क्या चुनाव आयोग विपक्ष के सवालों का जवाब देगा?

सारांश
Key Takeaways
- चुनाव आयोग ने 5 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने का निर्णय लिया है।
- विपक्ष का आरोप है कि आयोग सत्ताधारी पार्टी के दबाव में है।
- राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा शुरू की है।
- मतदाता सूची में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
- चुनाव आयोग ने विपक्ष से हलफनामा दायर करने का आग्रह किया है।
नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। इन दिनों विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि आयोग सत्ताधारी पार्टी के दबाव में काम कर रहा है और देशभर में 'वोट चोरी' जैसी घटनाएं हो रही हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर एक बड़ा आंदोलन शुरू करते हुए बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' की शुरुआत की है। इस यात्रा में विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल हैं और जनता से सीधे संवाद किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग देशभर के नागरिकों से 5 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने की योजना बना रहा है। आयोग का यह कदम मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने और इस प्रक्रिया में जनभागीदारी को बढ़ाने के लिए है।
चुनाव आयोग के प्रश्न इस प्रकार हैं:
क्या मतदाता सूची की गहन जांच होनी चाहिए?
क्या मरे हुए लोगों के नाम हटाने चाहिए?
क्या जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में दो या अधिक जगह पर हैं, उनके नाम एक ही जगह पर होना चाहिए?
क्या जो लोग दूसरी जगह बस गए हैं, उनके नाम हटाने चाहिए?
क्या विदेशियों के नाम हटाने चाहिए?
इसके बाद कहा गया है, "अगर उत्तर 'हां' में है, तो चुनाव आयोग को मतदाता सूची को शुद्ध बनाने के इस कठिन कार्य में सहयोग करें।"
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाए हैं। इसके जवाब में आयोग ने नेता प्रतिपक्ष से हलफनामा दायर करने के लिए कहा है। आयोग ने कहा कि या तो राहुल हलफनामा दायर करें, या देश से माफी मांगे। राहुल ने इससे मना कर दिया था। वे हाल ही में एसआईआर के मुद्दे पर आयोग को घेर रहे हैं।
इससे पहले, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से पांच सवाल पूछे थे। उनके सवाल इस प्रकार थे: विपक्ष को डिजिटल मतदाता सूची क्यों नहीं दी जा रही? आप क्या छिपा रहे हैं? सीसीटीवी और वीडियो साक्ष्य मिटाए जा रहे हैं - क्यों? किसके आदेश पर? फर्जी वोटिंग और मतदाता सूची में हेरफेर - क्यों? विपक्षी नेताओं को धमकाना और डराना - क्यों? हमें यह स्पष्ट बताएं - क्या चुनाव आयोग अब भाजपा का एजेंट बन गया है?