीतकारों के दरवाज़े खटखटाने शुरू किए।
बॉलीवुड में पहचान और मील के पत्थर
केके को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका संगीतकार विशाल भारद्वाज ने दिया, जब उन्होंने गुलज़ार निर्देशित फ़िल्म 'माचिस' (1996) के लिए उनसे 'छोड़ आए हम' गवाया। लेकिन असली पहचान संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'हम दिल दे चुके सनम' (1999) के गाने 'तड़प तड़प' से मिली, जो श्रोताओं के दिल की गहराइयों तक उतर गया।
1999 में जब भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के लिए रवाना हो रही थी, तब केके ने टीम के लिए 'जोश ऑफ इंडिया' गाया, जिसने खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों में जोश भर दिया।
आवाज़ की अनोखी कशिश
केके के गानों की सबसे बड़ी खासियत उनका ताज़ापन और जोश था। जहाँ बॉलीवुड में एक के बाद एक रोमांटिक गाने आ रहे थे, वहीं केके के शुरुआती हिट गाने दोस्ती, जीवन के उतार-चढ़ाव और पुरानी यादों के खट्टे-मीठे एहसासों को बयाँ करते थे। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती — कुल नौ भाषाओं की फ़िल्मों में अपनी आवाज़ दी।
अंतिम विदाई और अमर विरासत
केके कोलकाता में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर ही बेहोश हो गए और 31 मई 2022 को हार्टअटैक के कारण उनका निधन हो गया। वे उन हज़ारों प्रशंसकों के सामने आखिरी सांस ले रहे थे जो उनकी आवाज़ के दीवाने थे। 53 वर्ष की अल्पायु में दुनिया छोड़ जाने वाले केके आज भी अपनी आवाज़ के ज़रिए लाखों दिलों में ज़िंदा हैं — क्योंकि सच्चा कलाकार कभी नहीं मरता।