पुणे जहरीली शराब कांड: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मांगी गहन जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ इलाके में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मांग की है कि इस मामले की तह तक जाकर जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि ऐसी जहरीली शराब आखिर कहाँ से आती है तथा इसे कैसे तैयार किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जहरीली शराब कांड पर दलवई की माँग
हुसैन दलवई ने कहा कि जहरीली शराब के मामले में केवल सतही कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — यह जानना ज़रूरी है कि यह शराब कहाँ से आई, इसे किसने बनाया और इसे बेचने की श्रृंखला में कौन-कौन शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में गहन जांच ही असली न्याय का रास्ता है।
घुसपैठ मुद्दे पर अमित शाह के बयान पर पलटवार
घुसपैठियों के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दलवई ने कहा, 'किसने रोका है? आप 2014 से सत्ता में हैं। अगर कार्रवाई करनी है तो करो, लेकिन कार्रवाई का नाम लेकर यहाँ के मुसलमानों को परेशान न करें। आपकी कार्रवाई अक्सर मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए होती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की कथित कार्रवाइयाँ एक विशेष समुदाय को प्रभावित करती हैं।
भारत-इजराइल संबंध और गाजा पर रुख
भारत-इजराइल संबंधों पर दलवई ने कहा कि दोनों देशों के बीच कभी 'अटूट रिश्ते' नहीं रहे। उनके अनुसार, 'हमारे अटूट संबंध ईरान के साथ थे, इजराइल के साथ नहीं। इजराइल जो गाजा के लोगों के साथ अन्याय कर रहा है, उसका हम पूर्ण विरोध करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने के बाद इस तरह के दावे किए जाते हैं।
ईंधन की बढ़ती कीमतों पर चिंता
तेल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी पर दलवई ने कहा कि कई जगहों पर साधारण पेट्रोल भी मुश्किल से मिल रहा है और सीएनजी की उपलब्धता भी संकट में है। उन्होंने पूछा कि हर जगह इतनी लंबी कतारें क्यों लग रही हैं और इसे 'कड़वी सच्चाई' करार दिया जो अब सामने आ रही है।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलाव पर प्रतिक्रिया
कर्नाटक में सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे को दलवई ने एक सामान्य और पूर्व-नियोजित व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा, 'यह समाधान तो सरकार बनते ही निकल आया था। सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के बीच आपसी सहमति से तय हुआ था कि सिद्दारमैया पहले तीन साल और शिवकुमार अगले दो साल मुख्यमंत्री पद संभालेंगे, इसलिए यह व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है।' उन्होंने इस बदलाव में कोई असामान्य बात नहीं बताई।