क्या कोलकाता में ईडी की छापेमारी राजनीतिक द्वेष का परिणाम है?
सारांश
Key Takeaways
- संदीप दीक्षित ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना की।
- भाजपा पर राजनीतिक द्वेष के आरोप।
- ममता बनर्जी की चुनावी संभावनाएं मजबूत।
- उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में अनियमितताएं।
- टीएमसी के विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित ने कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा हर कदम राजनीतिक द्वेष के तहत उठाती है। ईडी के छापे केवल भाजपा के विरोधियों पर ही होते हैं।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए संदीप दीक्षित ने कहा, "यह संभव नहीं है कि ईडी कानून के अनुसार काम कर रही है। पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा पूरी तरह से चिंतित है। भाजपा को लगता है कि वह आगामी चुनावों में सफल नहीं हो पाएगी, इसलिए वह सांप्रदायिकता फैलाने का प्रयास कर रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि यह स्पष्ट हो रहा है कि ममता बनर्जी फिर से आराम से चुनाव जीतने जा रही हैं। इसी हताशा में भाजपा ने ये कदम उठाए हैं।
ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, "यह स्वाभाविक है कि जब ईडी किसी सहयोगी के खिलाफ कार्रवाई करती है तो हम उनसे मिलने जाएंगे। यह कैसे कह सकते हैं कि ईडी के कार्य में बाधा डाली गई? भाजपा हर कार्य में राजनीतिक द्वेष का पालन करती है। किस तरह से मान लें कि ईडी का कार्य स्वतंत्र और निष्पक्ष होगा?"
दिल्ली में टीएमसी सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस नेता ने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों से मिलना चाहिए था। लेकिन असलियत यह है कि भाजपा सरकार सच का सामना नहीं कर पाती है।"
उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के बाद 2.89 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए जाने पर संदीप दीक्षित ने कहा, "उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की सही से जांच होनी चाहिए। बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे गए हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के नेता बूथ पर 200-200 मतदाता बढ़ाने का दावा करते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, "अगर उनकी यह बात सही है तो फिर एसआईआर प्रक्रिया में खामी है।"
संदीप दीक्षित ने अखिलेश यादव और कांग्रेस की राज्य इकाई से अनुरोध किया कि वे उत्तर प्रदेश में पूरी एसआईआर प्रक्रिया पर पैनी नज़र रखें। यदि एक भी नाम गलत तरीके से जोड़ा जाता है तो उसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।