क्या एसिडिटी की समस्या आपको परेशान कर रही है? भोजन के बाद सौंफ और मिश्री का सेवन दिलाएगा राहत
सारांश
Key Takeaways
- सौंफ और मिश्री एसिडिटी के लिए प्रभावी हैं।
- यह घरेलू नुस्खा पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
- सौंफ का सेवन मुंह की दुर्गंध को कम करता है।
- यह उपाय बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है।
- सौंफ वजन नियंत्रित करने में मदद करती है।
नई दिल्ली, 12 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। सीने और पेट में जलन, खट्टी डकार, जी मिचलाना और खाना खाने के बाद पेट भारी लगना एसिडिटी के प्रमुख लक्षण हैं। इस समस्या से राहत पाने के लिए सौंफ और मिश्री एक उत्कृष्ट विकल्प हो सकते हैं।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेद के अनुसार, एसिडिटी के समाधान में सौंफ और मिश्री का सेवन एक सुरक्षित और फायदेमंद उपाय है। यह घरेलू नुस्खा न केवल पेट की जलन को कम करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सौंफ में प्राकृतिक शीतलता होती है, जो पेट में बढ़े एसिड को संतुलित करती है। सौंफ के दाने चबाने से मुंह में लार का स्राव बढ़ता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एनेथोल नामक तत्व गैस, सूजन और पेट दर्द को कम करता है। मिश्री की मिठास और ठंडक पित्त दोष को शांत करती है, जो एसिडिटी का मुख्य कारण होता है।
सौंफ को हल्का भूनकर उसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर भोजन के बाद चबाने या गुनगुने पानी के साथ लेने पर न केवल एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है, बल्कि अपच और भारीपन की समस्या भी दूर होती है।
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सौंफ-मिश्री का मिश्रण बिना किसी साइड इफेक्ट के एसिडिटी का समाधान है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित है।
एसिडिटी की समस्या को दूर करने के साथ ही, सौंफ कई अन्य समस्याओं को भी हल करने में सहायक है। सौंफ चबाने से मुंह में लार बनती है, जो बैक्टीरिया को खत्म करती है और इससे सांसों की बदबू दूर होती है। सौंफ का पानी पीने से भूख नियंत्रित होती है और मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है।
यह फैट बर्न करने में भी सहायक है, जिससे वजन नियंत्रित होता है। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह पीरियड्स के दौरान दर्द और अनियमितता को कम करता है। इसके अलावा यह हार्मोन संतुलन में मदद करता है और आंखों की रोशनी को बढ़ाने के साथ-साथ त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी है।