तेलुगु गंगा नहर से कृष्णा नदी का पानी चेन्नई पहुंचा, पूंडी जलाशय में 75 क्यूसेक प्रवाह जारी
सारांश
मुख्य बातें
तेलुगु गंगा नहर प्रणाली के ज़रिए कृष्णा नदी का पानी 1 जून 2026 को चेन्नई के जलाशयों तक पहुंच गया है। आंध्र प्रदेश के कंदलेरू जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद यह प्रवाह अब पूंडी जलाशय में 75 क्यूसेक की दर से दर्ज किया जा रहा है, जो भीषण गर्मी के बीच शहर की पेयजल आपूर्ति को मज़बूती देने वाला अहम कदम है।
मुख्य घटनाक्रम
जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिकारियों के अनुसार, कृष्णा नदी का पानी तिरुवल्लूर ज़िले के उथुकोट्टई स्थित जीरो पॉइंट से तमिलनाडु में प्रवेश करके पूंडी जलाशय तक पहुंचा। यह जलाशय चेन्नई की पेयजल ज़रूरतें पूरी करने वाले चार प्रमुख जलाशयों में से एक है।
प्रारंभ में यह प्रवाह 28 मई को 50 क्यूसेक की दर से सीमा पर पहुंचा था — अनुमानित तिथि 25 मई से तीन दिन की देरी के साथ। तब से प्रवाह दर बढ़कर 75 क्यूसेक हो गई है। इस पानी को नहर प्रणाली के ज़रिए तमिलनाडु सीमा तक पहुंचने से पहले लगभग 152 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी।
देरी के कारण
जल संसाधन विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेलुगु गंगा नहर के कई हिस्सों में खराब रखरखाव और गाद का जमाव देरी का मुख्य कारण रहा। नहर मार्ग में रिसाव और जल अवशोषण के चलते प्रवाह की गति धीमी पड़ गई, जिससे तमिलनाडु की ओर पानी पहुंचने में विलंब हुआ।
चेन्नई जलाशयों की मौजूदा स्थिति
यह जल प्रवाह ऐसे समय में आया है जब शहर के जलाशयों में कुल मिलाकर 7.154 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध है, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का लगभग 54.11 प्रतिशत है। अधिकारियों ने विश्वास जताया है कि निरंतर जल प्रवाह से भंडारण स्तर और मज़बूत होगा।
समझौते की पृष्ठभूमि
तेलुगु गंगा परियोजना समझौते के तहत आंध्र प्रदेश प्रतिवर्ष कृष्णा नदी का पानी तमिलनाडु को उपलब्ध कराता है। इस समझौते के अनुसार, तमिलनाडु को प्रतिवर्ष 12 टीएमसी फीट जल प्राप्त करने का अधिकार है — जिसमें जुलाई-अक्टूबर के दौरान 8 टीएमसी फीट और जनवरी-अप्रैल के बीच 4 टीएमसी फीट शामिल है।
गौरतलब है कि इस बार पानी छोड़ा जाना तमिलनाडु के अधिकारियों के आंध्र प्रदेश से किए गए विशेष अनुरोध के बाद हुआ, जिसमें गर्मियों के महीनों में चेन्नई की बढ़ती पेयजल मांग का हवाला दिया गया था। इस अनुरोध पर आंध्र प्रदेश सरकार ने कंदलेरू जलाशय से लगभग 1,900 क्यूसेक पानी तेलुगु गंगा नहर नेटवर्क में छोड़ा।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, निरंतर जल प्रवाह से आने वाले महीनों में चेन्नई की पेयजल आपूर्ति के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित होगी। नहर के रखरखाव और गाद की समस्या के दीर्घकालिक समाधान पर भी ध्यान देने की ज़रूरत बनी हुई है, ताकि भविष्य में इस तरह की देरी से बचा जा सके।