टीईटी पेपर लीक और राम मंदिर विवाद पर हुसैन दलवाई का भाजपा पर हमला, सरकार को बताया जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने 28 जून को महाराष्ट्र में हुए टीईटी पेपर लीक मामले पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पहले नीट पेपर लीक हुआ और अब महाराष्ट्र में भी यही हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले इस तरह की घटनाएँ नहीं होती थीं।
पेपर लीक पर सरकार की जवाबदेही
दलवाई ने कहा कि समाज में गलत तरीके से पैसे कमाने और जीवन बेहतर बनाने की होड़ मची हुई है। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहना चाहती है और विभागों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सब कुछ केवल धन अर्जन के लिए चल रहा है।
मुहर्रम घटना और सामाजिक माहौल
मुंबई में मुहर्रम के दौरान एक व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधियों पर दलवाई ने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसके पीछे जो भी लोग हों, उन्हें सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे मुस्लिम समुदाय का हाथ हो, यह ज़रूरी नहीं है। उनके अनुसार समाज में ऐसा माहौल बन गया है जिसमें किसी की जान लेना आसान समझा जाने लगा है।
मुंबई लोकल ट्रेन हत्याकांड और सामाजिक जिम्मेदारी
मुंबई लोकल ट्रेन में हुई हत्या पर दलवाई ने कहा कि लोग अब जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, इसीलिए पीड़ित को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया। उन्होंने सरकार से इस सामाजिक बदलाव पर ध्यान देने की माँग की। उनका कहना था कि जब सरकार स्वयं विधायकों, सांसदों और नेताओं को खरीद रही है, तो समाज में भी अमीर बनने की होड़ स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी।
ट्रंप के दौरे पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर दलवाई ने कहा कि यदि भारत से अमेरिका को फायदा होता है तो वे बार-बार आएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रंप के नाम पर टावर बन रहे हैं — यह किसके हित में है? उनका कहना था कि भारत को यह सोचना चाहिए कि ये दौरे किसके फायदे के लिए हो रहे हैं।
राम मंदिर विवाद और उद्धव ठाकरे
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर उद्धव ठाकरे के बयान को लेकर दलवाई ने कहा कि ठाकरे पहले भाजपा के साथ थे। उन्होंने कहा कि ठाकरे को यह स्वीकार करना चाहिए कि बालासाहेब ठाकरे का भाजपा के साथ जाने का निर्णय गलत था, क्योंकि इससे मराठी समाज के मुद्दे पीछे छूट गए और हिंदुत्व की राजनीति को प्राथमिकता मिली। दलवाई ने कहा कि उद्धव ठाकरे अपनी गलतियों में सुधार कर रहे हैं, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना होगा कि महाराष्ट्र की राजनीति में ये बयान कितना असर डालते हैं।