कोलकाता में फर्जी पुलिस बनकर कारोबारी से ₹2 करोड़ की लूट, गिरोह का एक सदस्य गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के टॉलीगंज इलाके में 10 जुलाई 2026 को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर एक कारोबारी के कार्यालय से ₹2 करोड़ की नकदी लूटने वाले गिरोह के एक सदस्य को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी के पास से ₹5 लाख नकद बरामद हुए हैं, जबकि गिरोह के शेष सदस्य अभी भी फरार हैं।
घटनाक्रम: कैसे दिया गया वारदात को अंजाम
वारदात 10 जुलाई को दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रतापादित्य रोड स्थित एक कारोबारी के कार्यालय में हुई। गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कार्यालय में दाखिल हुए और दावा किया कि वहाँ रखी नकदी अवैध स्रोतों से अर्जित है।
आरोपियों ने फर्जी पुलिस पहचान पत्र दिखाए और कार्यालय में मौजूद कारोबारी व कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए, ताकि कोई बाहरी मदद न ले सके। इसके बाद कर्मचारियों को धमकाते हुए नकदी के बारे में पूछताछ शुरू की गई।
पूछताछ के दौरान आरोपियों को कार्यालय में रखे एक संदूक में बड़ी रकम होने की जानकारी मिली। कर्मचारियों पर दबाव बनाकर संदूक खुलवाया गया और उसमें रखे करीब ₹2 करोड़ लेकर गिरोह के सदस्य मौके से फरार हो गए।
शिकायत और जाँच की शुरुआत
घटना के कुछ घंटों बाद कारोबारी और कार्यालय प्रबंधन ने टॉलीगंज थाने में संपर्क किया। तब उन्हें पता चला कि कार्यालय में आए व्यक्ति असली पुलिसकर्मी नहीं थे। शिकायत दर्ज होने के बाद कोलकाता पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग और टॉलीगंज थाना पुलिस ने संयुक्त जाँच आरंभ की।
गौरतलब है कि इस प्रकार की 'फर्जी पुलिस लूट' की वारदातें देश के विभिन्न शहरों में समय-समय पर सामने आती रही हैं, जहाँ संगठित गिरोह वर्दी और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर कारोबारियों को निशाना बनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
गिरफ्तारी और बरामदगी
आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों की पहचान की गई। जाँच के दौरान शनिवार को गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से ₹5 लाख नकद बरामद हुए हैं।
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है और शेष साथियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी का सिलसिला चल रहा है। पुलिस लूटी गई शेष रकम बरामद करने के प्रयास में भी जुटी है।
आगे क्या होगा
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और ₹2 करोड़ की पूरी लूट की रकम की बरामदगी कोलकाता पुलिस की प्राथमिकता बनी हुई है। जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने फर्जी पुलिस पहचान पत्र कहाँ से हासिल किए और क्या इस गिरोह का नेटवर्क अन्य शहरों तक फैला है।