क्या लौकहा विधानसभा सीट राजनीति की नई कसौटी बनेगी? नेपाल से सटी कर्नाट वंश की धरती पर 2025 का चुनाव

सारांश
Key Takeaways
- लौकहा विधानसभा क्षेत्र का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।
- 2025 के चुनाव में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
- लौकहा की कुल आबादी 5.85 लाख से अधिक है।
- पिछले चुनावों में सियासी पेंडुलम झूलता रहा है।
- लौकहा नेपाल सीमा के निकट स्थित है।
पटना, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल से सटे बिहार का लौकहा क्षेत्र ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मधुबनी जिले की लौकहा विधानसभा सीट न केवल मिथिला की समृद्ध विरासत का प्रतीक है, बल्कि यह कर्नाट राजवंश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
कर्नाट वंश के शासक नान्यदेव के शासनकाल में यह क्षेत्र नेपाल के तराई इलाकों तक फैला हुआ था, जब तक ब्रिटिश काल में तिरहुत के कुछ हिस्से नेपाल को नहीं सौंप दिए गए। यही कारण है कि आज भी नेपाल के ठाढ़ी शहर की निकटता इस क्षेत्र की सांस्कृतिक संरचना में स्पष्ट दिखाई देती है।
लौकहा का भूभाग उत्तर बिहार की तरह समतल, उपजाऊ और बाढ़ प्रभावित है। यहां बहने वाली भुतही बलान नदी छठ जैसे पर्वों पर श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बनी रहती है। परिवहन के दृष्टिकोण से यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग 57 के माध्यम से खुटौना और फुलपरास से जुड़ा हुआ है।
लौकहा में लौकहा बाजार रेलवे स्टेशन है, जो नेपाल सीमा के निकटतम रेलवे स्टेशन भी है। इसका दूसरा निकटतम रेलवे स्टेशन जयनगर है, जो 35 किमी दूर है। लौकहा भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है, जहां राज्य राजमार्ग 51 (खुटुआना-लौकाहा रोड) इसे नेपाल के कई शहरों से जोड़ता है।
2024 के प्रक्षिप्त जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार, लौकहा की कुल आबादी 5.85 लाख से अधिक है, जिसमें 3 लाख पुरुष और 2.84 लाख महिलाएं शामिल हैं। 2024 की वोटर लिस्ट के अनुसार, यहां कुल 3.5 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.81 लाख पुरुष, 1.68 लाख महिलाएं और 10 थर्ड जेंडर शामिल हैं।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो लौकहा में मुस्लिम और यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इसके अलावा, ब्राह्मण, पासवान और रविदास समुदाय के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं।
चुनावी आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो विधानसभा चुनावों में यहां सियासी पेंडुलम झूलता रहा है। वर्ष 2015 में जेडीयू के लक्ष्मेश्वर राय ने जीत हासिल की थी, जबकि 2020 में यह सीट राजद के भारत भूषण मंडल के खाते में गई। ऐसे में 2025 का मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है।