कोलकाता भगदड़: फोरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा — वेंटिलेशन-कूलिंग की कमी और बंद आपातकालीन द्वार बने मौत का कारण
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन समुदाय के दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर 2026 की रात हुई भीषण भगदड़ में 19 लोगों की मौत के मामले में सामने आई फोरेंसिक रिपोर्ट ने गंभीर संरचनात्मक खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल परिसर में वेंटिलेशन और कूलिंग व्यवस्था उस रात मौजूद भीड़ के लिहाज़ से पर्याप्त नहीं थी, जिससे घुटन की स्थिति पैदा हुई।
फोरेंसिक रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
कोलकाता पुलिस सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, फोरेंसिक जाँच में पाया गया कि चोरबागान सर्वजनिन के पंडाल में कुल 24 एयर कंडीशनिंग मशीनें लगाई गई थीं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 139 टन थी। पुलिस सूत्र के अनुसार, सामान्य या कम भीड़ की स्थिति में यह क्षमता पर्याप्त मानी जा सकती थी, किंतु भगदड़ की रात पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या तय क्षमता से कहीं अधिक हो गई।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उस रात बाहर हो रही बारिश ने स्थिति को और बिगाड़ा — पंडाल के भीतर मौजूद लोग बाहर निकलने से मना कर रहे थे, जबकि बाहर खड़े श्रद्धालु बारिश से बचने के लिए अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। इस दोतरफा दबाव ने उपलब्ध वेंटिलेशन और कूलिंग को निष्प्रभावी कर दिया, और पंडाल के भीतर घुटन की स्थिति उत्पन्न हो गई।
न्यायिक जाँच समिति का दौरा
न्यायिक जाँच समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार, 23 अक्टूबर 2026 को पंडाल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पंडाल के प्रवेश और निकास द्वार बेहद संकरे थे, और भीतर प्रकाश की कमी ने अफरातफरी की स्थिति को और गहरा किया होगा।
न्यायमूर्ति सरस्वती ने यह भी दावा किया कि जब पंडाल परिसर में अव्यवस्था फैलनी शुरू हुई, उस समय आपातकालीन निकास द्वार बंद था — जो कि भीड़ प्रबंधन के किसी भी बुनियादी मानक का उल्लंघन है। यह खुलासा इस त्रासदी की गंभीरता को और उजागर करता है।
विसर्जन और पंडाल की स्थिति
जाँच समिति ने स्पष्ट किया कि चोरबागान सर्वजनिन की प्रतिमाओं का विसर्जन शनिवार को किया जाएगा। हालाँकि, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त न्यायिक जाँच पैनल के अगले आदेश तक पंडाल की संरचना को यथावत रखा जाएगा, ताकि आगे की फोरेंसिक और तकनीकी जाँच संभव हो सके।
न्यायमूर्ति सरस्वती ने कहा कि मूर्तियों के विसर्जन में कोई बाधा नहीं है, परंतु विस्तृत जाँच के लिए पंडाल की भौतिक संरचना को सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
समानांतर जाँच और व्यापक संदर्भ
कोलकाता पुलिस की एक विशेष जाँच टीम (SIT) भी इस मामले की स्वतंत्र जाँच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की खामियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि भगदड़ की यह घटना न केवल स्थानीय आयोजकों की जवाबदेही, बल्कि प्रशासनिक अनुमति देने वाली प्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।
जाँच के नतीजे और न्यायिक समिति की अंतिम रिपोर्ट भविष्य में बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देशों की दिशा तय कर सकती है।