क्या भारतीय संविधान, एकात्मकता और सीमाओं की सुरक्षा हमारा परम राष्ट्रीय कर्तव्य है? : दत्तात्रेय होसबाले

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क्या भारतीय संविधान, एकात्मकता और सीमाओं की सुरक्षा हमारा परम राष्ट्रीय कर्तव्य है? : दत्तात्रेय होसबाले

Key Takeaways

  • संविधान की सुरक्षा हमारा कर्तव्य है।
  • एकता और अखंडता का महत्व।
  • भीष्म पितामह से प्रेरणा लेना चाहिए।
  • समाज की सेवा में सक्रिय रहना।
  • धर्म और सत्य पर आधारित जीवन जीना।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर, सोमवार 26 जनवरी को, दिल्ली के केशवकुंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने झंडोत्तोलन किया और उपस्थित सभी को संबोधित किया।

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए, दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि आज हमें अपने जीवन में भारत के चिरंतन आध्यात्मिक मूल्यों, नागरिक कर्तव्यों और राष्ट्रधर्म का पालन करने का प्रण लेना चाहिए। अपने संविधान की सुरक्षा, भारत की एकात्मकता और सीमाओं की सुरक्षा करना हमारा परम राष्ट्रीय कर्तव्य है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस भीष्म अष्टमी के पावन अवसर पर आया है, जो इसे और विशेष बनाता है। महाभारत के भीष्म पितामह के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि भीष्म ने राजधर्म, प्रजाधर्म और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी प्रासंगिक है। चरित्र, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित जीवन ही सच्चा प्रजाधर्म है, जबकि सज्जनों की रक्षा और दुष्ट शक्तियों का दमन करना राजधर्म का मूल तत्व है।

होसबाले ने तिरंगे, अशोक चक्र और राष्ट्रीय आदर्श वाक्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आत्मा सत्य और धर्म पर आधारित है। उन्होंने "सत्यमेव जयते" और "यतो धर्मस्ततो जयः" को भारतीय शासन, न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र की मूल भावना बताया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की सुरक्षा, भारत के तिरंगे और राष्ट्रीय एकात्मकता की रक्षा, यह सब सत्य और धर्म के आधार पर है।

सरकार्यवाह ने कहा कि जो बात भीष्म ने बताई थी, वही बात भारत की सनातन परंपरा है। वही बात आधुनिक युग में भी प्रासंगिक है और विश्व के लिए एक श्रेष्ठ उदाहरण है। इसलिए हमें भारत के गणतंत्र की रक्षा करने के लिए समाज के प्रति प्रीत, प्रेम, संवेदना, हमारे दुर्बल लोगों के प्रति स्नेह और आत्मीयता और उनकी सेवा की भावना रखनी चाहिए।

होसबाले ने कहा कि भारत के प्रत्येक क्षेत्र में, प्रत्येक आयाम में जीवन को विकसित करने के लिए हमें हर क्षण, हर कण प्रयास करना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी साधना को पिछले सौ वर्षों से किया है। भारत के गणतंत्र की रक्षा, भारत के समाज की सेवा, भारत के राष्ट्र धर्म को ज्ञात करके उसकी प्रेरणा से आगे बढ़ना। आज के दिन भी यही हमारे लिए अत्यंत प्रासंगिक संदेश है। इसी बात को हम सभी न केवल स्मरण रखें, बल्कि इसके लिए अपने जीवन में सतत सक्रिय रहें, सजग रहें और उसी कर्तव्य को निभाने के लिए आगे बढ़ें। इसमें ईश्वर के आशीर्वाद और भारत माता की कृपा हम सबके ऊपर रहे।

Point of View

जो आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। ऐसे विचार हमें एकजुट होकर अपने देश की रक्षा करने और समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

दत्तात्रेय होसबाले ने गणतंत्र दिवस पर क्या कहा?
उन्होंने भारत के संविधान, एकात्मकता और सीमाओं की सुरक्षा को राष्ट्रीय कर्तव्य बताया।
भीष्म अष्टमी का क्या महत्व है?
यह दिन महाभारत के भीष्म पितामह की याद दिलाता है और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर है।
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