कोलकाता में डीएसपी बनकर ₹5 लाख ठगने की कोशिश, आरोपी राहुल रॉय गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने 30 सितंबर को राहुल रॉय नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिस पर आरोप है कि उसने खुद को राज्य पुलिस का डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) बताकर एक युवक को ब्लैकमेल किया और ₹5 लाख की जबरन वसूली की कोशिश की। मामला दक्षिण कोलकाता के कालीघाट इलाके का है, जहाँ आरोपी और पीड़ित दोनों निवासी हैं और एक-दूसरे से परिचित थे।
मामले का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, पीड़ित युवक हाल ही में कुछ निजी समस्याओं से जूझ रहा था। उसने अपने परिचित राहुल रॉय पर भरोसा करके उसे अपनी निजी परिस्थितियों की जानकारी दी। इसके बाद रॉय ने कथित तौर पर एक नकली पुलिस पहचान पत्र दिखाकर खुद को डीएसपी बताया और पीड़ित को विश्वास दिलाया।
शिकायत के मुताबिक, रॉय और उसके साथियों ने इसके बाद पीड़ित को धमकी दी कि यदि ₹5 लाख नहीं दिए गए, तो उसकी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दी जाएगी। दबाव में आकर पीड़ित ने 27 सितंबर को ₹10,000 और 28 सितंबर को ₹2,000 की राशि आरोपी को दी।
पीड़ित को हुआ संदेह, फिर दर्ज हुई शिकायत
रकम देने के बावजूद मांग जारी रहने पर पीड़ित को रॉय की असली पहचान पर संदेह हुआ। उसने जाँच-पड़ताल की और पता चला कि रॉय कोई पुलिस अधिकारी नहीं है और उसने जो पहचान पत्र दिखाया था, वह पूरी तरह नकली था।
इसके बाद पीड़ित ने कालीघाट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल तलाशी अभियान चलाया और बुधवार तड़के आरोपी राहुल रॉय को हिरासत में ले लिया।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएँ
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जाँच जारी है।
गौरतलब है कि पुलिस अधिकारी का रूप धारण करना और नकली पहचान पत्र का उपयोग दोनों ही गंभीर आपराधिक अपराध हैं, जो जबरन वसूली के आरोप के अतिरिक्त हैं।
जाँच के दायरे में क्या है
जाँचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि रॉय को नकली पुलिस पहचान पत्र कहाँ से और कैसे मिला। इसके अलावा यह भी जाँचा जा रहा है कि इस कथित जबरन वसूली की साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। रॉय के कथित साथियों की भूमिका और नकली पहचान पत्र बनाने की परिस्थितियाँ भी जाँच के दायरे में हैं।
आगे क्या होगा
मामले की जाँच कालीघाट पुलिस कर रही है और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया जाएगा। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि किस तरह व्यक्तिगत परिचय और भरोसे का दुरुपयोग कर डिजिटल ब्लैकमेलिंग और प्रतिरूपण के अपराध को अंजाम दिया जाता है।