क्या घुसपैठिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का मुख्य मुद्दा होंगे? : संजय निरुपम
सारांश
Key Takeaways
- घुसपैठियों का मुद्दा पश्चिम बंगाल चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकता है।
- ममता बनर्जी को भारतीय नागरिकों के वोट से चुनाव जीतना होगा।
- एआर रहमान के आरोपों पर संजय निरुपम ने अपनी राय रखी है।
मुंबई, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा घुसपैठियों के संबंध में दिए गए बयान पर शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने सहमति जताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है।
मुंबई में राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सही कहा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव का मुख्य मुद्दा घुसपैठिए हैं। ये घुसपैठिए मुख्य रूप से बांग्लादेशी मुसलमान और रोहिंग्या हैं। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा की कुल सीटों में से लगभग 30 प्रतिशत ऐसी सीटें हैं, जहां मुस्लिम वोटरों का दबदबा है और उनकी संख्या निर्णायक है। मुस्लिम वोटर हमारे हैं, लेकिन जिस तरह से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम अवैध रूप से वोटर लिस्ट में डलवाए गए, वह बेहद खतरनाक है। घुसपैठियों के खिलाफ जनजागरण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की बदौलत ममता बनर्जी चुनाव जीतीं। इस बार वे ऐसा करने में सफल नहीं होंगी। अगर उन्हें चुनाव जीतना है तो भारतीय नागरिकों के वोट के दम पर चुनाव जीतें।
ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए शिवसेना नेता ने कहा कि ग्रीनलैंड एक छोटा सा टापू है, जिसे हड़पने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। इसका विरोध यूरोप के कुछ देश कर रहे हैं। अमेरिका को यह दादागिरी छोड़ देनी चाहिए। जो देश विरोध कर रहे हैं, ट्रंप उन पर टैरिफ लगा देने की बात कहते हैं। इससे संभव है कि अमेरिकी नागरिकों पर ही बुरा असर पड़ेगा।
मशहूर संगीतकार एआर रहमान के एक बयान को लेकर शिवसेना नेता ने कहा कि रहमान एक महान संगीतकार हैं और हम सभी को उन पर गर्व है। वे भारत के पहले म्यूजिशियन हैं, जिन्हें ऑस्कर मिला। आज अगर वे बूढ़े हो गए हैं, उनकी क्रिएटिविटी में नयापन नहीं रहा है, और फिल्म डायरेक्टर व प्रोड्यूसर उन्हें फिल्में नहीं दे रहे हैं, तो इसमें मुस्लिम एंगल ढूंढना बहुत घटिया बात है। रहमान को हिंदू-मुस्लिम नहीं करना चाहिए।
शिवसेना नेता ने कहा कि ऑस्कर सम्मानित फिल्म संगीतकार एआर रहमान ने बॉलीवुड पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगाया है। वे मुस्लिम हैं, इसलिए पिछले आठ वर्षों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें काम नहीं दिया है। यह आरोप बेबुनियाद है और उनके जैसे महान संगीतकार के लिए सर्वथा अशोभनीय है। सच यह है कि रहमान खुद भारी नखरेबाज हैं। उन्हें साइन करना मतलब प्रोड्यूसर-डायरेक्टर को चेन्नई जाना पड़ता है और वे रिकॉर्डिंग भी चेन्नई में ही करते रहे हैं। उनके इतने नखरे जब वे शीर्ष पर थे तो मुंबईवालों ने झेले। अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए पूरी फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम कर रहे हैं। जावेद अख्तर जैसे गीतकारों ने उनसे असहमति जताई है। बाकी फिल्मवालों को भी सामने आना चाहिए।