कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: कांग्रेस नेताओं ने जताया दुख, लापरवाहों पर सख्त कार्रवाई की उठाई माँग
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के एक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेताओं ने 18 अक्टूबर 2026 को गहरा दुख व्यक्त किया और राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन से जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की। नेताओं ने घायलों के समुचित उपचार को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया।
कांग्रेस नेता उदित राज की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटना हुई। कांग्रेस पार्टी की ओर से पीड़ितों के प्रति संवेदना। सरकार को घायलों का बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित करना चाहिए ताकि उनकी जान बचाई जा सके।" उन्होंने यह भी कहा कि "निश्चित तौर पर लापरवाही हुई है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।"
हुसैन दलवई ने प्रशासनिक जवाबदेही पर दिया ज़ोर
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने प्रशासन की भूमिका को केंद्र में रखते हुए कहा, "यह सुनिश्चित करना कि ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो, यह जिम्मेदारी कहीं न कहीं प्रशासन की भी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ भी बड़े पैमाने पर सार्वजनिक आयोजन होते हैं, वहाँ अग्निशमन और भीड़ प्रबंधन की उचित व्यवस्था होना अनिवार्य है।
दलवई ने कहा, "जहां भी लोग बड़े पैमाने पर इकट्ठा होते हैं और ऐसे आयोजन होते हैं, सरकार को जवाबदेही लेनी चाहिए।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी घटनाएँ बार बार होने से जानें जाती हैं और इस नुकसान को रोकना राज्य एवं स्थानीय प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी है।
इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर की बैठक का संदर्भ
इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर को प्रस्तावित बड़ी बैठक का उल्लेख करते हुए दलवई ने कहा कि 12 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के बावजूद केंद्र सरकार SIR मामले और ज्ञानेश कुमार को हटाने के सवाल पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर की बैठक में देशभर के सभी राज्यों से प्रतिनिधि और विभिन्न संगठन शामिल होंगे।
उद्धव ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की इस टिप्पणी कि यदि केंद्र सरकार लोगों से मतदान और विरोध का अधिकार छीन रही है तो ऐसी सरकार को बदलने की ज़रूरत है — पर दलवई ने सहमति जताते हुए कहा, "यहाँ फासीवादी सरकार नहीं चलेगी। वर्तमान सरकार फासीवाद की ओर बढ़ रही है और हर कोई इसके खिलाफ खड़ा है।" उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा पर बल दिया।
घटना का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश में बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन की कमियाँ एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। गौरतलब है कि त्योहारी सीज़न में उत्तर भारत से लेकर पश्चिम बंगाल तक लाखों श्रद्धालु पूजा पंडालों में उमड़ते हैं, जिससे सुरक्षा इंतज़ामों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन की तैयारी और भीड़ नियंत्रण प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त किए जाने की आवश्यकता है।