क्या पीएम मोदी ने पूर्वोत्तर की सोच में बदलाव किया है? केंद्रीय मंत्री टोकन साहू का बयान
सारांश
Key Takeaways
- टोकन साहू ने कहा कि विकास के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय आवश्यक है।
- मणिपुर में कई प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
- सुरक्षा स्थिति और बाढ़ ने परियोजनाओं में बाधा डाली है।
- जल-सुरक्षित शहरों के लिए नई योजना पर ध्यान दिया गया।
इंफाल, १७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री टोकन साहू ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षित विकास पहलों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों की सोच और तस्वीर को पूरी तरह से बदल दिया है।
मंत्री ने मणिपुर में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की। इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (इंडिया) लिमिटेड की विभागीय समीक्षा बैठकें भी कीं।
टोकन साहू ने कहा कि मणिपुर के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार के साथ घनिष्ठ समन्वय में कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तुत की गई सभी प्रस्तुतियाँ संतोषजनक रहीं, लेकिन अधिकारियों को योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं और चुनौतियों से मंत्रालय को अवगत कराना चाहिए।
मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं को निश्चित समयसीमा के भीतर पूरी तरह लागू और समाप्त किया जाए, भले ही विशेष परिस्थितियों में कुछ अपवाद करने पड़ें। उन्होंने अधिकारियों से उन योजनाओं पर लिखित रिपोर्ट देने को भी कहा, जिन्हें क्रियान्वयन के दौरान विशेष ध्यान की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 की पूर्णता में हो रही देरी पर टिप्पणी करते हुए साहू ने कहा कि प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंत्रालय को प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं, खासकर जब इस योजना की 2.0 पहले ही लागू की जा चुकी है।
बैठक के दौरान राज्य सरकार की विभिन्न केंद्र प्रायोजित प्रमुख योजनाओं पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।
पुराने सचिवालय, बाबूपारा (इंफाल) के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस समीक्षा बैठक में स्वच्छ भारत मिशन–शहरी 2.0, दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि की प्रगति की समीक्षा की गई।
इंफाल स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अधिकारियों ने २१ पूर्ण परियोजनाओं और चार प्रगति पर चल रही परियोजनाओं की स्थिति प्रस्तुत की।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से बनी सुरक्षा स्थिति और लगातार दो वर्षों में आई अभूतपूर्व बाढ़ के कारण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में बाधा आई है। इसके चलते क्रियान्वयन एजेंसियों ने परियोजनाओं की समयसीमा सितंबर २०२६ तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
वहीं, नगर नियोजन विभाग ने ‘जल-सुरक्षित शहरों’ के उद्देश्य वाली एएमआरयूटी 2.0 योजना का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थोउबल, काकचिंग, बिष्णुपुर और जिरीबाम इन छह जिलों के २७ शहर इस मिशन के अंतर्गत पात्र हैं।
विभाग ने बताया कि इस योजना का फोकस उन शहरों पर है, जो पिछली योजनाओं में शामिल नहीं थे, और इसमें केंद्र व राज्य के बीच ९०:१० के अनुपात में वित्तपोषण किया जा रहा है।